---प्रायोजक---

---***---

रु. 25,000+ के  नाका लघुकथा पुरस्कार हेतु लघुकथाएँ आमंत्रित हैं.

अधिक जानकारी के लिए यहाँ [लिंक] देखें. आयोजन में अब तक प्रकाशित लघुकथाएँ यहाँ [लिंक] पढ़ें.

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

बाल विज्ञान-कथा // चाँद के चक्कर में // कल्पना कुलश्रेष्ठ // विज्ञान कथा / जनवरी-मार्च 2018

साझा करें:

य ह अक्टूबर 2115 की एक सुहावनी सुबह थी। दिल्ली की चौड़ी, साफ-सुथरी सड़कें काँच की तरह चमक रही थीं। सड़क के दोनों ओर बनी रंगबिरंगी गगनचुम्बी इ...

clip_image002 ह अक्टूबर 2115 की एक सुहावनी सुबह थी। दिल्ली की चौड़ी, साफ-सुथरी सड़कें काँच की तरह चमक रही थीं। सड़क के दोनों ओर बनी रंगबिरंगी गगनचुम्बी इमारतें बड़ी मनोरम दिखाई दे रही थीं। इनकी बालकनी में लगे वर्टिकल फॉरेस्ट सुंदर फूलों से लदे खुशबू बिखेर रहे थे। आकाश में कहीं-कहीं कृत्रिम रूप से बनाये गए चमकदार रंगीन बादल छाए हुए थे। जो किसी विशेष पदार्थ से बने होने के कारण धूल, धुआँ और प्रदूषण सोखकर वातावरण को शुद्ध कर रहे थे। स्मार्ट इमारतों में लगे कंप्यूटराइज्ड सिस्टम के कारण इनकी डिजाइन जरूरत के हिसाब से बदलती जा रही थी। ऐसी ही एक किताबनुमा आकृति की इमारत पर लिखा हुआ ‘दिल्ली मॉन्टेसरी स्कूल’ का बोर्ड बहुत दूर से ही झिलमिला रहा था।

स्कूल की एक कक्षा में रोहन व शीना अपने दोस्तों के साथ बैठे अपने ह्यूमेनॉइड रोबो शिक्षक की बातें बड़े ध्यान से सुन रहे थे, जो उन्हें पाई का मान निकालना सिखा रहे थे। स्कूल के कुछ शिक्षक साइबोर्ग, कुछ रोबो तो कुछ मौलिक मनुष्य थे। स्कूल के अधिकतर कार्य जैसे- खेलकूद, पी.टी., संगीत व कला की जिम्मेदारी रोबो कर्मचारियों पर ही थी। हालाँकि स्कूलों में अब पढ़ाई इतनी महत्वपूर्ण नहीं रह गई थी जितना कि बच्चों में मेल-जोल, भावनात्मक विकास और सामाजिकता बढ़ाना। तेजी से यांत्रिक होते जा रहे समाज में कई प्रकार की भावनाएँ लुप्त होने लगी थीं, जबकि समाज वैज्ञानिकों का मानना था कि दिमाग के संपूर्ण विकास के लिए यह सब जरूरी था। इसलिए पुराने समय के स्कूलों जैसा वातावरण आज भी कायम था।

थोड़ी देर बाद लंचटाइम में वे सब बाहर आ गए।

‘इस बार जाड़े की छुट्टियों में कहाँ जाने का कार्यक्रम है शीना?’ यह विमल था।

‘हम लोग इस बार मून पर जाएँगे। वहाँ हमारे मामा रहते हैं। हम सबने ‘प्लैनेट पासपोर्ट’ बनवा लिया है और मून वीजा के लिए आवेदन भी कर दिया है’ शीना ने खुश होकर बताया।

‘हमारी नानी मून के मशहूर रेस्तराँ ‘फूडी’ में शेफ हैं। कुछ दिनों बाद वह रिटायर हो रही हैं। मून से वापस आते समय नानी साथ आ जाएँगी और फिर हमारे पास ही रहेंगी’ रोहन भी बेहद खुश दिखाई दे रहा था। आधी छुट्टी के बाद स्कूल उन्हें जूलॉजिकल पार्क और कुतुबमीनार दिखाने ले जाने वाला था। बच्चे उसे देखने के लिए बहुत उत्सुक थे। कुछ देर बाद स्कूल की एयरबस में बैठकर वे सब जूलॉजिकल पार्क पहुँच कर घूमने लगे।

