संस्मरण लेखन पुरस्कार आयोजन - प्रविष्टि क्र. 38 : मिल गये पंख // त्रिवेणी तुरकर

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प्रविष्टि क्र. 38

मिल गये पंख

त्रिवेणी तुरकर

बचपन से ही उड़ने का स्वप्न देखने वाली मैं अपने जीवन के संध्याकाल में इस स्वप्न को पूर्ण होते देख रही हूँ। महसूस कर रही हूं कि मुझे पंख लग गये हैं और मैं उड़ कर शीघ्र ही अपनी प्रिय बिटिया, दामाद, व इनके प्यारे बच्चों से मिलूंगी।

बचपन में अक्सर ही एक स्वप्न देखा करती थी कि मैं घर के कंपाउंड वाल पर से नीचे कूद रही हूँ परंतु जमीन पर चलने के बजाय हवा में ही उड़ती जा रही हूँ ऐसे उड़ते रहना बड़ा अच्छा लगता था और ऐसे स्वप्न देखना भी, एक समय कभी सोचा न था कि यह स्वप्न सच हो जायेगा।

एयर इंडिया एक्सप्रेस की नागपुर से दुबई की उड़ान, प्लेन में बैठने के थोड़ी देर बाद एयर होस्टेस द्वारा दी गयी सूचनायें और जैसे ही प्लेन ने रनवे पर दौड़ना प्रारंभ किया एक विचित्र रोमांच का अनुभव हुआ धीरे-धीरे विमान ऊपर उठा और कुछ देर बाद खिड़की के बाहर में देखने पर पता चला की विमान हवा में तैर रहा है।

यह एक आनंददायी अनुभव था पहली हवाई यात्रा का, डर का अनुभव इसीलिये नहीं हुआ की प्यारी पोती निहारिका ने अपने हवाई यात्रा के अनुभव बता-बता कर हमें पूरी तरह से ट्रैंड कर दिया था।

बेटी मिन्नी के कारण मुझे काफी स्थानों पर जाने, घूमने और देखने का अवसर मिला है। इस समय भी उससे मिलने के लिये पहली बार हवाई यात्रा करके देश के बाहर हम दोनों जा रहे है, यह एक विलक्षण अनुभव है। रास्ते में प्लेन एक घंटे के लिये अहमदाबाद विमानतल पर रुका, यहाँ से यात्रियों को लेकर फिर से उड़ान भरी गयी। खिड़की से बाहर का दृश्य दिखाई दे रहा था। अहमदाबाद का एयरपोर्ट व शहर हवा में उड़ते-उड़ते ही देखना बड़ा अच्छा लगा।

कुछ देर बाद कहीं समुद्र तो कहीं रेगिस्तान, कहीं पर शहर दिखाई दे रहे थे।

दुबई के अंतर्राष्ट्रीय विमानतल पर पहुंचने की घोषणा हुई, विमानतल पर परिचारिका ने हमें पीछे के दरवाजे से अच्छी तरह उतरने में सहायता की और हमारे हाथों के छोटे बैग भी एक व्यक्ति ने संभालकर हमें विमानतल की बस तक पहुंचा दिया जिसमें बैठकर हम विमानतल की इमारत तक पंहुचा दिये गये। जहा पर बाहर निकलने के लिए अन्य औपचारिकतायें पूरी करनी थी। बस से उतरते ही हाथों में हमारे नाम की प्लेट लिये मरहबा ( सहायता के लिए ) खड़ी महिला जिन्हें बाला ने हमें बाहर तक लाने के लिये भेजा था उसकी सहायता से अंदर पासपोर्ट वीजा आदि की सभी कार्यवाहियां पूर्ण कर अपना लगेज देखने गये जहाँ सभी के सामान गोल चक्कर पर घूम रहे थे, वहां नीचे लोग अपना-अपना लगेज देखकर उठा रहे थे, हमने भी मरहबा के सहायता से अपना लगेज ट्राली में रखा व विमानतल की इमारत के बाहर के प्रवेश द्वार पर पहुंचे जहाँ पर बहुत देर से बाला, मिन्नी, वेद, विशाल हम लोगों का वेसब्री से इंतजार कर रहे थे।

विमानतल से घर तक पहुँचते-पहुँचते दोनों ओर की उंची-उंची इमारतें देखकर ऐसा लगा मानो हम इमारतों के शहर में ही पहुंच गये हैं।

करामा सेंटर में सामने घर पहुंचकर देखा कि सड़क पर काफी चहल पहल है। घर की बालकनी से दुबई की सबसे ऊंची मीनार का ऊपरी हिस्सा दिखाई दे रहा था।

दुबई में बेटी-दामाद के घर पहुंचे उस समय वे लोग वहां पर करामा सेंटर के ठीक सामने वाली इमारत में रह रहे थे। पहला दिन तो प्रवास की थकान, आपसी बातचीत व खाना खाकर थोडा विश्राम करने में बीता, उसी दिन संध्या को बाला हमें एक प्रार्थना भवन में लेकर गये, जहां पर गुरुद्वारा भी है और अन्य देवी देवताओं के फोटो व मूर्तियाँ भी थीं। वहां पर लोग अपनी अपनी आस्था के अनुसार पूजा अर्चना कर रहे थे। गुरूद्वारे में ऊपर के हाल में विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ जारी था।

