संस्मरण लेखन पुरस्कार आयोजन - प्रविष्टि क्र. 100 : संस्मरणात्मक लघुकथाएँ // डॉ. लता अग्रवाल

लघुकथा

१. ममता

“धनिया वल्द पति हरिराम प्रजापति , तुमने थाने में रिपोर्ट लिखी थी , अपने बेटे के गुम हो जाने की ?”

“मालिक दुई बरस हुए रपट लिखाये रहे , मगर कोन खबर नाही इब तलक |”

“जितना पूछा जय उतना जवाब दो |”

“जी मालिक लिखाय रहे |”

तब तक पुलिस की जीप को देखकर गाँव वाले वहां जमा हो गये |

“कहाँ घूमा था ?” ढूढवाये थे ?”

“जी मालिक ऊ पलासिया पर मेला दिखने वास्ते ले गए रहे वहीँ बिछड़ गएल हमार कुरमई , बहुत खोजे मालिक मगर नाही मिलब |” कहते हुए धनिया छलक आये आंसुओं को धोती की किनोर से पोंछने लगी |”

“मगर मालिक दुई बरस बाद ...आ..प , का कोनउ खबर ...हमार कुरमई की ?”

“कहा न जितना पूछे उसका जवाब दो , क्या उम्र थी तब उसकी ?”

“मालिक उअही कोई दो बरस |”

“कोई पहचान ?’

“पहचान ..! मालिक हमार कुरमई की आँख भूरी रहिन , छंगा रहा हमार बचुआ अउर हाँ मालिक उ दिन मेले में हम उका हाथ में अइस तिरसूल गुदवाये रहे |” धनिया ने अपनी गोद के बच्चे का हाथ आगे करते हुए बताया |’

“क्या अब पहचान सकती हो अपने बच्चे को ?”

“मालिक एक माई अपने कोखजने को न पहचाने , भला ए सन हो सके |”

इंस्पेक्टर ने हवालदार को कार की ओर इशारा किया , सूट –बूट पहने एक साहब अपनी मेम साहब के साथ कार से उतरे , उनकी गोद में चार साल का मंहगा सूट , बूट पहने एक गबरू बच्चा था |

“ई कउन बाबू लोग हैं मालिक ?” धनिया गौर से देखते हुए बोली |

ये बैंक मेनेजर गुप्ता जी हैं ये उनकी पत्नी हैं , इस बच्चे को देखकर बताओ की क्या तुम्हारा बच्चा ऐसा दिखता था ?” इंस्पेक्टर ने बच्चे की ओर इशारा करते हुए कहा जो पास ही बंधी बकरी को देख गोद से उतरने की जिद कर रहा था | |

गोदी के बच्चे को नीचे उतार उस बच्चे को गोद में ले लिया |

‘वैसन बिल्लोरी आँखें , हाथ में ऊ ही तिरसूल का निसान , प्यार से उसकी ऊँगली सहलाते हुए उसके हाथ हथेली पर टिक गये दुई अन्ग्य्था भी , धनिया की पकड़ बच्चे पर मजबूत होती जा रही थी | कितना सुंदर दुःख रहा हमार बिटवा ,इहाँ आधे पेट रह रह कर रंग मंदा पड गया था अब मालिक लोगन के पालन से रंग कैसन निखर आया है | तू तो भागवान निकला रे कुरमई जों साहब लोगन के बीच पल रहा है | धनिया बच्चे पर हाथ फेर मन ही मन नजर उतार रही थी | की अचानक नजर साहब और मेम साहब से टकरागई दोनों की आँखों में एक डर देखा धनिया ने उसके फैसले का डर ,

“क्या देख रही है जल्दी फैसला दे |” इंस्पेक्टर ने लगभग चिल्लाते हुए बच्चे को अपनी गोद में ले लिया |

