व्यंग्य // सर्वेक्षण बाबाओं पर // राजशेखर चौबे

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आजकल बाबाओं का जोर है। न्यूज चैनल इसका पूरा फायदा उठा रहे हैं । वे लोगों को पकाने के राष्ट्रीय कर्तव्य का निर्वहन बखूबी कर रहे हैं । आसाराम व राम रहीम के चेहरे देख कर ऊब चुके दर्शकों को अब हनीप्रीत परोसा जा रहा है। बीच-बीच में छुट-पुट न्यूज तुषार कपूर, विवेक ओबेराय आदि की तरह आ जाते हैं परन्तु हनीप्रीत सलमान की तरह सदाबहार है और इन चैनलों में छाई हुई हैं । इनकी दिली इच्छा है कि हनीप्रीत कभी न मिले यदि वह मिल गई तो लोगों की दिलचस्पी कम हो जाएगी परन्तु इनकी इच्छा पूरी नहीं हो सकी ।

किसी संगठन ने हिंदू बाबाओं की लिस्ट जारी की है जिन पर कई तरह के आरोप लगे हैं । इस लिस्ट में कई नामी-गिरामी बाबाओं के नाम है जैसे आशाराम, राम-रहीम, निर्मल बाबा आदि आदि। इन सभी बाबाओं के लाखों करोड़ों भक्त हैं । भक्तों को कोई भी तर्क प्रभावित नहीं कर सकता । उनके पास या तो दिमाग नहीं होता या होता भी है तो वे इसका इस्तेमाल नहीं करते । कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि वह भक्त किस काम का जिसके पास दिमाग हो या जो सोच सकता हो ।

इसी बीच देश के सबसे अधिक प्रसारण समूह वाले दैनिक समाचार-पत्र ने बाबाओं के ऊपर एक सर्वेक्षण प्रकाशित किया है । इसके परिणाम बड़े ही रोचक हैं और देश की जनता को समझने में सहायक हो सकते है मसलन 6 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्होंने बाबाओं के चमत्कार देखे हैं, 33 प्रतिशत लोगों ने बताया कि चमत्कारों की चर्चा से उनकी छवि बनती है। 37 प्रतिशत लोग प्रचार से प्रभावित होकर बाबा के पास गए हैं आदि-आदि । 100 प्रतिशत लोगों ने जादूगर के चमत्कार देखे हैं फिर भी लोग बाबाओं पर क्यों भरोसा करते हैं यह समझ से परे है। 47 प्रतिशत लोगों ने कहा पारदर्शिता कानून बनाकर सीसीटीवी अनिवार्य कर व सूचना के अधिकार के दायरे में लाकर इन पर निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए । क्या लोग यह सोचते हैं कि बाबा अपने दुष्कर्मों का लाईव प्रसारण करेंगे और आर.टी.आई. के अंतर्गत यह बताएंगे कि वर्ष 2016 में उन्होंने कितनी महिलाओं के साथ दुष्कर्म किया और क्या वे अपने पूर्ववर्ती बाबा के बनाए रिकार्ड को तोड़ सके ।

कुछ प्रश्न जो पत्रकार के मन में रहे होंगे या पूछे जाने चाहिए थे मसलन्

(1) क्या किसी बाबा ने आपके साथ दुष्कर्म किया ?

(2) क्या राम-रहीम से आपको माफी मिली ?

(3) क्या आपके किसी अंग को किसी बाबा ने गलत इरादे से हाथ लगाया ?

(4) क्या आपकी पत्नी, बहन या बेटी को राम-रहीम से माफी मिली ?

(5) क्या आप बाबा का झूठा प्रचार करते हैं ?

(6) क्या आपको लगता है कि आपके गुरू को साजिश कर फंसाया गया है ?

सर्वेक्षण में 49 प्रतिशत लोगों ने बताया कि पैसे व्यापार नौकरी आदि समस्या से घिर जाने के बाद बाबाओं के पास जाते हैं शायद इसीलिए नोटबंदी और जी.एस.टी. के बाद सभी बाबाओं का कारोबार लगातार बढ़ रहा है ।


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परिचयः-

एक प्रबुद्ध, स्वतंत्र लेखक एवं व्यंग्यकार । श्री राजशेखर चौबे कविता, कहानी लेख आदि लगातार लिख रहे हैं लेकिन उनकी प्रथम रूचि व्यंग्य ही है । वे श्री हरिशंकर परसाई एवं श्री शरद जोशी से विशेष प्रभावित हैं। व्यंग्य की विधा में उनकी अभिरूचि उनकी विशिष्टता व्यक्त करती है । इस क्षेत्र में उनकी लेखनी बहुत ही पैनी है । व्यंग्य संग्रह ‘आजादी का जश्न‘ में उन्होंने हमारे आस-पास की सम-सामयिक घटनाओं पर ही व्यंग्य तैयार किया है । ‘आजादी का जश्न‘ भावना प्रकाशन दिल्ली द्वारा प्रकाशित की गई एवं अमेजन सेल पर भी उपलब्ध है ।

राजशेखर चौबे,

पता- मकान नं. 295/ए

रोहिणीपुरम रायपुर

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