कभी न खत्म होने वाला अंत // सिंधी कहानी // शौकत हुसैन शोरो // अनुवाद - डॉ. संध्या चंदर कुंदनानी

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और उसके बाद तुमने कहा लेकिन चुप्पी इतनी गहरी थी इतनी गहरी कि समुद्र की गहराइयों से भी गहरी जिसका कोई अंत नहीं था यहां तक कि सुई के गिरने से भी धमाका होता। तभी तुमने कहा लेकिन आवाज गहराई में खो गई और उसके बाद कोई सुर ताल नहीं होगा, सुर की मधुरता नहीं होगी। वायु का और पेड़ों का और सर्दी के सूखे पत्तों का होगा सुनसान संगीत और वायदे थे केवल शाब्दिक, शब्दों का कोई अर्थ नहीं है, अर्थ है चुप्पी का और वहां पर कोई किसी का नहीं होगा। अकेलापन हमेशा से है और हर जगह है लेकिन तुमने कहा था रास्ता एक ही है फिर भी कदम अलग थे, कदमों के निशान भी अलग थे, हर कोई अलग है और भिनक् है।

हम साथ मिलकर चले थे, कुछ वक्त के लिए दोनों के कदम एक समान थे, तब हमने समझा था गलत ही समझा था कि उसी रास्ते पर चलते रहेंगे हमेशा के लिए।

- तुम मुझे भुला तो नहीं दोगे\


- नहीं मैं तुम्हें भूल नहीं सकूंगा, क्यों, भूलना मेरे वश में नहीं होगा और तुमसे मैं बदले में यह नहीं पूछ रहा कि तुम मुझे भूलोगी तो नहीं क्योंकि मैं जानता हूं कि भूलना तुम्हारे वश में भी नहीं होगा।

- मैंने तो बात करने के लिए बात की थी, यह तो मुझे भी पता था कि सभी बातें बेमतलब की बातें हैं जिनको कहना बेकार है और ये बातें करने से उल्टा तकलीफ होती है लेकिन चुप रहने से मन अशांत हो जाता है।

- जब भी हम साथ होते हैं तो हमारा मन अशांत रहता है और नस नस में पीड़ा भर जाती है।

- यही हमारे प्यार का भाग्य है केवल पीड़ा पीड़ा पीड़ा पीड़ा पीड़ा।

तुमने यह शब्द एक ही बार कहा होगा लेकिन यह पीड़ा मेरे मन में हमेशा जलती रहती है जैसे कि पूरे अस्तित्व में ही घंटा बज रहा है और धीरे धीरे मैं टूटकर ढहता जा रहा हूं किसी पुरानी दीवार की तरह जिसकी छत कब की गल गई हो और आसपास की दीवारें भी गिर चुकी हों, केवल यह अकेली दीवार जाकर बचे और उसकी ईंटें धीरे धीरे गल रही हों।

जो लोग एक दूसरे को चाहते हैं वे एक दूसरे से मिल नहीं पाते और और जो लोग एक दूसरे को नहीं चाहते हैं या कभी उन्होंने आपस में प्रेम किया भी नहीं होगा तो भी वे एक हो जाते हैं और उसके बाद साथ होते हुए भी अलग अलग होते हैं।

जो एक दूजे को चाहते हैं वे नहीं मिल पाते और मिलते वे हैं जिन्होंने एक दूजे के बारे में कभी सोचा भी नहीं होगा। ये सभी बातें हैं मजबूरी की क्योंकि केवल प्रेम करना ही सब कुछ नहीं है उसके साथ और भी बहुत कुछ है।

और ये ‘और भी बहुत कुछ’ मेरे पास कभी नहीं था, मेरे पास थी तो केवल एक सूखी ज़िंदगी। याद है तुम्हें मैंने कहा था मेरे पास तेरे लिए केवल ये दो खाली हाथ हैं लेकिन ये बेकार हाथ हैं, हाथों की सभी लकीरें मिटी हुई हैं। मेरे पास और कुछ नहीं होगा, न ही तारों की सेज होगी, न आंगन के ऊपर चाँद होगा, जो होगा वह केवल एक अंधेरी गुफा होगी जहां से न तुम मुझे देख पाओगी और न ही मैं तुम्हें देख पाऊंगा, तुम खुद को भी ढूंढ नहीं पाओगी। मकड़ी के जाल में कैद, अंधेरे में लुटकर एक दूसरे को तो क्या खुद को भी नहीं पहचान पाएंगे। तुम कोई सोने की सेज ढूंढो जहां लॉन के ऊपर चाँद हो।

और उसके बाद तुमने कहा था लेकिन जुदाई निगल गई सब बातों को जो कभी भी खत्म होने वाली नहीं थीं, न ही थकने वाली थीं, अनगिनत लेकिन हम जानते थे कि बेमतलब बातें थीं और बेकार बातें थीं शायद बकवास थीं।

- तुम इतना उदास क्यों रहते हो।

- उदासी मेरे अस्तित्व में है शुरू से नसों में बहते रक्त की तरह हर वक्त दौड़ता और उस उदासी के पाताल का कोई पता नहीं उल्टे रह रहकर व्याकुल मन उसमें से डूबता और उभरता रहता है।

- कहीं इसका कारण मैं तो नहीं।

- कारण मेरे अस्तित्व में है तुझमें नहीं है, तुमने केवल उसे खोला और प्रकट किया है।

- और उसके बाद तुमने कहा था लेकिन वे राहें थीं, राह कदम बनाती हैं और कदम अलग थे, तुमने कहा लेकिन राहें अकेली हैं, राहें राहों से मिलती हैं साथ चलती हैं, एक दूसरे को काटती हैं और हर राह अलग है और अकेली है। राहों का कोई अंत नहीं है या अंत है केवल एक गहरी चुप्पी और फिर उसके बाद कोई सुर होगा, सुरों की मधुरता होगी, वायु का और पेड़ों का और सर्दी के सूखे पत्तों का होगा सुनसान संगीत.....

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