“अं ..नहीं मालिक, ई हमार बचुवा नाही , हमार कुरमई तो एकदम कठियाया रहा , उकी तो रंगत भी दबी रही |” कहते हुए धनिया ने अपने गोद के बच्चे को उठा जोर से सीने से भींच लिया |

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२. लैंगिक विकलांगता

“अरे ! ये तुम कहाँ घुसी चली आ रही हो ?” एक फर्म में नौकरी के लिए इंटरव्यूह हेतु अंदर आती एक किन्नर को देख रिसेप्शन पर बैठे व्यक्ति ने टोका |

“क्यों भाई , यहाँ आज इंटरव्यूह के लिए लिए पेपर में विज्ञापन दिया था , क्या यहीं हैं इंटरव्यूह ?’ किन्नर ने पूछा

“हाँ ! दिया था तो ...?” रिसेप्शनिस्ट ने जवाब दिया |

“तो क्या मैं सिमरन , वही इंटरव्यूह देने आई हूँ |” किंनर ने कहा |

“लो कर लो बात ...ये और इंटरव्यूह ...हा ! हा ! हा! “ हाल में खड़े सभी प्रत्याशी सिमरन को इंटरव्यूह के लिए आया देख हंस पड़े |

“इसमें हंसने की क्या बात ...क्यों हंस रहे तुम लोग मुझ पर हाँ ?” सिमरन ने पूछा |

“क्या तुम नहीं जानती कहीं नौकरी करने के लिए कोई रूल्स रेग्युलेशन होते हैं|” “जी मैं जानती हूँ , अख़बार में भी पड़ा हो रेग्यूलेशन के बारे में | सिमरन ने विनम्रता पूर्वक जवाब दिया |

“और भैय्या , क्वालिफिकेशन की आवश्यकता होती है ?” कुछ लोगों ने परिहास करते हुए कहा |

“एसक्यूज़ मी ! , आई एम, एम. एस. सी. गोल्ड मेडलिस्ट इन माइक्रोबायोलोजी फ्रॉम भारतीय विद्यापीठ (पूने) ... एंड आई कम टू नो अबाउट वेकैंसिस इन पी एच. रिज़र्व केटेगिरी | ”सुनते ही सभी के चेहरे लटक गये ...

“मगर तुम ...जानती हो न ...” सिमरन को उपर से नीचे तलक अर्थ पूर्ण ढंग से देखते हुए क्लर्क बोला |

“यस आई नो ...आपने लिखा है शारीरिक विकलांगों के लिए विशेष स्थान है |”

“ म...म..मगर आप विकलांग .... कैसे ..?”

“सवाल सुनकर सिमरन मुस्काई और कहा जी ! लैंगिक लैंगिक रूप से |”

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३. साँझ बेला

बीना !

आज मुझे याद आ रहा है वह दिन जब तुम ब्याहकर इस घर में आई थीं, तुम्हारी सुंदरता पर मोहित था मैं इसीलिए तो तुम्हें ख्वाबों की मलिका कहता था। तुमने मेरे हर ख्वाब पूरे किये पहले मानव फिर मानसी दो प्यारे बच्चे देकर मेरा परिवार पूरा किया।

न जाने कैसे धीरे धीरे तुम्हारे मांसल सौंदर्य का खुमार उतरता गया, तुमने हमारी हर जरूरतों का ध्यान रखा मगर तुम्हारी जरूरतों पर कभी ध्यान ही नहीं गया हमारा। कितने छोटे और मासूस शौक थे तुम्हारे, अपनी फूलों कि बगिया से कितना प्यार था तुम्हें, जब कभी कुछ दिनों को मइके जाती तो माली का काम मुझे सौंप जाती मैं कभी उस ओर ध्यान ही नहीं देता , पानी के अभाव में बगिया उजड़ जाती |तुम कई दिनों तक उदास रहतीं और मैं तुम्हारे दर्द को समझने के बजाय तुम्हारा मजाक बनाता ।