‘देखो तो यह शेर कैसा डरावना लग रहा है’ रोमांचित हुए सोनू ने रोहन से कहा।

‘हाँ बच्चे , लेकिन डरने की कोई बात नहीं। इतनी ऊँची चारदीवारी जो है। वैसे भी शेर, तेंदुआ, गैंडा और दरियाई घोड़ा एकदम असली लगने वाले कंप्यूटराइज्ड मॉडल हैं। सिर्फ बंदर, लोमड़ी और भेड़िया जैसे छोटे जानवर ही असली हैं’ गाइड ने बताया।

‘ओह ऐसा क्यों? नकली जानवर क्यों रखे गए हैं?’ वे हैरान थे।

‘क्योंकि इनकी नस्लें धरती से विलुप्त हो चुकी हैं। लेकिन मनुष्य को प्रकृति की समीपता का अनुभव कराने के लिए उनके हूबहू मॉडल यहाँ रखे गए हैं। जानते हो आसमान में उड़ने वाली निन्यानवे प्रतिशत गौरैयाँ रोबोटिक हैं। जो चिड़िया तुम्हारे बर्ड हाउस में रह रही है वह असली है या रोबोटिक, तुम नहीं जान सकते। जीवों की हजारों प्रजातियाँ लुप्त हो जाने के बाद अब मनुष्य को अक्ल आई है। लेकिन देर हो चुकी है।’ गाइड जो पूर्ण मनुष्य था, न जाने क्यों गुस्से में आ गया था।

‘सही कहा लेकिन जो कुछ बचा है उसे तो सहेज सकते हैं न। जैसे अब भोजन के लिए जानवर नहीं मारे जाते क्योंकि माँस आज प्रयोगशालाओं और फैक्ट्रियों में कोशिकाओं के संवर्धन से बनाया जा रहा है। वैसे ही जैसे बीज से पौधा’ शर्मा सर ने कहा।

‘ओह हाँ मैंने पढ़ा था कि पुराने जमाने में लोग पशुओं को मारकर खाते थे’ शीना ने सिहर कर कहा।

‘अब चलो, हमें कुतुबमीनार देखने भी जाना है। पहले कुछ खा लेते हैं। स्कूल की ओर से सबके लिए लंच है। पार्क की कैंटीन भी खुलने वाली है।’ शर्मा सर ने बहस खत्म करते हुए कहा।

आपस में बातचीत करते वे कैंटीन की ओर चल दिए। हाथी की आकृति जैसी बनी कैंटीन में बैठकर उन्होंने जमकर खाया-पीया। कुछ देर बाद फिर स्कूल की एयर बस में सवार वे कुतुबमीनार की ओर जा रहे थे। ऊपर बहुत ट्रैफिक था। बैलून वैन और एयर बस की भीड़ के अलावा पीठ पर छोटे-छोटे रॉकेट लगाये लोग भी उड़ते फिर रहे थे और जब-तब ‘स्काई रेड सिगनल’ तोड़ने के कारण चालान भर रहे थे। कुतुबमीनार की ऊँची इमारत दूर से दिखाई दे रही

थी। अभी वे दूर ही थे कि अचानक एक तेज धमाका हुआ। पलक झपकते ही कुतुबमीनार वहाँ घूम रहे लोगों सहित गायब हो चुकी थी। इसकी जगह एक बड़ा सा गढ्ढा नजर आ रहा था। वे सभी स्तब्ध रह गए। चारों ओर मची अफरातफरी के बीच एक गहरी आवाज गूँज रही थी।

‘हमने कुतुबमीनार को एक अनजान स्थान पर टेलीपोर्ट कर दिया है जहाँ उसे कोई नहीं ढूँढ सकता। हम पृथ्वी की सरकारों को हिलाकर रख देंगे। तुम सब चाँद से दूर रहो। चाँद सिर्फ हमारा है। हमारी माँगें न मानी गईं तो अगला नंबर ताजमहल और एफिल टॉवर का होगा’ लेजर लाइट से बने ध्ामकी भरे संदेश चारों ओर चमकते हुए लहरा रहे थे।

‘ओह यह तो हद है’ शर्मा सर चिल्ला उठे।

‘यह सब क्या है सर?’ बच्चों ने सहमकर पूछा।

‘उन्होंने कुतुबमीनार को टेलीपोर्ट कर दिया है। किसी वस्तु को उसके अणुओं में तोड़कर किसी और जगह ले जाकर फिर से मूल वस्तु के रूप में संयोजित किया जा सकता है। यह टेलीपोर्टेशन है।’

‘पर वे ऐसा क्यों कर रहे हैं?’

