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संस्मरण लेखन पुरस्कार आयोजन - प्रविष्टि क्र. 47 : एन. सी. सी और मैं // मीना गोदरे "अवनि "

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प्रविष्टि क्र. 47 एन. सी. सी और मैं मीना गोदरे "अवनि " ----------------------------- आज शिक्षा की गुणवत्ता केवल किताबों तक ही सी...

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प्रविष्टि क्र. 47

एन. सी. सी और मैं

मीना गोदरे "अवनि "
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आज शिक्षा की गुणवत्ता केवल किताबों तक ही सीमित रह गई है परीक्षाएं उत्तीर्ण करके अपने पैरों पर खड़े होना और पैसा कमा कर आसमान की बुलंदियों छूना विद्यार्थियों का उद्देश्य रह गया है ।जो सफल हुए विदेशों में बस गए जो कुंठाग्रस्त हुए आत्महत्या आतंक या चोरी जैसे अपराधों में लिप्त हो गए


जहां शिक्षा का उद्देश्य देश समाज व परिवार के प्रति कर्तव्यपरायणता की सीख देकर योग्य चरित्रवान, निष्ठावान, सजग, साहसी, एकता व अनुशासनबद्ध जोश स्फूर्ति से लबरेज देश के भावी नागरिक तैयार करना है वहीं आत्मरक्षा, आश्रितों की रक्षा व देश की रक्षा के दायित्व का पाठ भी स्कूलों में दिया जाना चाहिए, ताकि देश के भावी कर्णधार चरित्र निर्माण के साथ एक वीर सैनिक भी हों, तभी देश का चहुंमुखी विकास व शिक्षा के उच्च आदर्श स्थापित हो सकेंगेlजिसके लिए आवश्यक है स्कूल कॉलेजों में योग, जूडो कराटे के साथ साथ स्कॉउट या एन .सी. सी. का प्रशिक्षण ।
सुबह के आठ बजने वाले थे मैं तेजी से बिस्तर से बडबडाती हुई उठकर टी .वी .चलाती हूं, ,,,,,,आजकल तो पता ही नहीं चलता,,,,,,पहले तो सुबह छै बजे से ही देशभक्ति के गीत सुनाई देने लगते थे पर अब तो मैं टी. वी .न चलाउं तो पता ही न चले, ,,,,इतने बडे राष्ट्रीय पर्व का, जिस दिन देश का संविधान बनाया गया था । छब्बीस जनवरी का सीधा प्रसारण देखने मैं हमेशा से ही उतावली रही हूं बचपन की बातें आज पचपन में भी ऊर्जा दे जाती हैं ।
पहले बच्चों को लेकर बैठ जाती थी देखने,   अब पोता पोती को लेकर।, ,,,,कान्वेंट स्कूलों में पढे बच्चों को तो वैसे भी देश प्रेम की भावना से वंचित रखा जाता है, राष्ट्रीय त्यौहारों की औपचारिकता एक दिन पूर्व ही कर दी जाती है पर मेरी रगों में तो देश प्रेम आज भी वैसा ही संचरित था जैसा स्कूल कॉंलेज के समय था, बच्चे पूछते, ,,,,
"हमारे स्कूलों में एन .सी .सी. क्यों नहीं पढाई जाती "


मेरा जबाब होता--"एक तो मिसनरी स्कूलों को इंट्रेस्ट नहीं होता और फिर प्राइवेट स्कूल खर्च भी उठाना नहीं चाहते"
दिल्ली के लाल किले के मैदान मेंछब्बीस जनवरी की परेड,प्रधानमंञी का ओजपूर्ण वक्तव्य,जवानों का कदम से कदम मिलाकर मार्च पास्ट करना, सलामी देना मुझे हमेशा ही बहुत प्रभावित करता रहा है ।उनके साथ मैं भी घर में ही मार्च पास्ट कर सलामी देने लगती,,,,, मुझे ऐसा करते देख उस दिन पास में बैठीआठ साल की पोती पूछ बैठी --"दादी आप उनकी नकल क्यों करती हो "
"जब मैं कॉलेज में पढ़ती थी तब मैं भी ऐसी परेड में शामिल होती थी,एन. सी. सी .लिए थी मैं, ,,,,,,
"ये एन. सी. सी .क्या होता है दादी  "?

