2018

पुस्तक समीक्षा // वामन में विराट की कथा यात्रा-‘‘घोसला और घर और अन्य कहानियां‘‘ // वीरेन्द्र ‘सरल‘

व्यथा के कोख से ही कथा पैदा होती है। व्यथा अर्थात जीवन की वेदना। वेदना को वही महसूस करता है जिसके भीतर संवेदना होती है। बिना संवेदना के हम अ...

ईबुक - उपन्यास - अक़ाब // प्रबोध कुमार गोविल

प्रबोध कुमार गोविल का उपन्यास अक़ाब नीचे स्क्रीन पर पढ़ें. फुलस्क्रीन में बड़े आकार में पढ़ने के लिए संबंधित आइकन पर क्लिक करें. पीडीएफ ईबुक...

माह की कविताएँ

देवेन्द्र कुमार पाठक एक जनगीत- मोरी गुँइया   मैं संग कसाई के व्याही, मोरी गुँइया;   मैं संग कसाई के व्याही!   काम पियारो, न चाम पियारो; उ...

खंजन नयन, में सूरदास की जीवनी : तथ्यों की प्रामाणिकता डॉ चंचल बाला

'खंजन नयन' जीवनी नहीं, जीवनीपरक उपन्यास है, अत: इसमें सूरदास के जीवन सम्बन्धी तथ्यों को कल्पना के सहारे इस प्रकार रचा गया है कि वे ...

हास्य - व्यंग्य : पलटी मार कवि से मुलाकात // यशवंत कोठारी

कल बाज़ार में सायंकालीन आवारा गर्दी के दौरान पल्टीमार कवि फिर मिल गए. बेचारे बड़े दुखी थे. उदास स्वर में बोले-क्या बताऊँ यार पहले एक संस्था म...

सुशांत सुप्रिय की कविताएँ

      1. बचपन                                -------------                                                        --- सुशांत सुप्रिय दशक...

रागिनी शर्मा की कविताएँ

01 ज़र्रा ज़र्रा लगता है सँवरा हुआ -----------------------------------/ बहारों को हमने है न्यौता दिया अभी अपना मन भी है महका हुआ मुस्कान...

मिनी कथाएं : घर –परिवार –कथाएं –व्यथाएँ // यशवंत कोठारी

1- स्मार्ट बहू काम वाली नहीं आई थी, सास ने जल्दी सारा काम निपटा दिया. कुछ दिनों बाद फिर ऐसा ही हुआ. बहु कार लेकर गई. अपनी सहेली के यहाँ से क...

हास्य-व्यंग्य नाटक : जमाल मियां और उनके मुसाहिब - लेखक दिनेश चन्द्र पुरोहित

मंज़र एक नए किरदार -: दाऊद मियां – स्कूल के ऑफिस असिस्टेंट, उम्र छप्पन साल, सस्ते भाव में लिए गए पतलून और बुशर्ट पहने, नज़दीक की नज़र कम...