मुस्कान चाँदनी की कविताएँ

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1 :  खो गया मेरा आशियाना


एक तिनके के सहारे चले थे हम
आशियाना बनाने को
वक्त ने ऐसा किया रूख
जो देखे थे ख्वाब हमने
बालू के ढेर पर महल बनाने का
हवा के एक झोंके ने
उजाड़ दिया मेरे आशियाने को
समाकर अपने में
ले गया मेरी खुशियों को
बनने के पहले ही
टूट गया मेरा आशियाना
शायद कमजोर थी उसकी बुनियादें
या फिर मेरे किस्मत में
ही न था आशियाना
आखिर जो भी हो
गया तो मेरा ही अपना
ख्वाब पुराने टूटे ऐसे
टूटा न होगा किसी का सपना
लोगों को खबर ही नहीं
उज़ड़ा किसका आशियाना
वक्त के तलाश में बैठे रहे
शायद फिर बन जाये
मेरा आशियाना
अमावस की काली रात में
छुप जाता जैसे चंद्रमा
वैसे ही खो गया मेरा आशियाना
रात के अंधेरे में।

2:  संघर्ष ही जीवन है

हर लम्हा जीना है तुम्हें
सिर्फ संघर्ष करते चलो
मिलेगी तुम्हें कामयाबी एक दिन
अपने वचन से नहीं हटो
थक कर चूर क्यों हो रहे हो
अभी तुम्हें बहुत सहना है
हिम्मत करो और आगे बढ़ो
यही सिद्धांत तुम्हें अपनाना है
फिलहाल तेरी जो हालत है
यह दूसरों के लिए
मजाक का फसाना है
तुम डर रहे हो क्यों नाकामयाबी से
अभी तो तुम्हें बहुत कुछ देखना है
जीवन संघर्ष और कांटोभरी डगर है
इस बात से तुम
मुँह क्यों मोड़ रहे हो
होश में आओ लड़ो
अपने हालात से
अभी तो तुम्हें हालात बदलना है
संघर्ष करना ही जीवन है
इस बात को तुम्हें न भूलना है
हर लम्हा जीना है तुम्हें
यही मेरी दिल की तमन्ना है ।

3:  मुसाफिर बस एक रात की

मुसाफिर हूँ मैं एक रात की
तुम्हारे अंजान शहर में
ढूँढ़ने आयी थी मैं शोहरत
अपने कस्बे से दूर होकर
पा न सकी वो सब कुछ
जिसकी मुझे तलाश थी
कुछ कर गुजरने की ख्वाहिश
लेकर आयी थी मैं
तुम्हारे शहर में
गुमनामी के अंधेरे में
खोकर रह गया मेरा अस्तित्व
वर्षों की मेहनत पर
पानी ही फिर गया
अपनों से दूर रह कर भी
कुछ कर न सकी
अब सोचती हूँ मैं
छोड़ के चली जाऊँ
इन चकाचौंध शहरों को
आखिर दिया क्या इसने मुझे
सिर्फ गुमनामी के
बहुत तारीफ सुनी थी मैं
तुम्हारे इस शहर की
लेकिन मुझे रास न आयी
बस एक रात की मुसाफिर हूँ मैं
तुम्हारे अंजान शहर में ।

4:  दिल की फरियाद

टूटे दिल की फरियाद सुन ले
हे खुदा सौ बार नहीं
एक बार सुन ले
सोची थी तेरे दर पर नहीं आऊँगी
लेकिन यह मेरी खता न थी
चोट खायी इस कदर दिल पे
भूल गयी मैं दुनियादारी को
समझ में आया नहीं
करूँ मैं क्या
विश्वास उठ गया दुनिया से
लोगों ने ही दिए है जख्म
छुपा न पायी अपने को
टूटे दिल की फरियाद
भला सुनानी किसको
तेरे सिवा हे खुदा
मलहम लगाता ही कौन
इसलिए हे खुदा दिल की फरियाद
मेरी नकार न देना
सौ बार नहीं
एक बार जरूर सुन लेना ।

5:  सभ्यता बदल गयी

अतीत की पन्नों को
पलट कर देखा हमने
क्या था कल और
आज क्या हो गया
जो हमारी कल परंपरा थी
आज जंजीर बन गयी
वर्तमान और भविष्य का आईना
कहा जाता है अतीत
बदलते दौर में सब कुछ
इतना बदल गया
कल जो हमारी पहचान थी
आज परछायीं बन गयी
साथ होते हुए भी
दूरी का एहसास होता रहा
और हम
अपने सभ्यता संस्कृति से
दूर होते रहे
पश्चिमी देशों का ऐसा चला जादू
हम खुद पर मगरूर होने लगे
भूल गए उन परंपराओं को
जो हमारी विरासत थी
अतीत की गलतियों को
हम वर्तमान में दुहराने लगे
सबक लेने के बजाऐ
खुद दलदल में फंसने लगे
मिसाल थी हमारी संस्कृति
इस दुनिया में
पर हमारी संस्कृति कही खो गयी
अब छाया है नशा
पश्चिमी देशों का
लगता है डर कही यही हमारी
पहचान न बन जाए ।