"इसका मतलब है' नेशनल केडेट कोर ' यानी राष्ट्रीय छात्र सेना, ,,,,जिसका उद्देश्य एकता व अनुशासन का पाठ
पढाकर देश भक्ति से ओतप्रोत चरित्रवान नागरिक तैयार करना होता है"

मेरा जवाब होता, "एक तो मिशनरी स्कूलों को इंट्रेस्ट नहीं होता और फिर प्राइवेट स्कूल खर्च भी उठाना नहीं चाहते"
दिल्ली के लाल किले के मैदान से छब्बीस जनवरी की परेड, प्रधानमंत्री का ओज पूर्ण वक्तव्य, जवानों का कदम से कदम मिलाकर मार्च पास्ट करना, सलामी देना मुझे हमेशा से ही बहुत प्रभावित करता रहा है ।उनके साथ मैं भी घर में ही मार्च पास्ट कर सलामी देने लगती, मुझे ऐसा करते देख उस दिन पास बैठी तनु पूछ बैठी -"दादी आप उनकी नकल क्यों करती हो? "
"बेटा जब मैं कॉलेज में पढ़ती थी तब मैं भी इस परेड में शामिल होती थी NCC लिए थी" "
"ये NCC क्या होती है दादी "


इसका मतलब होता है "नेशनल कैडेट कोर," यानी राष्ट्रीय छात्र सेना, जिसका उद्देश्य एकता और अनुशासन का पाठ पढ़ा कर देशभक्ति से ओतप्रोत चरित्रवान नागरिक तैयार करना है।
हम देख रहे थे देश का गौरव बढ़ाते हुए स्वाभिमान और ऊर्जा से परिपूर्ण कॉलेज की छात्राएं दाएं कंधे पर बंदूक टिकाए पोशाक बद्ध जूते-मोजे बेल्ट बैच के टाई लगाकर खाकी वर्दी में कदम से कदम मिलाकर मार्च पास्ट करते हुए राष्ट्रपति को सलामी देते हुए बढ़ रही थीं उन्हें देखते ही मेरे रक्त में स्फूर्ति और जोश भर गया, ,,,याद आ गए मुझे कॉलेज के वो दिन जब महीनों पहले हम छब्बीस जनवरी की परेड की तैयारी करने लगते थे जिनकी परेड अच्छी होती उन्हें ही इसमें शामिल किया जाता । मैं तीन साल इस परेड में शामिल हुई थी।


अब स्कूली बच्चे भी हजारों की संख्या में अनुशासन बद्ध होकर तरह-तरह के प्रदर्शन कर रहे थे, तीन कलर की ड्रेस पहिन तिरंगे झंडे का प्रदर्शन बडा मनमोहक था, ,,, थोडी ही देर में विभिन्न राज्यों की विशेषता दर्शाती, संदेश देती हुई, कोई नाटक कोई नृत्य तो कोई अन्य प्रदर्शन कर इतनी सुंदर सुसज्जित झांकियां निकाल रहे थे कि बस देखते ही बनती।
थल सेना की महिलाओं का हैरतअंगेज प्रदर्शन देख तो हम ने दांतो तले अंगुली दबा ली। एक मोटरसाइकिल पर आठ महिलाएं तरह-तरह की करतब दिखाते हुए बढ़ रही थी तो मोटरसाइकिल के अगल बगल में एक एक महिला पंखे की तरह लगातार घूम रही थी जोखिमपूर्ण प्रदर्शन कर महिलाओं ने इस क्षेत्र में भी पुरुषों के समक्ष अपने झंडे गाड़ दिए थे रक्षा मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी महिला ही आसीन थी जो सेना प्रमुख के रूप में विदेशी अतिथियों का प्रधानमंत्री के साथ स्वागत कर रही थी, यह सब देख उल्लास से भर मैं पता नहीं कब विगत में उतरती चली गई।


