हास्य-व्यंग्य : यहां वहां की // पत्नी पीड़ित संघ का विमर्श // दिनेश बैस // प्राची - फरवरी 2018

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रेलवे ने अपने कर्मचारियों की पदोन्नति फिटनेस टेस्ट लेकर करने का निर्णय लिया बताते हैं। कर्मचारी पक्ष का कहना है कि यह पदोन्नति किये बिना, वेतन बढ़ाये बिना कर्मचारियों से काम लेते रहने का षड्यंत्र है। जैसे गऊ माता से केवल दूध तथा वोट लेने का काम किया जाता है। शेष उन्हें प्लास्टिक की पन्नी खा कर जीवन यापन करने के लिये घूरे को समर्पित कर दिया जाता है। क्योंकि फिटनेस टेस्ट हो या न हो, पदोन्नति हो या न हो, वेतन बढ़े या न बढ़े उनसे काम तो वही लिया जाना है। कुछ ऐसा कि हर्र लगे न फिटकिरी, रंग चोखो चढ़ जाये।

बहरहाल रेलवे के निर्णय से प्रेरणा गृहण कर, पत्नी समुदाय को भी लगा कि बात में दम है। रेलवे कर्मचारियों का फिटनेस टेस्ट ले सकती है तो हम पत्नियां अपने पतियों की फिटनेस पर अनंतकाल तक भरोसा क्यों करें। हमें भी समय-समय पर उनकी फिटनेस की जांच परख करते रहना चाहिये। इससे दो लाभ होंगे। एक तो हमें उनकी क्षमता का स्तर समझ में आता रहेगा। दूसरे, परीक्षा में अयोग्य सिद्ध हो जाने के भय से वे स्वयं को निरंतर फिट रखने का प्रयास करते रहेंगे। एक तीसरा लाभ यह होगा कि फिटनेस टेस्ट में फेल कर देने के बहाने उन पर लगाम कसी रखी जा सकेगी। उनकी अवश्य पूंछ हमारी कृपा पाने की याचना में सदैव हिलती रहेगी। मतलब इसी में समझदारी है कि मियां जी के आगे फिटनेस की गाजर लटका दी जाये। ज्यों ज्यों वे गाजर खाने के लिये आगे-आगे बढ़ेंगे, गाजर भी आगे बढ़ती रहेगी।

यह युग जनक्रांति को छोड़ कर हरेक प्रकार की क्रांति का है। संचार क्रांति भी उन्हीं में से एक है। पत्नी समुदाय के इस निर्णय की खबर पति प्रजाति तक पहुंचने में देर नहीं लगी। इस समाचार से उनमें भय की लहर दौड़ गई। उन्होंने ‘पत्नी पीड़ित संघ’ की एक आपात् बैठक तुरंत आयोजित कर ली।

बैठक में आये संघ के (अ)सम्मानित सद्स्यों के हलकों में दो-चार घूंट अब तक पहुंच चुकी थी। हालांकि यह बैठक के एजंडा में शामिल नहीं था। इसलिये कुछ रास्ते में ही मूड बना कर बैठक में आये थे। यहां बैठक के प्रारम्भिक शिष्टाचार कार्यक्रम में प्राप्त कच्ची ने उन्हें अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान करने का ही कार्य किया था। उनका मनोबल कुछ और अधिक उछाल पर आ गया था। इस प्रकार बैठक का वातावरण मूल विषय पर विचार-विमर्श करने के अनुकूल बन गया था। अनुकूल बोले तो उनमें इतने साहस का संचार हो चुका था कि वे निज पत्नी के सम्बंध में खुल कर बोल सकें। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार का भय उन्हें न सताये। वह भी बोल सकें जो पत्नी जी की उपस्थिति में कितने भी साहस के बावजूद नहीं बोल पाते थे। लाख प्रयत्न करने के बावजूद मनोबल का गुब्बारा ट्रक के पुराने ट्यूब की तरह तेजी से लीक होने लगता था।

दांतों से मुक्ति पा चुके, मरघट की दिशा में अग्रसर पोपले जी ने मेज पर जोर से हाथ पटका- हे ऊपर वाले, यह दिन भी देखने थे कि अब पत्नियां हमारा स्तेमाल रेलवे की तरह करेंगी।

पोपले जी शालीनता का परिचय दीजिये। उन्हीं के हमउम्र लक्कड़मल जी ने उन्हें शालीनता का पाठ पढ़ाया। इतने जोर से हाथ मत पटकिये। आपका हाथ टूट गया तो सरकारी अस्पताल में इलाज हो जायेगा। मेज टूट गई तो उसे फिर से पिटने योग्य बनाने के लिये अपने पैसे खर्च करने होंगे। खैराती अस्पतालों में अभी मेज का इलाज मुफ्त कराने की सुविधा नहीं हुई है।

पोपले जी लक्कड़मल जी को सम्हालते, इससे पहले ही एक प्रश्न उछल कर सामने आ कूदा रेलवे की तरह... क्या मल्लब ताजा-ताजा पत्नी-पति बना सामने बैठा नौ जवान चीख रहा था।

