लघुकथा : मनहूस कौन? // राकेश भ्रमर // प्राची - फरवरी 2018

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मैं पैदल कुछ सोचता हुआ जा रहा था. अचानक मैंने देखा मेरे आगे से एक बिल्ली रास्ता काट गयी. यह देखने के बाद भी मैं नहीं रुका, परन्तु मैंने देखा कि मेरे पीछे से आने वाली एक कार साइड में रुक गयी. शायद उसे वही रुकना था, सोचकर मैं आगे बढ़ गया और बिल्ली के रास्ता काटने की जगह को पार कर गया.

इसके तुरन्त बाद मैंने अपने पीछे किसी कार के चीखकर रुकने की आवाज सुनी. मैंने मुड़कर देखा, वही कार जो मेरे प्ीछे रुक गयी थी, अचानक कुछ और आगे आकर खड़ी हो गयी थी. कारवाला नीचे उतरकर पहियों के नीचे कुछ देख रहा था. कार के नीचे कोई आ गया था.

मैं तुरन्त कुछ समझ नहीं पाया कि क्या हुआ था. लौटकर पीछे आया और पूछा तो पता चला, जब मैं बिल्ली के रास्ता काटने की जगह पार कर गया तो उसी कारवाले ने फिर से अपनी कार को आगे बढ़ाया, परन्तु पता नहीं कहां से वही बिल्ली फिर से लौटकर रास्ता पार करने लगी. कारवाला तेजी में था और उसकी समझ में नहीं आया- क्या करे? उसके ब्रेक लगाते-लगाते बिल्ली उसकी कार के पहिये के नीचे आकर मर गयी थी.

मेरी समझ में नहीं आ रहा था-मैं किसे मनहूस कहूं?

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