---प्रायोजक---

---***---

रु. 25,000+ के  नाका लघुकथा पुरस्कार हेतु लघुकथाएँ आमंत्रित हैं.

अधिक जानकारी के लिए यहाँ [लिंक] देखें. आयोजन में अब तक प्रकाशित लघुकथाएँ यहाँ [लिंक] पढ़ें.

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

संस्मरण लेखन पुरस्कार आयोजन - प्रविष्टि क्र. 34 : एक यात्रा त्रिवेणी परिसर की // उर्मिला शुक्ल

साझा करें:

प्रविष्टि क्र. 34 एक यात्रा त्रिवेणी परिसर की उर्मिला शुक्ल त्रिवेणी का नाम लेते ही हमारे जेहन में इलाहाबाद की ही तस्वीर उभरती है । इलाहाब...

image

प्रविष्टि क्र. 34

एक यात्रा त्रिवेणी परिसर की

उर्मिला शुक्ल

त्रिवेणी का नाम लेते ही हमारे जेहन में इलाहाबाद की ही तस्वीर उभरती है । इलाहाबाद तीन नदियों का मिलन स्थल और साथ ही साहित्य समागम का स्थल भी । हिन्दी साहित्य के न जाने कितने कवि, कहानीकार और नाटककारों की ये कर्मभूमि रही है । मगर मैं जिस त्रिवेणी की बात कर रही हॅूँ वो छत्तीसगढ़ में है और उल्लेखनीय बात ये है कि नदियों के संगम से उसका दूर-दूर तक कोई रिश्ता ही नहीं है । आप सोच रहे होंगे कि फिर ये कैसी त्रिवेणी है । तो ये त्रिवेणी है साहित्य की । साहित्य की तीन विधाओं से जुड़े छत्तीसगढ़ के तीन रचनाकारों की । ये त्रिवेणी परिसर स्थित है छत्तीसगढ़ के राजनांदगाँव में और इस साहित्यिक त्रिवेणी में शामिल है पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, गजानन माधव मुक्तिबोध और डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र । पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी साहित्य जगत में अपने कथात्मक निबंधों के लिए ख्यात हैं तो मुक्तिबोध अपनी कविता के लिए खासकर अँधेरे में कविता के लिए, जिसमें व्यवस्था में व्याप्त अँधेरे में वे उजाले की तस्वीर बनाते नजर आते हैं और डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र अपने तुलसी दर्शन के लिए जिसे उन्होंने सघन शोध के पश्चात प्राप्त किया था । ये त्रिवेणी परिसर इन तीनों के व्यक्तित्व और कृतित्व की एक झाँकी प्रस्तुत करता है ।

हमारे महाविद्यालय के हिन्दी विभाग के छात्रों ने इच्छा जाहिर की थी कि उन्हें कहीं शैक्षणिक भ्रमण पर ले जाया जाय । सो तय ये हुआ कि उन्हें त्रिवेणी परिसर ले जाया जाय । मैं जब कभी भी कक्षा में उनसे ये प्रश्न करती कि मुक्तिबोध का संबंध छत्तीसगढ़ के किस जिले से है या मुकुटधर पान्डेय का जन्म कहाँ हुआ था तो कक्षा में मौन ही छा जाता था । उत्तर बताने के बाद भी अगले साल फिर वही मौन होता ? सो इस भ्रमण का एक उद्देश्य ये भी था कि विद्यार्थी अपने रचनाकारों को कक्षा में बैठकर पढ़ने के साथ-साथ उनसे जुड़े तथ्यों को देख कर समझे, उनके बारे में जानें । तय ये भी हुआ कि हम पहले खैरागढ़ जायेंगे क्योंकि खैरागढ़ बख्शी जी का जन्म स्थान है । फिर लौटते समय त्रिवेणी परिसर होते हुए वापस आयेंगे । सो हम सब एक छोटी बस से खैरागढ़ के लिये रवाना हुए । खैरागढ़ प्राचीन छत्तीसगढ़ के छत्तीसगढ़ों में से एक गढ़ है जिसकी ख्याति प्राचीन काल से लेकर आज तक विद्यमान है ।


