लघुकथा - शहीदी पोस्टर // सत्य शुचि : प्राची – जनवरी 2018

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नेताजी का बेटा फौज में था. और उस रात सीमा पे दुश्मन से मुठभेड़ में वह शहीद हो गया...शहीद बेटे के दर्द को वह सह नहीं पा रहे थे. काफी दिनों तक घर में वह एक गहरे विषाद की जद में कैद थे.

असल में, वह नेता जरूर थे. लेकिन, एक हारे हुए प्रत्याशी के रूप में उनकी पहचान धूमिल-सी हो गई. इसलिए पार्टी ने उनको अब तवज्जो देना कम कर दिया था.

मगर वह चुप नहीं बैठ सकते थे. और एक दिन अपने फार्म-हाउस में विराजे वह कहीं लौलीन से थे कि उनके भेजे में सहानुभूति लहर की बात कौंधी कि शहीद बेटे का ख्याल रुक-रुककर उनके जेहन में पसरने लगा.

और तत्परता से नेताजी ने जीप निकाली. उसे संवारी, तुरंत शहीद बेटे के पोस्टर जीप पर चिपकाए और सजगतापूर्वक वह गांव-गांव, ढाणी-ढाणी जनता-जनार्दन से सम्पर्क साधने के लिए निकल गए.

कदाचित चुनाव की निकटता के चलते उनको खुद मकसद में उम्मीद की किरण नजर आने लगीं.

और नेताजी अभी खुश हुए.

संपर्क : साकेत नगर, ब्यावर-305901 (राज.)

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