हम लोग २० फरवरी को दुबई पहुंचे थे, उस समय वहां के वातावरण में अधिक गरमी नहीं थी। दुबई में शुक्रवार का दिन छुट्टी का होता है। अधिकांश कार्यालय शुक्रवार व शनिवार को बंद रहते है, तथा इतवार से गुरुवार तक ५ दिनों तक कामकाज जारी रहता है। यहाँ लोगों की दिनचर्या सुबह जल्दी शुरू हो जाती है, सुबह उठकर बालकनी से देखने पर सड़क पर कारों की संख्या, स्कूल बसें, व पैदल चलते लोग अपने-अपने काम पर जाने के लिये निकल पड़ते हैं। जनजीवन काफी व्यस्त है।

सोमवार के रात्रि में हम लोगों को बाला वहां के प्रसिद्ध दुबई मॉल दिखाने के लिये ले गये। यहाँ का अक्वेरियम बहुत ही आकर्षक है। यहाँ पर बनाई गई आइसरिंग में बहुत से बच्चे और युवा बर्फ पर स्केटिंग का आनंद ले रहे थे। मॉल में विभिन्न प्रकार की दुकानें, सोने व हीरे के विविध डिजायनों से जगमगाते शो रूम यहाँ से निवासियों व पर्यटकों से भरे हुये दिखाई दिये। अधिकांश लोग दुबई में सैर सपाटे और खरीददारी करने के उद्देश्य से आते हैं।

करामा सेंटर के ठीक सामने की इमारत में ही मिन्नी बाला रहते हैं। बाल्कनी से बाहर की ओर देखती हूं तो सड़क के दोनों ओर की इमारतों के निचले हिस्सों में दुकानें हैं, उसके नीचे कार पार्किंग के लिये गैरेज बने हैं। यहाँ पार्किंग की व्यवस्था बहुत अच्छी बनी है, सभी को अपने वाहन पार्किंग की जगह पर ही खड़े रखना जरुरी है। कहीं भी यातायात संबंधी अव्यवस्था नहीं दिखाई देती। पैदल चलने वाले भी अपनी बारी आने पर ही रास्ते पार करते हैं। अधिकांश वाहन कारें और टेक्सियां हैं। टू व्हीलर का उपयोग कम होता है।

यहाँ अधिकांश यातायात सड़क मार्ग द्वारा ही होता है, ट्रैफिक व्यवस्था स्वचालित है और सड़कें वाहनों की गति के अनुसार अलग-अलग हिस्सों में विभाजित हैं। सड़कों पर अधिकांश कारें, बसें ही चलती दिखाई देती हैं, यहाँ बसें काफी अच्छी है।

स्वच्छता की ओर यहाँ पर विशेष ध्यान दिया जाता है। सड़कों व परिसर की सफाई के साथ साथ पर्यावरण सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। दुबई समुद्र किनारे बसा होने के कारण यहाँ पर अधिकांश भूमि रेतीली होते हुये भी सड़कों के बीच के हिस्से व दोनों ओर खजूर के पेड़ व अन्य पौधे व साथ ही बीच-बीच में फूलों की रंगबिरंगी क्यारियां, पार्कों इत्यादि के विकास व संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया है।

अपने इस प्रवास के दौरान यहाँ के विभिन्न मॉल, पार्क, हॉस्पिटल, समुद्र किनारे, इत्यादि का आनंद उठाया। यहाँ अधिकांश लोग रात्रि के समय ही बाहर घूमने निकलते हैं। दिन में तापमान अधिक होने से रात के समय काफी देर तक लोग बाहर जाकर खरीदी, घूमने व बाहर खाने पीने का आनंद लेते हैं।

इस प्रवास में हमने बिटिया के परिवार के साथ बहुत आनंददायी समय बिताया, यहाँ के सभी महत्वपूर्ण स्थानों को व आकर्षक इमारतों को हमने देखा, खजूर यहाँ का मुख्य उत्पादन है। पर्यटन की दृष्टि से दुबई, अबूधाबी बहुत अच्छी जगहें हैं।

इसी प्रवास के समय एक बार रेगिस्तान में हम घूमने गये। वहां एक स्थान पर रेत में हमारी गाड़ी फंस गयी थी जिसे हम नहीं निकाल पा रहे थे, हम कुछ देर वही अटके रहे कुछ देर बाद सड़क पर जाने वाली एक कार से कुछ लोग उतरे उनकी वेशभूषा से वे वहीं के निवासी लग रहे थे। उन्होंने स्वयं आकर हमारी सहायता की। उनकी यह सद्भावना हमें बहुत अच्छी लगी.

अपने इस दुबई प्रवास के दौरान यहाँ की प्रसिद्ध बुर्ज खलीफा, दुबई म्यूजियम, साफ सुथरे समुद्र तट, फ्रायडे मार्केट, विभिन्न पार्क, इत्यादि देखने मिले।

दुबई के म्यूजियम में दुबई के प्राचीन इतिहास व विकास को क्रमबद्ध रूप से प्रदर्शित किया गया है। फ्रायडे मार्केट में बहुत ही सुंदर गलीचे व दैनिक उपयोग की वस्तुयें बिक रही थीं। शारजाह में बन रही वहां की सबसे बड़ी आकर्षक मस्जिद को देखा। सड़क परिवहन के अलावा मेट्रो का काम भी यहाँ पर तेजी से शुरू कर दिया गया है।

पर्यावरण संतुलन के लिये यहाँ पर वृक्षों व पौधों को लगाने व संरक्षित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। व नये-नये पार्क व छोटे-छोटे जंगल रूपी पिकनिक स्पॉट विकसित किये जा रहे हैं। रेगिस्तान में हरियाली लाने का प्रयास सचमुच ही प्रशंसनीय है।

श्रीमती त्रिवेणी तुरकर, गोंदिया

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