रायपुर से लगभग तीन घंटे के सफर के बाद हम खैरागढ़ पहुँचे और सबसे पहले हम इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय गये । ये एक भव्य भवन में स्थित विश्वविद्यालय है । कारण ये पहले यहाँ के राजा का राजमहल हुआ करता था जिसे रानी पद्मवती देवी के विशेष आग्रह पर राजा ने विश्वविद्यालय के लिए दान में दिया था । विश्वविद्यालय परिसर होने के साथ ही ये शिक्षा जगत के लिए अनुकरणीय भी है । आज इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय भारत ही नहीं, एशिया में भी ख्यात हो चुका है । मगर हमारी नजर खैरागढ़ के इस प्राचीन राजमहल में तलाश रही थी ख्यात निबंधकार पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी की स्मृतियाँ । उनका जन्म खैरागढ़ में ही हुआ था और इस राजमहल से उनका पीढ़ियों पुराना रिश्ता था । उनके प्रपितामह यहाँ राजकवि हुआ करते थे । इसी राजमहल परिसर में या उसके बाहर किसी भवन या घर में बख्शी जी का जन्म हुआ होगा । मगर आश्चर्य इस खैरागढ़ नगर में उस स्थान को चिन्हित ही नहीं किया गया है । मुझे याद हो आया कि खैरागढ़ तो बख्शी जी के मन में रचा बसा था, तभी वे इलाहाबाद छोड़कर लौट आये थे, जहाँ वे सरस्वती जैसी पत्रिका के सम्पादक थे । हिन्दी साहित्य में सरस्वती की ख्याति से भला कौन परिचित नहीं है । उन दिनों सरस्वती में छपना रचनाकार होने की पहचान हुआ करती थी । मगर सरस्वती के संपादक होने का गौरव भी उन्हें अपनी जन्मभूमि से अलग नहीं कर पाया और वे वापस लौट आये थे । ये बख्शी जी का खैरागढ़ के प्रति अपार प्रेम ही था जिसके चलते उनका मन कहीं और लगता ही नहीं था और वे उसे छोड़ नहीं पाते थे । यात्री में उन्होंने कहा भी है- '' खैरागढ़ मेरा जन्म स्थान है । जन्म ग्राम पर सभी को ममता होती है । खैरागढ़ पर मेरी ममता है । '' यात्री पृ. 93

उन्होंने अपनी जिस जन्मभूमि से अगाध प्रेम किया उसी जन्मभूमि में उनके नाम पर ऐसा कुछ भी नहीं है जहाँ उनकी स्मृतियों को सहेजा गया हो । बस उनकी याद के नाम पर प्राचीन विक्टोरिया हाई स्कूल, जहाँ वे पढ़ा करते थे और बाद में वहीं शिक्षक के रूप में अपनी सेवायें दी थीं वहीं उसी स्कूल को उनके नाम से अभिहित करके और उसी परिवार में उनकी मूर्ति लगाकर नगर प्रशासन ने अपने कर्तव्यों की इतिश्री मान ली है । विद्यार्थियों ने भी ये सवाल किया- '' मैडम ये तो बख्शी जी की जन्मभूमि है फिर यहाँ उनकी जन्म स्थल कहीं नजर नहीं आया । '' उन्हें क्या जवाब देती मैं ?

इस दृष्टिकोण से । खैरागढ़ ने हमें बहुत निराश किया था । गनीमत है कि राजनांदगाँव स्थित त्रिवेणी परिसर में उनसे जुड़ी चीजों को सहेजा गया है । ये त्रिवेणी परिसर उसी दिग्विजय महाविद्यालय परिसर में स्थित है जहाँ कभी बख्शी जी प्राध्यापक हुआ करते थे । राजनांदगाँव में बख्शी जी ने अपने शिक्षकीय जीवन का अधिकांश समय व्यतीत किया था और यहाँ वे मास्टर जी के नाम से ख्यात थे ।

