शशांक मिश्र भारती के बालगीत

चुपके से आ जाती धूप

रोज सबेरे मेरे घर में

चुपके से आ जाती धूप

कंप-कंपी छुटा जाड़ा भगाती

सुन्दर और सुहानी धूप

चहुं ओर प्रकाश फैलाती

प्रकृति का अनोखा रूप

हमें सुहाती सबको भाती

जब आती चुपके से धूप

चिड़ियां चूंचूं कर जगातीं

छत पर है खिल जाती धूप

हर घर और आंगन में

चुपके से आ जाती धूप


सूरज

आज सबेरे मेरे घर में

चुपके से उग आया सूरज

ठण्ड भगाई गरमी लाया

सबको है भाया सूरज

किरणें बिखराकर के

फूलों का खिलाता सूरज

पक्षियों को हंसाकर

डाल-डाल पर आता सूरज


आया मौसम जाड़े का

खाओ-पीओ झूमो गाओ

आया मौसम जाड़े का

नये-नये स्वेटर को पहनो

आया मौसम जाड़े का

आइसक्रीम अब भाये नहीं

धूप सुहानी लगती है

जाड़े में नहाने से भी अब

गुड़िया रानी डरती है

गुल्लक को अब भरते जाओ

आया मौसम जाड़े का

खाओ-पीओ, झूमो गाओ,

आया मौसम जाड़े का ।


पतंग

आसमान में उडने वाली

हवा से बातें करने वाली

हम सबको यह प्यारी है

रंग-बिरंगी पतंग निराली

ऊपर-नीचे को यह जाती

दाएं-बाएं को मुड़ जाती

कभी-कभी गुस्सा है लाती

जब डोर उड़ जाती

बच्चों को यह प्यारी है

रंग-बिरंगी न्यारी है

पतंग कटी तो भागे सब

आई देखो किसकी बारी है

चिड़िया

नन्हे-नन्हे पंखों वाली,

बगिया में है आती चिड़िया,

तरह-तरह से करतबों से है

बच्चों को बहलाती चिड़िया,

दूर देश से दाने लाकर

बच्चे खूब खिलाती चिड़िया,

चूँ-चूँ की आवाज सुनाकर

बालक के वृद्ध हंसाती चिड़िया।

रोज सबेरे फुदक-फुदक के

मेरे आँगन आती चिड़िया

जब पकड़ने को हूँ जाता

फुर्र से उड़ जाती चिड़िया।।


अच्छे बच्चे

साहस का तुम दीप सजाकर

अपने पथ पर बढ़ते जाओ

मन में बसे दुर्गुणों को तुम

शुभकर्मों से दूर भगाओ

बाधाओं से कभी न डरना

निर्भय आगे बढ़ते जाओ

ले सन्देश कर्मवीरों का

अपना यश जब में फैलाओ

कार्यों की अच्छाइयों से तुम

अच्छे बच्चे नित कहलाओ।


सीखो

मेहनत करना अगर हो सीखना

तो नन्हीं चींटी से सीखो...........

काम समय से करना हो सीखना

तो सूरज से तुम सीखो............

दूसरों पे परोपकार की बात हो सीखना

तो मधु मक्खी से सीखो...........

खेतों में पड़े रहकर भी कैसे भलाई

यह केंचुए से सीखो..................

नकल किसी की करो नहीं तुम

यह राष्ट्रपिता बापू से सीखो.....

मक्कारी है हम सबका दुश्मन

इसलिए मेहनत करना सीखो.....

वफादारी का पाठ हो यदि पढ़ना

वो पालतू कुत्ते से सीखो..........

ध्यान लगाना ही सफलता का राज है

तुम यह बगुले से सीखो...........

सीखना है इस जग में तुमको

धीरे-धीरे सब कुछ सीखो...........।।


रेलगाड़ी

छुक-छुक कर आती है

हमें सफर करवाती है

दिल्ली,मुंबई या कोलकाता

पूरा देश घुमाती है

नींद में खोये यात्रियों को

सीटी बजा जगाती है

हरी झण्डी है रुकने की

लाल से यात्री ले जाती है।

बिना टिकट यात्रियों को

टी-टी से पकड़वाती है।


शशांक मिश्र भारती सम्पादक देवसुधा हिन्दी सदन बड़ागांव शाहजहांपुर -242401 उ0प्र0

ईमेलः- shashank.misra73@rediffmail.com/devsudha2008@gmail.com

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