लघुकथा // सहानुभूति // राजेंद्र निशेश // प्राची - फरवरी 2018

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वह शहर के सब से अधिक भीड़-भाड़ वाले बाजार में घूम रहा था. अचानक उसने देखा कि एक शॉप के बाहर मीठे दूध की खाली बोतलों का एक क्रेट पड़ा है और तीन-चार छोटे-छोटे बच्चे, जिन्होंने चिथड़े-नुमा कपड़े पहन रखे थे, दुकानदार की आंख बचाकर खाली बोतलों में से लोगों का बचा-खुचा दूध एक बोतल में इकट्ठा करते और आपस में झीना-झपटी करते हुए उसे पी जाते. यह सब देखकर उसका मन खराब होने लगा और वह मन ही मन व्यवस्था को गालियां देने लगा. इसी बीच उसे लगा कि उसका अपना हलक सूख रहा है. उसने उसी शॉप से एक मीठे दूध की बोतल खरीदी और गटगट पीने लगा. फिर बोतल में थोड़ा सा दूध छोड़कर आगे बढ़ गया.

सम्पर्कः 2698, सेक्टर-40 सी

चंडीगढ़-160036

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