इसी त्रिवेणी परिसर और दिग्विजय महाविद्यालय से जुड़ा एक और नाम है वो नाम है गजानन माधव मुक्तिबोध । बख्शी जी की तरा मुक्तिबोध भी दिग्विजय महाविद्यालय में अध्यापक रहे । राजनांदगाँव और दिग्विजय महाविद्यालय की मुक्तिबोध के जीवन और उनके साहित्य में महत्वपूर्ण भूमिका रही है । त्रिवेणी परिसर में हमने उन चक्करदार सीढ़ियों को भी देखा जिसका जिक्र मुक्तिबोध अपनी कविता में करते हैं । उसी कमरे की खिड़की से परिसर में स्थित वो रानी तालाब भी नजर आता है जिसका जिक्र भी मुक्तिबोध अपनी कविताओं में बार-बार करते हैं । और उसे अपनी 'ब्रह्म राक्षस' कविता का आधार ही बना लेते हैं । आज भी उस तालाब के भीतर गहरे तक उतरती सीढ़ियों को देखा जा सकता है जिसकी अतल गहराई भी मुक्तिबोध का ब्रह्म राक्षस पैठा हुआ है ।

राजनांदगाँव मुक्तिबोध के जीवन का अहम हिस्सा रहा है । दिग्विजय महाविद्यालय में प्राध्यापक होने के बाद ही उनकी जिन्दगी कुछ व्यवस्थित हुई थी । उन्होंने अपनी विख्यात कवितायें ब्रह्म राक्षस ओरांग-ओरांग, अधेरे में की रचना भी यहीं की थी । उनकी इन कविताओं में मानो राजनांदगाँव बोलता है । उनकी कविताओं में बार-बार आते जंगल, बावड़ी और बरगद का वो गझिन पेड़ जिसकी शाखायें जड़ों की गहराई तक उतरती है । आज भी ये सब यहाँ दृश्यमान है । मुक्तिबोध की कविताओं में आयी चक्करदार सीढ़ियाँ, वो शांत गहरा और नीले जल वाला तालाब । आज ये सब राजनांदगाँव के ऐतिहासिक दस्तावेजों में समाहित है । अफसोस राजनांदगाँव में निवास का उनका ये सपना बहुत लम्बा नहीं चल पाया और मुक्तिबोध ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया ।

त्रिवेणी परिसर मुक्तिबोध के जीवन और उनकी रचनाओं में आये प्रतीकों और बिम्बों का जीवंत उदाहरण है । यहाँ उनकी रचनाओं के अतिरिक्त उनके निजी जीवन से जुड़ी चीजें भी संरक्षित की गई हैं जिसमें उनके विवाह की टोपी भी शामिल है । जरूर इस टोपी को संरक्षित करने में उनकी पत्नी शांता बाई का ही हाथ होगा । शांता बाई सही अर्थों में उनकी सहधर्मिणी रही हैं । इस त्रिवेणी परिसर में यूँ तो तीनों विभूतियों की यादें संरक्षित की गई है मगर यहाँ की दरोदीवार में, यहाँ की हवाओं और रानी तालाब के गहराईयों में मुक्तिबोध ही उभरतें हैं । कमरे की खिड़की से मैंने बाहर देखा, वहाँ से तालाब का सुनील जल नजर आ रहा था, वो तालाब जहाँ गहरे जल में धँसा ब्रह्म राक्षस अपने शरीर को मल-मल कर धो रहा है- ''बावड़ी की उन घनी गहराइयों में शून्य । ब्रह्म राक्षस एक पैठा है । ............. ब्रह्म राक्षस धिस रहा है देह । हाथ के पंजे बराबर । बाँह, छाती, मुँछ छपाछप । खूब करते साफ । फिर भी मैल फिर भी मैल । '' इस त्रिवेणी में शामिल पदुमलाल पुन्नलाल बख्शी और मुक्तिबोध की तो ये जन्मभूमि नहीं है । राजनांदगाँव कर्मभूमि है । मगर इसी त्रिवेणी की तीसरी कड़ी डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र की जन्मभूमि है । राजनांदगाँव संभ्रांत परिवार में जन्में डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र इन्होंने महाकाव्य नाटक निबंध और समीक्षाओं के साथ-साथ 'तुलसी दर्शन' नामक एक शोध ग्रंथ लिखा था, जिस पर इन्हें नागपुर विश्वविद्यालय ने डी.लिट. की उपाधि प्रदान की थी । मिश्र लम्बे समय तक रायगढ़ नरेश के दीवान भी रहे । इस दौरान इन्होंने रायगढ़ में अनेक साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन करवाया जिसमें देश के जाने माने रचनाकारों ने अपनी भागीदारी निभाई । इस परिसर में डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र की साहित्यिक कृतियों के साथ ही उनके जीवन से जुड़ी चीजों को भी सहेज कर रखा गया है । डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र को पुरातात्विक चीजों को संग्रहीत करने का भी शौक था । अपने जीवन काल में उन्होंने कई तरह के शंखों का संग्रह किया था, जिसमें पाँच करोड़ वर्ष पुराने शंख भी शामिल थे । इसके अतिरिक्त उनके पास करोड़ों वर्ष पुरानी अन्य चीजों का भी संग्रह था । जैसे सुपारी, लौंग, इलाइची और कत्था । इन्हें पुरातात्विक और दुर्लभ वस्तुओं से संग्रह का शौक हमेश ही रहा । डॉ. मिश्र जी की बहुत सी चीजों को यहाँ संग्रहित किया गया है ।