कॉलेज के पीरियड चार बजे तक समाप्त हो जाते उसके बाद हफ्ते में दो दिन NCC की क्लास होती जो दो घंटे चलती थी घर पहुंचते पहुंचते शाम हो जाती, थोड़ा सा नाश्ता वहां मिलता पर घर आते आते बहुत जोरों से भूख लग आती । आते ही अम्मा की डांट पड़ने लगती है
" ऐसी कौन सी पढ़ाई है जो इतनी देर तक चलती है  "?
उन्हें बताया तो और डांट
" मुझे नहीं कराना NCC की पढाई , ,, क्या करोगी सीखकर? कोई युद्ध जीतना है क्या ?घर का काम कैसे सीखोगी ?
चुपचाप रोते-रोते घर का काम निपटाती तब कहीं खाना खाती ।रात का होमवर्क परीक्षा की तैयारी और संस्कृत इन डिप्लोमा की दो वर्ष की डिग्री लेने हफ्ते में दो दिन पीरियड छोड़कर यूनिवर्सिटी जाती,, सब कुछ एक साथ चल रहा था। मैं चाहती थी बी .ए. करने के साथ ये डिग्रियॉ भी रहेंगी तो जॉब लगने में आसानी होगी ।

NCC में कॉलेज में ए और बी सर्टिफिकेट मिलता है जो बड़े काम का होता है। अम्मॉ तो पढ़ा लिखा कर शादी करना चाहती थी पर मैं अपने पैरों पर खड़े होने की तैयारी । छब्बीस जनवरी की तैयारी में तो रोज ही लेट हो जाती, डांट खाती, ,,,रोती रहती पर अम्मा को कौन समझाए परेड की तैयारी चल रही है।

वह दिन तो हमारे लिए जोश से भरा ऐसा लगता मानो हम तैयार होकर युद्ध पर ही जा रहे हों,,,,,,रात को बेल्ट टाई चमकाते मोजे साफ होते जूते पर पॉलिश कर चमकाते, ड्रेस धोबी से स्टार्च करवा कर रात में ही हेंगर पर टांग देते । सुबह पॉच बजे उठकर तैयार होने लगते, छै तीस पर घर से करीब डेढ सौ मीटर की दूरी पर आर्मी का ट्रक खडा होता वहां तक पहुंचने मैं सुनसान सड़क पर दौड़ लगा देती , वैसे भी दोनों चोटियां गूंथकर एर्ट फिगर में इस तरह पीछे बांधती कि कैप लगाने से छिप जाती तब पूरी ड्रेस पहनने के बाद लड़के लड़की का फर्क करना मुश्किल ही होता। यूनिफॉर्म पहनकर एक अलग ही फीलिंग आती थी ।मैं स्मार्टनेस और जोश से भर दौड़ती, ,तो मुझे केवल अपने बूटों की आवाज सुनाई देती, ,,,,भय संकोच शर्म तो जैसे जूतों की टॉप के नीचे ही दब जाते।


खाकी वर्दी और ब्राउन जूते की यूनिफार्म में जब हम परेड ग्राउंड पर पहुंचते तो सार्जेंट की कड़क आवाज सुनते ही हमारे बदन में खून का संचार जैसे तेजी से होने लगता । हम बाएं हाथ में राइफल लेकर सावधान हो जाते पर,,,," आगे बढ" सुनते ही हमारा बायां पैर और दायां हाथ आगे बढ़ जाता मुख्य अतिथि के सामने से गुजरते वक्त कमांडर की फिर कड़कदार आवाज गूंजती,,,,, ,"परेड सैल्यूट कर " चलते चलते ही हमारा शरीर सामने और गर्दन दाएं तरफ मुड़ जाती दाएं हाथ का अंगूठा अंदर कर हम हथेली दाएं तरफ से लगाकर सैल्यूट देते और आगे बढ़ जाते । विश्राम की अवस्था में घंटों धूप में खड़े रहते पर ग्राउंड पर बजने वाले आर्मी बैंड की ध्वनि तरंगें से मन देश प्रेम और समर्पण से भर जाता । चीफ गेस्ट के भाषण और पुरस्कार वितरण के बाद हम फ्री हो जाते, पर अनुशासन तब भी ना टूटता ।कतारबद्ध हो वापिस लौटने के लिए पुन:ट्रक में चढ़ जाते ।
मुझे राष्ट्रीय पर्व अन्य होली दीवाली आदि प्रमुख त्यौहारों से कम न लगते हैं रेडियो टी वी जहां भी सुनने मिलते मैं देशभक्ति के गीत लगा लेती, ,,,,पता नहीं NCC लेने से देश के प्रति समर्पण भाव था या कवि हृदय होने से । पर हमेशा लगता अपने देश के लिए जो भी हो सके जरूर करुं, इसी भावना के चलते आज तीस वर्षों से लगातार स्वयंसेवी संस्थाओं के विभिन्न पदों पर रहकर शोषण और पीड़ित मानवता के लिए काम कर रही हूं ।
जब भी कहीं मेला प्रदर्शनी लगती मुझे वहां जाने का उत्साह इसलिए होता कि वहां राइफल से बैलून पर निशाना साधने मिलेगा पति देव जी किसी समय NCC सार्जेंट थे वो मेरी भावनाओं को अच्छी तरह समझते थे मुझे उस स्टॉल पऱ जरुर ले जाते । मैं निशाना साधती, ,,,,,कुछ लगते कुछ चूक जाते, बच्चों को यह सब मजाक लगता, ,,,, वह हंसते  "