जिन बच्चों को रात –रात जागकर पाला उनकी नजर में तुम्हारी कोई कीमत न रही कारण उनकी सभी जरूरतें तो मुझसे पूरी होती थीं। इसके लिए भी मैं आज खुद को दोषी मानता हूँ...मैंने उनकी नजर में कभी तुम्हारी महत्ता बनने ही नहीं दी। वे तुमसे दूर होते गए जिसे मैं अपनी जीत समझ खुश होता रहा। इसके बावजूद भी तुम बिना शिकवा किये घर सँवारती रही हमारा , जिसे हमने हमेशा अपना समझा।

तुमने मेरे संसार में रंग भरा और मैंने...क्या दिया तुम्हें  ...दर्द भरे अँधेरे, तुम कहती रही सदा-

"विनीत ! आज तुम्हें मेरी कद्र नहीं मगर देखना जब न रहूँगी तो मेरा मोल समझ आएगा तुम्हें।"

सच ! बीना आज इस साँझ बेला में जब मुझे तुम्हारा मोल समझ आया तुम हम सब से दूर चली गई । आज छोटी -छोटी जरूरतों के लिए मैं मोहताज हूँ। बच्चे अपनी दुनिया में व्यस्त हैं । उनकी अपनी प्राथमिकताएं हैं। मैं निपट अकेला हूँ तुम्हारी यादों के साथ ।

हमारे इस घर को संवार रहा हूँ। रोज तुलसी के क्यारे में दीपक रखना नहीं भूलता तुम्हारी तरह। तुम्हारे फूलों की बगिया को संवारता रहता हूँ कि कहीं दूर बैठी तुम देख सको मेरे पश्चताप को और मुझे माफ़ कर सको।


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४. कही अनकही

"भैय्या जी ! का आप भी सीमा पर लड़ने जा रहे हैं ?"

" हाँ ! भौजी ! हमें भी सरकारी बुलावा आया है सीमा पर काफी तनाव है और भी सिपाही की जरूरत आन पड़ी है।"

" अच्छा ..! तो का वहाँ हमार मुन्नू के बापू भी मिलेंगे? "

"हाँ भौजी ! भैय्या भी होंगे वहाँ , का कोई सन्देसा भिजवाए का है। "

" सही समझे हैं भैयाजी , का तुम हमार सँदेसा मुन्नू के बापू के दे देंगे ?"

"क्यों नहीं भौजी कहो क्या सँदेसा भेजवाए का है ? "

"भैय्या जी ! उनसे कहिये,

"जब से उ गये हैं बप्पा की तबियत और भी बिगड़ गई है।अम्मा के घुटने का दर्द इतना बढ़ गया है कि अब हम ही सहारा देकर उन्हें नहलाने -धुलाने ले जाते है। भैय्या जी उनसे कहिये ...जब से आप गये हैं हम रात को सो नहीं पाते बहुत चिंता रहती है आपकी । अउर ना मुन्नू को पीलिया हो गया है | हमारी गौ माता भी परलोक सिधार गई , दूध की बहुतइ तकलीफ हो गई है । बारिश अधिक होने से खेतन में पानी भर गया सो फसल भी नुकसान पा गई।"
" जी भौजी ! कह देंगे ।

" इ ...मैय्या ..हम का कह गये ! सुनो भैया जी ! उनसे इ कछु मत कहिये , का है ना उ सीमा पर गये हैं देश की खातिर ...बाधा होगी। "

"कहना सब कुशल है, आपका इंतजार है।"


पूरा पता

डॉ लता अग्रवाल

७३ यश विला भवानी धाम , फेस -१

नरेला शंकरी

भोपाल -४६२०४१

लेखिका परिचय

नाम- डॉ लता अग्रवाल

शिक्षा - एम ए अर्थशास्त्र. एम ए हिन्दी, एम एड. पी एच डी हिन्दी.