6:  याद है कोई अजनबी

जिंदगी की राहो में हो जाती है
मुलाकात किसी से
बिन जाने फिर भी
लगता है अपना सा
मानो पहली नहीं
कितनी मुलाकातें हों
कितने मिलते है
कितने ही बिछड़ जाते हैं राहो में
जो दिल तक पहुँच सकें
ऐसे कम ही लोग होते हैं
कुछ से हुई मुलाकात
जीवनभर के लिए
यादों में समा जाती है
और उनसे बिछड़ने का
दुख दिल को झकझोर देती है
वो बातें और अपनापन
जो हमें उनसे मिली
सिर्फ याद बन कर रह जाती है ।

7: कोई रिश्ता है इस परछाई से

परछाई दिखती है किसी की
मेरे सपनों में रोज
मगर ये परछाई किसकी है
अभी तक सिर्फ राज है
आँख खुलती है जब मेरी
सामने सिर्फ अंधेरा ही अंधेरा होता है
डर जाती हूँ मैं
फिर परछाई का खौफ मन में
घर करता है
रोज की यही पहेली है
आखिर ये परछाई किसकी है
देखने में जाना पहचाना
अपना ही कोई लगता है
पर कैसी विडम्बना है
हर बार उसका चेहरा
साफ साफ नहीं दिखता है
सिर्फ एहसास होता है
जैसे मैं इसे सदियों से जानती हूँ
उसका मेरे सपनों में आना
इस कदर मुझे बेचैन करना
इस बात का गवाह है
उससे मेरा कोई नाजुक रिश्ता है
जिसे मैं भूल चुकी हूँ
शायद यही बात याद दिलाने का
प्रयास वह करता है ।

8:  सहारा खोखली हँसी का

तेरी खोखली हँसी
अब और न
छुपा पायेगी तेरे जख्मों को
मुँह मोड़ रही हो किससे
डाल क्यों रही हो पर्दा
तुम अपने जख्मों पर
हँसती रहती हो तुम
दुनिया की नजरों में
अंदर ही अंदर
घुटा करती हो
क्या पाओगी तुम ऐसा करके
अपने अरमानों को क्यों
पल पल मारा करती हो
तेरे जख्मों की
कोई गिनती न होगी
इतने मिले हैं तुमको जख्म
भूल कर हर चाहत को
बनना चाहती हो क्या तुम महान
देखो उस दाग को
जो अभी भरे नहीं है
एहसास करो उस दर्द को
वर्षों पहले तुम्हें
जो मिले है
खोखली हँसी हँसकर
बच पाना चाहती हो
अपने अन्तरमन से
एक सैलाब आया है
तुम्हारी जिंदगी में
निकल जाना चाहती हो
तुम आसानी से
उस खोखली हँसी के सहारे ।

9: तलाश हमसफर की

जिंदगी की नैया मेरी
कोई उस पार लगा दे
मंझधार में है कश्ती मेरी
साहिल पर उसे पहुँचा दे
तलाश है उस माझी की
जो मुझे तूफान से उबारे
जिंदगी की नैया को
जो माझी पार लगा दे
उस तूफान से हम
इस कदर डर गई हूँ
करने लगी हूँ इंतजार
एक हमसफर की
जो मेरी डूबी नैया को
उस पार लगा दे ।

10:  छोटी सी आशा

अंधेरा है
चारों तरफ घर में
उजाले की कोई उम्मीद नहीं
कोई आस नहीं
कोई पास नहीं
कैसी है ये मजबूरी
लेकर आऊँ कहाँ से
जलता हुआ चिराग
कर दे रौशन
जो मेरे घर को
चमक उठे सुना संसार
बजने लगे शहनाई चारों तरफ
और हो जाए
पूरी मेरी मुराद
लौट आए वापस खुशियाँ घर में
दमक उठे चेहरे का नूर
हो जाए दूर उदासी सबकी
खुल जाए तकदीर
गुम हो जाए अंधेरा
इस खुशी के माहौल में
जो आ न सकें
कभी वापस फिर से
मेरे नसीब में
भेज तू ऐसा फरिश्ता
कर सके जो पूरी
मेरी छोटी सी आशा ।

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