"|       "अरे मम्मी आप से बंदूक पकड़ते भी न बनेगी निशाना लगाना तो दूर की बात है" किंतु देखकर वह भी आश्चर्य करते हैं। अब उन्हें कौन समझाए कि कॉलेज के दिनों में मैंने भली-भांति शूटिंग का प्रशिक्षण लिया था जब राइफल चलाने के प्रशिक्षण के लिए हमें यूनिवर्सिटी की पहाड़ी पर ले जाया जाता था, तब वहां थोड़ी थोड़ी दूर पर रेत की बोरियां रख दी जाती थी जिनके सहारे लेट कर हम राइफल अपने कंधे पर रखकर उल्टे ले जाते थे लगभग पचास फीट की दूरी पर टारगेट चिपकाए जाते थे ।बंदूक चलाते वक्त हमें बंदूक की नाल में ऑख लगाकर यू के आकार और फ्रंट साइड की नोक को सीध में लेते हुए टारगेट की तरफ नाल करके निशाना साधना होता, ,,,हम पोजीशन लेकर लेट जाते ट्रिगर पर उंगली रखे कमांडर ऑफिसर कर्नल या मेजर साहब का निर्देश मिलते ही ट्रिगर दबा कर गोली चला देते, ,,,,निशाना शुरू शुरु में तो टारगेट पर कहीं भी लगता, पर प्रेक्टिस होने पर निशाना सेंटर में लगने लगा ।सेंटर में निशाना लगते ही हम गर्व से फूल जाते हैं जैसे कोई जंग जीत ली हो।


मुझे दो बार NCC कैंप में जाने का मौका मिला पहला कैंप सागर मध्य प्रदेश की गवर्नमेंट स्कूल में लगाया गया उस समय दीपावली की छुट्टी के कारण स्कूल खाली रहता है कई शहरों और कस्बों की लड़कियां आई थी सभी को अलग-अलग कमरों में ठहराया गया ।सहेलियों के साथ रहने का आनंद ही कुछ और होता है, बड़ी मुश्किल से घर से आना मिला, ,,हम तीन सहेलियां अपना बैग बिस्तर लेकर यूनिफॉर्म में रेलवे स्टेशन पहुंच गए, एक अलग ही जोश था ।सारी लड़कियां इकट्ठी हो गई थी, लग रहा था आर्मी का कोई समूह छोड़ दिया गया हो । ट्रेन में हम भी लड़कों की तरह मस्ती करते हुए केम्प पहुंच गए,वहाँ रात के खाने के लिए लंबी कतार में अपनी थाली लेकर खड़े हो गए, ,,,,,भूख जोर की लग रही थी दाल रोटी चावल सब्जी एक ही बार में थाली में रख दिए, सब्जी तो ठीक थी पर चावल में कंकड निकालकर खाना पड़ा, रोटियां भी कच्ची। कभी-कभी कुछ अच्छा मिल जाता, ,,,,,साथ में बैठ कर खाते तो हंसते-हंसते कब खा जाते पता ही नहीं चलता, शायद यह हमारी स्ट्रांग बनने की प्रेक्टिस थी ।