‘दरअसल यह एक खूंख्वार आतंकवादी संगठन ‘मून इज माइन’ है जो चंद्रमा पर कब्जा करना चाहता है। वह चाहता है कि सिर्फ उनके सम्प्रदाय और संस्कृति के लोग ही मून पर रहें शेष पृथ्वी के लोगों का वहाँ कोई दखल न हो’ शर्मा सर ने बताया।

‘तो हम मामा के घर नहीं जा पाएँगे?’ रोहन मायूस हो उठा। फिर अपनी सैर अधूरी छोड़कर वे सभी वापस लौटने लगे। अगले दिन तमाम देशों की गुप्तचर एजेंसियों की इमरजेंसी मीटिंग बुलाई गई जिसकी अध्यक्षता तत्कालीन अर्थ कमांडर मिस्टर रमाशंकर कर रहे थे।

‘आतंकवादियों की धमकी के सामने सरकारें झुकने वाली नहीं हैं। परंतु यह चिंताजनक है कि टेलीपोर्टेशन की तकनीक उनके हाथ लग गई है। समझ में नहीं आता कि यह बेहद गोपनीय तकनीक उनके हाथ लगी कैसे? जबकि टेलीपोर्टेशन पर विश्व भर में प्रतिबंध लगाया जा चुका है और अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया के बाद कुछ विशेष मामलों में ही इसकी इजाजत दी जा सकती है।’

‘हमने पहले ही चेतावनी दी थी कि चोरीछिपे आतंकवाद का समर्थन करने वाले कुछ देश इस तकनीक को आतंकवादियों के हाथ बेचने की तैयारी में हैं। पर हमारी बात को तब किसी ने गंभीरता से नहीं लिया।’ इजरायल के खुफिया प्रमुख कमांडर मोशे तीखे स्वर में बोल उठे।

‘आपने सही कहा था। इस तकनीक के कारण आतंकवादी बेहद खतरनाक हो चुके हैं। हमें डर है कि सरकारों पर दबाव बनाने के लिए वे महत्वपूर्ण व्यक्तियों को टेलीपोर्ट करके उनका अपहरण कर सकते हैं। हम जानते हैं कि जब जीवित प्राणियों को टेलीपोर्ट करने के प्रयोग किए गए थे तो वे प्रयोग के बाद पागल हो गए थे। कुछ तो मर भी गए थे। पौधों के अतिरिक्त अन्य किसी प्राणी पर ये प्रयोग सफल नहीं रहे थे।’ मिस्टर रमाशंकर की बात पर सब सहमति में सिर हिला रहे थे। दरअसल शुरू में इस तकनीक को बड़ा फायदेमंद माना गया था। इमारतों, बड़े-बड़े सामानों, भारी मशीनों, कारखानों, पेड़ों और बगीचों वगैरह को दूसरे स्थानों पर शिफ्ट करने के लिए टेलीपोर्टेशन की जटिल तकनीक का प्रयोग किया जाने लगा था। परंतु इससे एक विचित्र समस्या उठ खड़ी हुई। मनुष्यों से खाली कराने के बाद भी इन स्थानों पर छिपकर रहने वाले जीव जैसे मच्छर, चींटियाँ, छिपकलियाँ, कॉकरोच, मक्खियाँ, दीमक और चूहे वगैरह भी साथ में टेलीपोर्ट हो जाते थे। फिर वे अजीब व्यवहार करने लगते थे। लोगों के नाक, मुँह, कान में घुसते, उन्हें काटते या हर जगह उत्पात मचाने लगते थे। इससे कुछ लोगों की दर्दनाक मौत होने और अपराधिक संगठनों द्वारा इसे घातक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की आशंका के कारण इस तकनीक को अव्यावहारिक मानकर विश्व भर में इस पर रोक लगा दी गई। ‘इंटरनेशनल टेलीपोर्ट नियमन संस्था’ द्वारा अत्यंत दुर्लभ मामले में ही इसकी अनुमति दी जा सकती थी। परंतु सच यही था कि कहीं न कहीं चोरी-छिपे इसका प्रयोग अब भी किया जा रहा था। कल की घटना इसी का नतीजा थी।

‘हम उन्हें मनमानी नहीं करने दे सकते। वे चाहे कुछ भी कर लें हम उनके सामने नहीं झुकेंगे। लेकिन शीघ्र ही हमें कुछ करना होगा वरना ताजमहल और एफिल टॉवर को गँवा बैठेंगे।’ यह सी.आई.ए. प्रमुख मिस्टर डकवर्थ थे। लम्बे विचार

