हास्य-व्यंग्य : पकौड़ों की शान (?) में // डा, रामप्रकाश आर्य

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एक प्रबुद्ध पाठक, डा.रामप्रकाश आर्य ने एक लघु व्यंग्य-आलेख - सुरेन्द्र वर्मा के व्यंग्य निबंध ,"आह पकौड़ा  वाह पकौडा" पढ़ने के उपरांत, भेजा है.

पकौड़ों की शान (?) में

(डा. सुरेन्द्र वर्मा का व्यंग्य आलेख, आह पकौडा वाह पकौडा, पढ़ने के उपरांत )

(-डा. राम प्रकाश आर्य)

कभी कभी नियम तोड़ना मानव का स्वभाव है। वस्तु आकर्षक हो तो स्वभान का यह दुरतिक्रम और भी बढ़ जाता है। सेवन किए बगैर आदमी रह नहीं सकता। पकौड़े का एक पर्याय ‘भजिए’ भी है। भजिए के सम्बन्ध में कहा गया है कि कुछ लोगों की नाक भजिए के सामान होती है। भजिए की व्युत्पत्ति भज-स्तुतौ अथवा भज- सेवामाम से संभव है। स्तुति अथवा सेवा से मनुष्य नाक (स्वर्ग) तक पहुँच जाता है। आप यों भी कह सकते हैं कि ये भजिए स्वर्गिक आनंद देते हैं। कुछ बीमारियों में अत्यधिक सेवन करने से ये स्वर्ग तक भी पहुंचा सकते हैं।

पकौड़ों का संधि-विच्छेद पक+उड़ना के रूप में भी की जा सकती है। बेचारे शुभ्रवस्त्र धारण कर कढ़ाई में सात्विक भाव से अवगाहन करते हैं। परिस्थिति देखकर ये न केवल अपना रूप रंग अपितु स्वभाव भी बदल देते हैं। शान्ति गायब होकर उनका रजोगुण उद्बुद्ध होता है, यथासंभव (कढ़ाई से) कूदने का प्रयत्न करते हैं।

करछी से प्रताड़ित होने और दबाए जाने पर भी इनका विद्रोह समाप्त नहीं होता। पर अंतत: वही होता है जो जो हर सुख का होता है। ज़बरदस्ती बाहर निकाला जाता है। श्वेत वस्त्र अथवा कागज़ पर लिटाया जाता है। शक्ति क्षीण होने पर दबाया जाना और अंततोगत्वा जीवन-मुक्ति।

पकौड़े अथवा भजिए कितने ही स्वादिष्ट, आकर्षक भले ही हों पर इनके कुछ प्रच्छन्न शत्रु भी हैं जिन्हें आधुनिक भाषा में डाक्टर कहा जाता है। डाक्टरों का प्राचीन नाम ‘गदहा’ (गद, अर्थात, बीमारी को ‘हा’ ,मारने वाला) हुआ करता था। ये अपने हर मरीज़ को पकौड़े का सेवन न करने का निर्देश देते हैं। कारण, पकौड़ों में बेसन का सम्मिश्रण जो है और बेसन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। फ्राइड होने पर इनकी हानि और भी बढ़ जाती है, रहा सहा नमक भी रक्तचाप वृद्धि में सहायक होता है। इनमें पडी मिर्च की जलन और चरपराहट तक काफी समय के लिए अपना स्मृति चिह्न छोड़ जाती है। (बस इतना ही कहकर लेखनी को विराम देता हूँ)


- डा, रामप्रकाश आर्य

सेवा निवृत्त प्रोफ़ेसर, हिन्दी साहित्य

देवप्रस्त अपार्टमेन्ट

पावर हाउज़ रोड

रतलाम, (म. प्र.)

-४५७००१

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