रात को कैंप में सांस्कृतिक कार्यक्रम होते, ,,,,अलग-अलग प्रदेशों के कैडेट अपनी अपनी प्रस्तुति देते नृत्य नाटक गीत संगीत समां बॉध देते । यूनिफार्म का इस समय कोई बंधन न होता, हम तरह-तरह की फैशनेबल कपड़े पहन कर आ जाते शाम को रोल कॉल परेड होती, जिसमें हम विदाउट यूनिफार्म में सम्मिलित होते कमांडर ऑफिसर संदेश, ,,, देते कल का प्रोग्राम बताते फिर हमें मिलने जुलने छोड़ देते । रात को सोते समय डर लगता तो हम एक दूसरे के बिस्तर में घुस जाते और ओढ़ कर सो जाते ।


सुबह पॉच बजे उठकर यूनिफॉर्म में जाना होता कड़ाके की ठंड में जाना बहुत अखरता, ,,,पर अनुशासन के साथ स्वतंत्रता भी थी, परेड के बाद ऊंचाई पर चढ़ना माउंटेन जूडो कराटे घुड़सवारी मैप -रीडिंग, कंपास देखना, दुश्मन से बचाव दुश्मन पर बिना हथियार लड़ने के साथ-साथ स्वच्छता प्रबंधन डूबने से बचाना, आग बुझाना, पर्सनालिटी डेवलपमेंट, नेतृत्व विकास, मिलजुल कर काम करना आदि सिखाया जाता ।
मुझे NCC की पढ़ाई बिल्कुल अच्छी नहीं लगती, सांकेतिक भाषा में संदेश भेजना सिखाया जाता जिसमें डिड, , ",ड डा डिड डिड ड " जैसे शब्द सीखना होते, , जो मुझे कभी याद ना होते, हमेशा इस क्लास से बचने की कोशिश करती ।


दूसरा केम्प जबलपुर जाना था उसमें जाने का इंट्रेस्ट इन सब चीजों को सीखने की जिज्ञासा के साथ कैंप का सर्टिफिकेट भी था जो भविष्य में मेरे लिए महत्वपूर्ण था, ,,,,इस कैंप में पांच सहेलियों का ग्रुप था जिनमें से एक बहुत चंचल थी । दो दिन बाद बोली-
"हम यहां आए हैं तो जबलपुर भी न देखें,,,,, ऐसा कैसे हो सकता है  ? क्यों ना हम पांचों निकलकर बाहर घूम आएं"
"आखिरी दिन तो वैसे भी शहर घुमाने ले जाते हैं तभी चलेंगे" मैंने कहा
"तब तक वेट नहीं कर सकते बस थोड़ी ही देर में आ जाएंगे "
"जय श्री ऐसा सोचना भी मत, पता चलेगा तो पनिश्मेंट जानती हो, ,,,दो किलोमीटर की दौड़ लगवा दी जाएगी, धूप में "
पर वह कहां मानने वाली थी उसने सब को तैयार कर लिया, मुझे भी न चाहते हुए जाना पडा । रोल कॉल परेड में सबके मिलने जुलने का समय होता है शाम पॉच से छै। बोली--" इसी समय चलते हैं, समय समाप्त होने तक लौट आएंगे ।"


डरते डरते हम चुपचाप पीछे के गेट से निकल गए उस समय का जुनून अलग ही होता है, ,,,चलते चलते हमें एक पंजाबी होटल दिखी सब ने वहां अपनी पसंद का खाना खाया और ऑटो करके वापस आ गए । रोल कॉल हुए दस मिनट हो चुके थे, ग्राउंड पर कमांडर मैडम खडी थीं, ,,,,शायद हमें देख लिया पर पहचान न पाईं । वह मुझे बहुत चाहती थीं हर काम मुझसे ही करवाती थीं,,,,, थोड़ी देर बाद रूम में आई बोलीं --मीना इधर आओ डर के मारे मेरी तो सांस ऊपर की ऊपर नीचे की नीचे रह गई , ,,,,,लगा पहली बार गलती हुई और पकड़ी गई, ,,,आज तो खैर नहीं, वह बोली --"तुम उन लड़कियों के नाम लिखकर मुझे दो जो कैंप से बाहर गई थीं जिनमें एक पीले सूट वाली लड़की थी जिसके पीछे चार और थीं कहते हुए वह बाहर चली गई।


