श्री नानी पालखीवाला जी का प्रेरणाप्रद वसीयतनामा

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जब मैं मर जाऊं....

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-मेरी नज़र उस आदमी को देना जिसने कभी सूर्योदय ही नहीं देखा है

-मेरा दिल उसे देना जिसे दिल की व्यथा का पता हो

- मेरा खून उस युवक को देना जिसे कार दुर्घटना के विनाश से निकाला गया हो, ताकि वह जीवित रह कर अपने पौत्र को खेलते देख सके

-मेरे गुर्दे किसी और के शरीर से विष निकास सके उसे देना

-मेरी हड्डियां किसी अपंग बच्चे को पैदल करने में सहायक हो

-जो कुछ मेरा बाकी बचा हो, जला देना और बिखेर देना वह राख हवाओं में ताकि उसमें फूल अंकुरित हो पायें

- अगर तुम्हें कुछ दफनाना ही है, तो वे है मेरी गलतियां, व् मेरी क्षतियां जो मेरे देश बंधुओं के हेतु है

- मेरे पाप दुर्जन को दे दो

- मेरी जीवात्मा परमात्मा को दे दो

- अगर तुम मुझे याद करना चाहते हो, तो एक हितकर कार्य से या वचन से करो, उसके साथ जिसे तुम्हारी जरूरत हो.

अगर तुम यह सब करोगे जो मैंने चाहा है, मैं चिरकाल तक अमर रहूँगा.

नानी. ए. पालखीवाला

(1.6.1920 --11-12-2002)

हिंदी अनुवाद: देवी नागरानी

27-12-2017

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