बगल में बैठे मातृ भाषा भक्त ने चखना मुंह में झोंका हाँ, नवयुवक। जैसे रेलवे अपने कर्मचारियों की पदोन्नति हेतु फिटनेस परीक्षण करने का सूत्र ला रही है, ऐसे ही अब समय-समय पर पत्नियां हमारी फिटपना परीक्षण करने की योजना बना रही हैं। उनके नीति आयोग ने यह सुझाव दिया है। लेकिन, तू क्यों चिंता कर रहा है। तू तो अभी फैक्ट्री फ्रैश की तरह है- उसने सांत्वना दी- फिटनेस टेस्ट की आयु प्राप्त होने में पर्याप्त समय लगेगा। संकट तो हम जैसों का है जो पत्नी पालने के दण्ड की आधी से अधिक अवधि काट चुके हैं। आगे के दण्ड की अवधि फिटनेस परीक्षण के आधार पर पत्नियां तय करेंगी कि मार दिया जाय या छोड़ दिया जाय।

एक और जिन्हें अखबार वगैरह पढ़ने की फालतू की आदत नहीं थी, ने कुल्हड़ को आखिरी बार सुड़का- भाइयों और बहनों, फिटनेस और कैसे जांची जायगी। हमें तो शादी करने का ऐसा सदमा लगा कि शाम को घर पहुंचते ही फिट हो जाते हैं। बस, खटिया पर गिरना ही बाकी रह जाता है। यह किस्मत पर है कि खटिया पर गिरें या उसके नीचे।

-अबे ओये कालिये, होश में बात कर। इतनी भी नहीं हुई है कि इस जगह का अटमॉस्फियर न समझ सके। हम यहां रक्षा बंधन मनाने नहीं आये हैं जो तू भाइयों और बहनों के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट कर रहा है। यहां कोई भाई नहीं है। और बहन तो दूर-दूर तक नहीं दिखाई दे रही है। पीछे से आवाज आयी। उस आवाज को एक मत से अनसुनी कर दिया गया। क्योंकि वह विषय से हट कर बात थी।

इतनी देर में एक जेब से, व्यक्तिगत सम्पत्ति निकाल कर आधी से अधिक गटक चुका था। शेष ‘फिर’ के लिये जेब में ठूंस ली थी। उसने आपत्ति दर्ज कराई- झूठ बोल रहा है यह। फिटनेस टेस्ट में फेल हो जायेगा। कायदे से फिट हो जाने पर होश कहां रहता है कि घर पहुंचे या नहीं। यह तो खटिया तक पहुंच जाता है। यह नाइन्साफी है। यह दारू के चरित्र पर संदेह प्रगट करता है। जरूर इसकी फिटनेस में कोई पंक्चर है।

पहला इस पर शर्मिंदगी महसूस करने की तैयारी कर ही रहा था कि एक बीच में टपक पड़ा। बीच में टपकने वाला मुद्दाजीवी व्यक्ति होने के लिये कुख्यात था। एक बार वह ट्रेन के पटरी से उतरने को क्षमा कर सकता था, किंतु मुद्दे से डीरेल होना वह अक्षम्य अपराध मानता था। उसने चेताया- भाइयों, मुद्दे से भटकाइये नहीं। मुद्दे पर आइये। यह बताइये कि पत्नियां हमारी फिटनेस का परीक्षण कैसे करेंगी। हम पतियों का फिटनेस टेस्ट कैसे लिया जायेगा। फिटनेस टेस्ट का पाठ्यक्रम क्या होगा। बात करके देखो। कुछ ले दे कर पास नहीं हुआ जा सकता है क्या। अपनी तो पूरी पढ़ाई ही इसी प्रणाली पर हुई है। शादी में भी बिचौलिये ने तय कर लिया था कि जितना दहेज दिलवायेगा, उसका पांच प्रतिशत कमीशन लेगा।

जुलम तो मेरे साथ होने वाला है- एक ने रुआंसा सा होकर मुद्दे को फिर धचक दिया- मेरी वाली ने अपना बर्थ-डे सेलिब्रेट करने के लिये मायके भर को न्योता दे दिया है। कल आ जायेंगे। आप सब हजरात जानते हैं कि ऐसी आपातकालीन स्थिति में ‘सारी दुनिया का बोझ हम उठाते हैं’। घर के सब काम हमें ही करने पड़ते हैं। वे तो फुल एनज्वॉय करती हैं सेलिब्रेशन को। ‘यारो, मुझको माफ करना’। अगर कल से कुछ दिनों तक आपका सत्संग प्राप्त करने न आ पाऊं तो। मेरे नाम की दो-दो बूंद कुल्हड़ से छलका देना.

उसके इस पीड़ादायी कथन से बैठक का वातावरण शोक-सभा जैसा हो गया। बोझिल हो गया। आगे विमर्श करके किसी निष्कर्ष पहुंच पाने की मानसिकता में कोई भी नहीं बचा था। इसलिये सबने पूंर्ण आस्था के साथ स्मरण किया ‘कथा विसर्जन होत है’। और जो जन जहां से आये थे, सो तहं प्रयाण कर गये।

संपर्क : 3- गुरूद्वारा, नगरा, झांसी-284 003

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