उनके जाते ही सब ने दरवाजा बंद कर लिया और पेट पकड़ पकड़ हंसने लगी वो बोलीं--"मीना पीले सूट वाली तो तुम्हीं थीं " "हां यार, ,,मैं कैसे लिख कर दे सकती हूं अपना नाम "
"त़ुम्हें ही सबसे ज्यादा चाहती हैं, अब सोच लो पनिश्मेंट चाहिए या इंप्रेशन" , ,,,,,
"मेरी जान पर बन आई है और तुम्हें मजाक सूझ रहा है "
रात भर सोचती रही क्या जवाब दूंगी?, न तो मैं अनुशासनहीनता की पक्षधर थी न ही झूठ बोल सकती थी भगवान का नाम लेते लेते कब नींद लग गई पता हीं न चला।
सुबह सार्जेंट की कड़क आवाज से नींद खुली
"सब जल्दी तैयार होकर ग्राउंड पर पहुंचो,,,,_ आज स्वास्थ्य प्रशिक्षण और प्राथमिक उपचार की क्लास होगी।"


हमने तैयार होकर कतारबद्ध हो कर्नल साहब को सैल्यूट किया । उन्होंने क्लास ली जिसमें संतुलित आहार, व्यायाम का महत्व, रक्तदान बताते हुए कृत्रिम सांस, फ्रैक्चर बांधना, रक्त स्त्राव रोकना, बेहोशी, सांस देना फ्रैक्चर बांधना रक्तस्राव, जलने कटने पर बचाव तरह-तरह की पट्टियां बांधना आदि नर्सिंग का बुनियादी प्रशिक्षण दिया। सब ब्रेकफास्ट के लिए जाने लगे । मुझ से न रहा गया और मैंने जेब से वह पर्ची निकाली जिसमें रात में सबसे ऊपर अपना नाम और बाकी लड़कियों के नाम लिखे थे , मैडम को दे दी, ,, वो मुझे देखकर मुस्कुराई और बोली--" जाओ ग्राउंड के दो चक्कर लगाओ "
वे सब कह रही थीं "हम तो मीना के स्वभाव से पहले ही वाफिक थे वह चुप न रहती, पर अच्छा ही हुआ कि हमें ज्यादा पनिश्मेंट नहीं मिला।
पर मैं समझ गई थी यह मेरी परीक्षा और ईमान का फल था ।


ध्यान टी .वी .पर गया, ,,,आर्मी का झंडा लिए जवान मार्च पास्ट कर रहे थे , तनु फिर बोली --"दादी तिरंगे झंडे के रंग तो ऐसे नहीं होते, इसमें तो दूसरे रंग हैं "
"हां बेटा, यह आर्मी का फ्लैग है,,,इसमें रेड कलर -थल सेना का, डार्क ब्लू नेवी यानि जल सेना का और लाइट ब्लू एयरफोर्स के प्रतीक के रूप में होते हैं ।"
"अरे दादी आप को तो सब पता है फिर आप सेना में भर्ती क्यों नहीं हुई "


" सबका सेना में जाना जरूरी नहीं होता बेटी इससे और भी बहुत सी चीजें सीखी जाती हैं, ,,,,,,मेरा आत्म बल, साहस, सकारात्मक सोच, ऊर्जा निडरता लीडरशिप सब इसी से आई और मैंने संघर्षों को चुनैतियां मान स्वीकारा, ,, तुम्हारे पापा बुआ को एक आदर्श नागरिक बनाया ईमानदारी और अनुशासन का पाठ पढ़ाया, जो वह आज तुम्हें सिखाते हैं, नहीं तो कैसे कर पाती मैं यह सब तुम्हारे दादू के बिना, ,,,,
"दादी मुझे भी यह सब सीखना है, मेरे स्कूल में क्यों नहीं है ?"
"जरूर होना चाहिए, ,,,सैन्य क्षमताओं के विकास और देश की भावी पीढी के उज्जवल भविष्य के लिए प्रत्येक स्कूल में एन.सी.सी .होना चाहिए ।किंतु आज तो शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छा रिजल्ट लाने की होड़ तक ही सीमित रह गया है ।"