-विमर्श के बाद मीटिंग समाप्त कर दी गई । इस भयानक घटना के तीन दिन बाद स्कूल खुले तो एसेंबली के दौरान बच्चों के बीच यही चर्चा थी।

‘हमारी पुलिस उन्हें पकड़ती क्यों नहीं?’ गुस्से में भरकर शुभि बोल उठी ।

‘वे पहचान में नहीं आते क्योंकि वे हम सब के बीच घुलमिल कर रहते हैं’ रोजी मैडम का विचार था।

‘मैं पुलिस होता तो हर आतंकवादी के अन्दर चिप लगा देता’ कंप्यूटर गेम्स का शौकीन शुभम चिल्लाया।

‘बुद्धू चिप लगाने के लिए उन्हें पहचानता कैसे?’ शीना ने मुँह बनाया। शुभम सोच में पड़ गया। शर्मा सर बहुत दिलचस्पी से उनकी बातें सुन रहे थे।

‘ऊँहूँ. ...चिप लगाना, आईडिया तो बुरा नहीं। लगता है अब हमें ही कुछ करना पड़ेगा। वह न जाने क्यों मुस्करा रहे थे।

इस आतंकवादी घटना को अभी अधिक समय नहीं बीता था कि एक नई मुसीबत खड़ी हो गई। अचानक ही चाँद पर न जाने कैसे एक घातक एलियन वायरस फैल गया था। इसकी चपेट में आने पर व्यक्ति का पूरा शरीर काले चकत्तों से भर जाता था। संक्रमित होने के बाद इसका कोई इलाज नहीं था और मौत निश्चित थी। हालाँकि पृथ्वी के वातावरण में यह प्रभावहीन था। पिछली सदी से चली आ रही पेजबुक, क्विटर और इंस्टाग्राफ जैसी लोकप्रिय सोशल साइट्स पर ये संदेश वायरल हो रहे थे। उन लोगों में अफरा-तफरी मच गई थी जो चाँद पर आते-जाते रहते थे या जिनका किसी प्रकार भी चाँद से संपर्क था। आज पृथ्वीवासियों के लिए चाँद बहुत ही शानदार हॉलीडे डेस्टिनेशन बन चुका था। वहाँ के अनूठे परिवेश, पृथ्वी से कम गुरुत्वाकर्षण में होने वाले मजेदार खेल और रोमांचक झूलों के पृथ्वीवासी दीवाने थे। दुर्भाग्य से सरकारों की ओर से भी इस विषय में कोई जानकारी या स्पष्टीकरण नहीं दिया गया था। हालाँकि सरकारी स्वास्थ्य विभाग चाँद पर जाने से पहले एक खास वैक्सीन लगवाने की सलाह देने लगे थे। फिर यों ही चिंता और डर के माहौल में लगभग तीन महीने बीत गए थे।

आज दोपहर दो बजे से नई दिल्ली के आलीशान ऑडिटोरियम में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस जारी थी। जिसका सीधा प्रसारण पूरी पृथ्वी पर देखा जा रहा था। वहाँ पत्रकारों व दर्शकों की काफी भीड़ दिखाई दे रही थी। सामने बड़े से मंच पर प्रशासनिक एवं गुप्तचर एजेंसियों के विभिन्न अधिकारी सशरीर अथवा वर्चुअल रूप में उपस्थित थे। अर्थ कमांडर मिस्टर रमाशंकर पत्रकारों को जानकारी दे रहे थे।

‘आपको जानकर खुशी होगी कि ताजमहल और एफिल टॉवर को खोने से पहले ही हमने आतंकवादी संगठन के सभी सदस्यों को पकड़ लिया है। अब कहीं कोई खतरा नहीं।’

‘लेकिन आपने उन आतंकवादियों की पहचान कैसे की?’ एक प्रमुख न्यूज चौनल के पत्रकार ने प्रश्न किया।

‘एक अनोखे तरीके से। बच्चों की जिन बातों को हम बचकाना समझ कर टाल देते हैं वे किसी समस्या से निपटने का रास्ता भी बन सकती हैं। जरूरत है बड़ों को अपना दिमाग खुला रखने की। इस मामले में हमें बच्चों से ही आइडिया मिला। फिर हमने एक योजना बनाई।’