प्रकाशन - शिक्षा. एवं साहित्य की विभिन्न विधाओं में 53  पुस्तकों का प्रकाशन. जिनमें 2कविता 2कहानी 2समीक्षा संग्रह , ५ बाल संग्रह, २० रोल प्ले , 79 कहानियों का अब तक लेखन, लगभग 400 पेपर्स. कहानी . कविता. लेख प्रकाशित आकाशवाणी में पिछले 9 वर्षों से सतत कविता, कहानियॉं का प्रसारण . दूरदर्शन पर संचालन. पिछले 22 वर्षों से निजी महाविद्यालय में प्राध्यापक एवं प्राचार्य ।

सम्मान -

1. पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी शिलांग (मेघालय) द्वारा साहित्यक अवदान पर “महाराज कृष्ण जैन स्मृति सम्मान “

2. उद्गार मंच द्वारा लघु कथा “साँझ बेला” को सर्वश्रेष्ठ कथा पुरस्कार |

3. वनिका पब्लिकेशन (गागर में सागर) मंच द्वारा लघुकथा “अधूरा सच” को सर्वश्रेष्ठ कथा का पुरस्कार

4. उद्गार मंच द्वारा कविता “एक पाति प्रधानमंत्री के नाम ” को उत्कृष्ट कविता पुरस्कार |

5. प्रतिलिपि द्वारा आयोजित कहानी प्रतियोगिता में कहानी “ हादसा” को द्वितीय पुरस्कार |

6. लघुकथा “मैं ही कृष्ण हूँ” को वनिका पब्लिकेशन एवं नव लेखन मंच द्वारा श्रेष्ठ लघुकथा

7. मध्यप्रदेश लेखिका संघ भोपाल द्वारा कृति ‘पयोधि होजाने का अर्थ’ को श्रीमती सुषमा तिवारी सम्मान |

8. विश्व मैत्री मंच द्वारा गुजरात यूनिवर्सिटी अहमदाबाद में , कृति तू पार्थ बन’ को ‘राधा अवधेश स्मृति सम्मान |

9. छत्तीसगढ़ साहित्य मंडल रायपुर द्वारा साहित्यिक अवदान हेतु ‘ प्रेमचंद साहित्य सम्मान

10. " साहित्य रत्न" मॉरीशस हिंदी साहित्य अकादमी ।

11. "श्रीमती सुशीला देवी भार्गव सम्मान " हरप्रसाद शोध संस्थान आगरा।

12. " कमलेश्वर स्मृति सम्मान" कथा बिंब मुम्बई।

13. "श्रीमती सुमन चतुर्वेदी श्रेष्ठ साधना पुरस्कार  " अखिल भारतीय भाषा परिषद भोपाल।

14. "श्रीमती मथुरा देवी सम्मान " सन्त बलि शोध संस्थान उज्जैन।

15. "तुलसी सम्मान " तुलसी मांस संस्थान भोपाल।

16. "डा उमा गौतम सम्मान" बालकल्याण शोध संस्थान भोपाल।

17. "कौशल्या गांधी पुरस्कार  " समीर पत्रिका भोपाल।

18. "विवेकानंद सम्मान" विपिन जोशी मंच इटारसी।

19. " शिक्षा रश्मि सम्मान" ग्रोवर मंच होशंगाबाद ।

20. "प्रतिभा सम्मान " अग्रवाल महा सभा भोपाल।

21. "माहेश्वरी सम्मान " कला मंदिर परिषद भोपाल।

22. "सारस्वत सम्मान " समानांतर साहित्य संस्थान आगरा।

23. "स्वर्ण पदक " राष्ट्रिय समता मंच दिल्ली।

24. " मनस्वी सम्मान" हिंदी साहित्य सभा आगरा।

25. अन्य की सम्मान एवं प्रशस्ति पत्र।

निवास - 73 यश बिला भवानी धाम फेस  - 1 , नरेला शन्करी . भोपाल - 462041

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