अब मैं देख रही थी छब्बीस जनवरी के कार्यक्रम में उन रक्षा मिसाइलों, गनो तोपों बमों और तरह तरह के अस्त्रों को जिनकी क्षमताओं की जानकारी के साथ प्रदर्शन किया जा रहा था । इन्हीं में एक थी अग्नि मिसाइल जो हमारे देश के राष्ट्रपति महान वैज्ञानिक डॉ अब्दुल कलाम जी ने तैयार करवाई थी, इसीलिए वो मिसाइल मेन के नाम से जाने जाते थे ।होमगार्डों तोपों गनो और तरह-तरह के अस्त्रों को देखकर मेरा सीना गर्व से भर गया ।
शस्त्र प्रदर्शन कर हम भी दूसरे देशों को बता देते हैं कि हमारे आदर्शों को कमजोरी समझने वाले देखलें कि हम भी ईंट का जवाब पत्थर से देने तैयार रहते हैं हम शांति के दूत हैं तो स्वाभिमान के पूत भी हैं । यह राष्ट्रीय त्यौहार जहाँ हमारी चेतना को पुनर्जीवित करते हैं वहीं हमारे हौसले जोश और देश प्रेम की भावना को भी पुनः जागृत करते हैं।


कार्यक्रम समाप्त हो गया था राष्ट्रगीत के साथ मैं खड़ी हो गई,,,,, सावधान की स्थिति में मेरी तरह वह भी खड़ी हो गई,,, भारत माता की जय के साथ उसने भी मुझे देखकर सैल्यूट किया ।
सच ही है भावी पीढ़ी की रूचि बढ़ाने हमें अपनी रुचि को जीवित रखना होगा ।देश के प्रति अपना कर्तव्य निर्वहन केवल रक्षा सेना में भर्ती होना नहीं है देश के भावी कर्णधारों में देश प्रेम व समर्पण का बीज बोना भी है जो जीवन समर में स्वाभिमान से जी सकें समय आने पर एक वीर सिपाही बन अपने आश्रितों की रक्षा और देश की रक्षा के लिए भी सदैव तत्पर रहें ।


मीना गोदरे "अवनि "
इंदौर( म .प्र.)



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परिचय
नाम - श्रीमती मीना गोदरे 'अवनि'
शिक्षा एम.ए.अर्थशास्त्र ,डिप्लोमा इन संस्कृत,  एन सी सी कैडेट कोर सागर हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय
दार्शनिक शिक्षा ---जैन दर्शन के प्रथम से चतुर्थ भाग सामान्य एवं जयपुर के उत्तीर्ण छहढाला ,रत्नकरंड -श्रावकाचार ,मोक्ष शास्त्र की विधिवत परीक्षाएं उत्तीर्ण अन्य शास्त्र अध्ययन ।
अन्य प्रशिक्षण -फैशन डिजाइनिंग टेक्सटाइल प्रिंटिंग ,हैंडीक्राफ्ट ब्यूटीशियन ,बेकरी  प्रशिक्षण आदि 
संचालिका (पूर्व)
अंकुर कला केंद्र
ओशन बुटीक

सामाजिक क्षेत्र---- संस्थापिका सद्भावना महिला मंडल,
पूर्व अध्यक्ष---१--इनरव्हील क्लब रोटरी        २--सदभावना महिला मंडल सागर         ३-अखिल भारतीय दिगंबर जैन महिला परिषद ,
इसके अलावा उपभोक्ता फोरम  रेड क्रॉस सोसोइटी आदि अनेक सामाजिक संस्थाओं की सदस्य
पुरस्कार ---सर्वश्रेष्ठ प्रेसीडेंट पुरस्कार इनरव्हील क्लब
सर्वश्रेष्ठ प्रेसीडेंट सद्भावना महिला मंडल पुरुस्कार
सर्वोत्कृष्ट प्रेसिडेंट अखिल भारतीय दिगंबर जैन  महिला परिषद
इसके अलावा अन्य सभी पदों पर रहते हुए अनेकों पुरस्कार अर्जित किए ,
कनाडा से बेस्ट इम्यूनाइजेशन अवार्ड। साक्षरता  कार्यक्रम चलाने में सागर में प्रथम आने पर  स्थानीय कलेक्टर द्वारा शिक्षा सम्मान प्राप्त हुआ

