उपन्यास : "डिवाइडर पर कॉलेज जंक्शन" - संक्षिप्त समीक्षा

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ब्रजेन्द्रनाथ मिश्र की लिखी दूसरी पुस्तक - उपन्यास : "डिवाइडर पर कॉलेज जंक्शन"  हिंद युग्म से प्रकाशित हो चुकी है। इसका लोकार्पण 14 जनवरी, 2018  को अंतरराष्ट्रीय  पुस्तक मेला, दिल्ली में संपन्न हुआ।


उपन्यास - एक  छोटे से शहर में स्थापित ऐसे डिग्री कॉलेज की कहानी है जिसके पास से रेलवे लाइन गुजरती है। इसलिए विद्यार्थी अपने पीरियड के विषय से अधिक उस ओर से गुजरने वाली ट्रेन के समय की जानकारी रखते हैं। कॉलेज 'को-एड' है इसलिए लड़कियाँ भी पढ़ती हैं। अन्य विषयों के लड़कों को यह अफसोस है कि लड़कियों की संख्या बायोलोजी या सायकोलोजी में ही अधिक क्यों है? कॉलेज में लड़कियाँ दो-चार के समूह में या अकेले होने पर रिक्शे से कॉलेज आना सुरक्षित महसूस करती हैं। ऐसे में अगर कोई लड़की अपने कॉलेज के पहले ही दिन अकेले पैदल चलते हुए कॉलेज आती है, तो इसकी चर्चा लड़कियों से अधिक लड़कों के बीच में होना स्वाभाविक है। ...और तब कोई भी चर्चा जोर नहीं पकड़ती है, जब कोई व्याख्याता या लेक्चरर कॉलेज के आसपास के अपने खेत पर घूमते-घूमते मिट्टी सने अपने जूतों या चप्पलों में ही सीधे क्लास में आ जाए। लेकिन जब कोई वेस्पा स्कूटर खरीद लेता हो, चाहे वह कोई प्रोफेसर ही क्यों न हो, तो चर्चा होने लगती है। यही चर्चा तब जोर पकड़ लेती है जब फलाना सर का फलाना रंग वाला वेस्पा ढिकाना सर जी के घर के सामने रुका हुआ हो, जब ढिकाना सर शहर से बाहर गए हुए हों। कॉलेज में जब छात्र परिषद के चुनाव की घोषणा होती है, राजनीति गर्माती है और उसी में बाहरी तत्वों का भी दखल बढ़ता है। कॉलेज के सही सोच वाले प्रोफेसर और विद्यार्थी मिलकर क्या कॉलेज को राजनीति के अखाड़ा बनने से बचा पाते हैं?
 


कॉलेज की पढाई करते - करते
समय की गलियों से यूँ गुजरना।
कुछ तोंद वाले सर, कुछ दुबले -पतले सर,
कुछ चप्प्लों में सर, कुछ जूतों में सर।
 
जैसे कॉलेज की दीवार से सटे
रेलवे लाईन पर ट्रेनों का गुजरना।
इसी बीच पनपता प्यार,
विज्ञान और अर्थशास्त्र के बीच।
छात्र परिषद के चुनाव की घोषणा होते ही
बाहरी तत्वों के घुसपैठ से,
कॉलेज के शान्त वातावरण का
पुल  - सा कम्पित होना, थर्राना।
 
यह दिलचस्प उपन्यास "डिवाईडर पर कॉलेज जंक्शन" में  अमेज़न पर उपलब्ध है।
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स्कूल के दिनों से कविताएँ लिखने की आदत कॉलेज के दिनों में भी जोर मारती रही। कविताएँ कॉलेज के मैगजीन में छपीं। जेपी आंदोलन के समय जेपी के विद्यार्थी एवं युवाशाखा के वाराणसी से प्रकाशित मुख्यपत्र 'तरुणमन' में लेखों का लगातार प्रकाशन। वर्ष 2005 से 2007 के बीच गया में मानस चेतना समिति के मुख्यपत्र 'चेतना' में कविता एवं लेखों का प्रकाशन। टाटा स्टील में 39 वर्षो के सेवा काल के बाद 2014 से लेखन कार्य में सक्रियता पुन: बढ़ी। ब्लोग लेखन marmagyanet.blogspot.com के नाम से अभी भी जारी। पहले कहानी-संग्रह ‘छाँव का सुख’ हिंद युग्म से 2015 में प्रकाशित। इंटरनेट पर कहानियाँ और कविताओं का लगातार प्रकाशन। जमशेदपुर में सिंहभूम जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन से और गया में गया जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन से सक्रिय जुड़ाव। दूसरी पुस्तक ‘डिवाइडर पर कॉलेज जंक्शन’ उपन्यास के रूप में पाठकों के समक्ष प्रस्तुत है।


brajendra.nath.mishra@gmail.com

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