‘कैसी योजना?’ पत्रकार उत्सुक थे।

‘सबसे पहले हमने सोशल मीडिया का उपयोग करके चाँद पर एलियन वायरस की अफवाह फैलाई और फिर इससे बचाव के लिए वैक्सीन प्रस्तुत किया जो वास्तव में माइक्रोफोन युक्त नैनो चिप और ग्लूकोज का घोल था। जाहिर था चाँद पर कब्जा करने का इरादा रखने वाले आतंकवादी भी यह वैक्सीन जरूर लगवाते। यही हुआ और हमारे पास उन सब व्यक्तियों की लोकेशन व बातचीत का रिकॉर्ड उपलब्ध हो गया जिनका चाँद से कुछ भी संबंध था। फिर दुनिया भर में फैले अपने मित्र देशों की मदद से हमने हर संदिग्ध व्यक्ति की छानबीन की और आतंकवादियों का पूरा नेटवर्क हमारी पकड़ में आ गया। वे हमारी मनोवैज्ञानिक चाल में फँस गए।’

‘कुतुबमीनार और वे पर्यटक अब कहाँ है?’ प्रश्नों की बौछार जारी थी।

‘कतु बु मीनार का पता हमेंलग चकु ह।ै हालाँक टलेपाटे र्श्ेन के दौरान इसका रूप कुछ बदल गया है। क्योंकि आतंकवादी इतने एक्सपर्ट नहीं थे। जल्द ही यह वापस अपनी जगह पर होगी। पर्यटकों के बारे में हम अभी मीडिया को इतना ही बता सकते हैं कि उनकी गहन चिकित्सा जाँच चल रही है’ मिस्टर रमाशंकर ने कहा।

‘और वे आतंकवादी?’

‘उन्हें स्पेस जेल में डाल दिया गया है। जहाँ से वे कभी भाग नहीं सकते। ‘मून इज माइन’ संगठन पूरी तरह खत्म हो चुका है। देश के कानून का पालन करते हुए वैक्सीन लगवाने वाले अन्य लोगों में चिप को निष्क्रिय कर दिया गया है। साथ ही आतंकवादियों को सपोर्ट करने वाले देशों के खिलाफ सख्त अंतर्राष्ट्रीय कार्यवाही की जा रही है। इस केस में हम शर्मा सर और उनकी टीम के बच्चों का विशेष धन्यवाद करते हैं जिन्होंने यह जबरदस्त आइडिया दिया और सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने में हमारा पूरा साथ दिया। देश और मानवता के प्रति उनकी सच्ची सेवा को देखते हुए भारत के राष्ट्रपति की ओर से उन्हें विशेष पुरस्कार दिया जा रहा है।’ मिस्टर रमाशंकर ने मुस्कराते हुए कहा।

‘हुर्रे.. चाँद के चक्कर में हम भी मशहूर हो गए।’ स्क्रीन पर निगाह जमाये शर्मा सर और उनकी टीम के बच्चे खुशी से तालियाँ बजाने लगे। रोहन और शीना भी मुस्करा उठे। पृथ्वी और चाँद बिलकुल सुरक्षित थे। वे मामा के यहाँ जाकर ‘फूडी’ के स्वादिष्ट व्यंजनों का मजा ले सकते थे।

image

ईमेल :

kalpna11566@gmail.com

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

-----****-----

-----****-----

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1

.... प्रायोजक ....

-----****-----

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच करें : ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


|आपके लिए कुछ चुनिंदा रचनाएँ_$type=complex$count=8$src=random$page=1$va=0$au=0

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3864,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,337,ईबुक,192,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2811,कहानी,2136,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,489,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,90,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,348,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,327,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,50,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,9,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,18,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,238,लघुकथा,862,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,24,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,62,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1932,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,659,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,703,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,15,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,61,साहित्यम्,2,साहित्यिक गतिविधियाँ,186,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,58,हास्य-व्यंग्य,69,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: बाल विज्ञान-कथा // चाँद के चक्कर में // कल्पना कुलश्रेष्ठ // विज्ञान कथा / जनवरी-मार्च 2018
बाल विज्ञान-कथा // चाँद के चक्कर में // कल्पना कुलश्रेष्ठ // विज्ञान कथा / जनवरी-मार्च 2018
https://lh3.googleusercontent.com/-DMvam58NNUI/Wktq2juHCDI/AAAAAAAA-IM/mjmb2WfmWQ0MMNKxbjP0A7KvRjKJAjkKACHMYCw/image_thumb?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-DMvam58NNUI/Wktq2juHCDI/AAAAAAAA-IM/mjmb2WfmWQ0MMNKxbjP0A7KvRjKJAjkKACHMYCw/s72-c/image_thumb?imgmax=800
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2018/01/2018_59.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2018/01/2018_59.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