वर्तमान पद --प्रांतीय सह सचिव ,अखिल भारतीय दिगंबर जैन महिला परिषद,

आजीवन सदस्य- कुंद कुंद  ज्ञानपीठ इंदौर, 
सदस्य -विश्व मैत्री मंच  ,साहित्य संस्था भोपाल
सदस्य - इंदौर लेखिका संघ
सह संपादक-- अंतर्राष्ट्रीय पञिका -'हिंदी सागर ",'जे. एम. डी .पब्लिकेशन दिल्ली
-साहित्य सृजन ----आकाशवाणी सागर छतरपुर से कहानी कविता गीत गजलें निबंध का प्रसारण १८ वर्षों तक, इंदौर आकाशवाणी से कहानी का प्रसारण, यू - ट्यूब पर वीडियो पर गीत का प्रसारण माया क्रिएशन मुंबई द्वारा,
भोपाल दूरदर्शन से  रचनाओं का प्रसारण।

  ई पत्रिकाओं में प्रकाशन-----ई  कल्पना ब्लॉक पर कहानी ,शब्दांकन बेव, ग्लोबल हिंदी,  हिंदी  रचना संसार,बेवसाइड पर कहानियों का प्रकाशन सृजन सरोकार व मातृभाषा डॉट कॉम हिंदी उन्नयन संस्थान पर निरंतर  रचनाओं का  प्रकाशन 
यश धारा पत्रिका राइजिंग स्टार  ओजस्विनी मुक्ता सरिता दर्पणआदि  नई दुनियॉ ,दैनिक भास्कर में पाठकों की अदालत में निरंतर टिप्पणियों का प्रकाशन, प्रतिक्रिया ,दैनिक आचरण पेपर में अनेकों रचनाओं का निरंतर प्रकाशन इसके अलावा दिल्ली से प्रकाशित पुस्तको यथा- भारत के श्रेष्ठ कवि एवं कवयित्रियां नारी चेतना की आवाज ,श्रेष्ठ काव्य माला ,श्रेष्ठ काव्य संग्रह, उन्नीसवीं सदी के श्रेष्ठ कवि एवं कवयित्री, प्रेम काव्य संग्रह ,साहित्य सागर ,साहित्य सरस्वती ,संस्कार सागर आदि पुस्तकों में रचनाओं का प्रकाशन
समीक्षाएं- 
पुस्तक--   "स्वर्ग का द्वार" (डॉ विनय षडंगी ),   
" मॉ"  पुस्तक--- (डॉ सरोज गुप्ता)

विरिष्ठ साहित्यकार निर्मल चंद निर्मलचंद जी निर्मल की छै पुस्तकों की
समग्र समीक्षा की

तीन पुस्तकों का प्रकाशन- काव्य संग्रह -
गुलदस्ता ,,समुद्र के सीप, गीत संग्रह- आस्था के पुंज्ज

साहित्यक पुरुस्कार -
दैनिक भास्कर भोपाल द्वारा  दो बार  आर्टिकल हेतु  पुरस्कृत
स्लोगन प्रतियोगिता में प्रांतीय पुरस्कार ,
हिंदी के प्रचार प्रसार को बढाने हेतु जे. एम .डी .पब्लकेशन दिल्ली द्वारा --
काव्य- श्री सम्मान ,  नारी गौरव सम्मान ,शब्द शिल्पी सम्मान,   प्रेम- काव्य सागर सम्मान
विश्व हिंदी रचनाकार मंच द्वारा -हिंदी सागर सम्मान,
भिलाई साहित्यपरिषद द्वारा -हिंदी सेवा सम्मान
मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा
भाषा सारथी सम्मान
,श्यामलम कला संस्थान सागर  द्वारा पुस्तक प्रकाशन पर सम्मान ,तीनो पुस्तकों के प्रकाशन पर जैन महिला परिषद के अलावा अनेकों संस्थाओं द्वारा सम्मानित
प्रकाशनार्थ_दो गजल संग्रह ,दो कहानी संग्रह दोहावली कावय संग्रह व निबंध संग्रह तैयार है

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नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3844,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,336,ईबुक,192,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2787,कहानी,2116,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा 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कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,649,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,688,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,55,साहित्यिक गतिविधियाँ,184,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,58,हास्य-व्यंग्य,68,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
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रचनाकार: संस्मरण लेखन पुरस्कार आयोजन - प्रविष्टि क्र. 47 : एन. सी. सी और मैं // मीना गोदरे "अवनि "
संस्मरण लेखन पुरस्कार आयोजन - प्रविष्टि क्र. 47 : एन. सी. सी और मैं // मीना गोदरे "अवनि "
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