कभी-कभी सरकारें अच्छा काम कर जाती हैं । ये त्रिवेणी परिसर भी सरकार के अच्छे कार्य का उदाहरण है । संग्रहित वस्तुओं के कक्ष से नीचे उतरकर हम परिसर स्थित रानी तालाब को देखने गये । प्राचीन परिपाटी में बने उस तालाब का नीला जल और उसमें से उठती मदुल तरंगे उसकी गहराई का आभास दे रही थीं । तालाब के इर्द गिर्द आज भी कनेर और डहर के फूल लगे हुए हैं जिनका वर्णन मुक्तिबोध ने अपनी कविताओं में किया है । हम देर तक तालाब के तीर पर खड़े मुक्तिबोध की कविताओं को याद करते रहे । फिर उन्हीं यादों में डूबे हुए हम लौट चले थे अपने गन्तव्य की ओर ।

---

A -21

स्टील सिटी

रायपुर छत्तीसगढ़

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

-----****-----

-----****-----

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1

.... प्रायोजक ....

-----****-----

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच करें : ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


|आपके लिए कुछ चुनिंदा रचनाएँ_$type=complex$count=8$src=random$page=1$va=0$au=0

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3864,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,337,ईबुक,192,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2811,कहानी,2136,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,489,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,90,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,348,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,327,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,50,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,9,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,18,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,238,लघुकथा,862,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,24,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,62,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1932,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,659,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,703,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,15,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,61,साहित्यम्,2,साहित्यिक गतिविधियाँ,186,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,58,हास्य-व्यंग्य,69,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: संस्मरण लेखन पुरस्कार आयोजन - प्रविष्टि क्र. 34 : एक यात्रा त्रिवेणी परिसर की // उर्मिला शुक्ल
संस्मरण लेखन पुरस्कार आयोजन - प्रविष्टि क्र. 34 : एक यात्रा त्रिवेणी परिसर की // उर्मिला शुक्ल
https://lh3.googleusercontent.com/--1SBaBN_Y68/WoRdglIEFrI/AAAAAAAA-_Y/GYkzxBB-UX457Kqfsrf9NsPwFyPeGj7LgCHMYCw/image_thumb?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/--1SBaBN_Y68/WoRdglIEFrI/AAAAAAAA-_Y/GYkzxBB-UX457Kqfsrf9NsPwFyPeGj7LgCHMYCw/s72-c/image_thumb?imgmax=800
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2018/02/34.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2018/02/34.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