संस्मरण लेखन पुरस्कार आयोजन - प्रविष्टि क्र. 76 : आध्यात्मिकता का ढोंग // डॉ. संगीता गांधी

प्रविष्टि क्र. 76
आध्यात्मिकता का ढोंग

डॉ. संगीता गांधी

भारत की चेतना सदैव आध्यात्मिक रही है । मैं स्वयं भी बहुत आध्यात्मिक हूँ पर उस अर्थ में नहीं जिस अर्थ में आध्यात्मिकता का सामान्य अर्थ लिया जाता है । कर्मकांड , बाबाओं , गुरुओं के पास जाना -- ये सब मेरी आध्यात्मिकता के खांचे में फिट नहीं होता|
विवाह के पश्चात मेरा सामना एक ढोंगी बाबा की आध्यात्मिकता से हुआ , उसी सन्दर्भ में ये संस्मरण है । मेरा परिवार एक बाबा जी का बहुत बड़ा भक्त था । मुझसे भी अपेक्षा रखी गयी की उन्हें आराध्य मानूँ । पति मुझे उनके आश्रम लेकर गए । ट्रेन से उतर कर हमने आश्रम जाने के लिए टैक्सी की । रास्ते में टैक्सी वाले ने ही बाबा जी की पोल खोलनी शुरू की -किस प्रकार बाबा के आदमी लोगों की जमीनों पर कब्ज़ा करते है ।कोई आराम से मान जाये तो ठीक , नहीं धोखा , गुंडागर्दी सभी तिकड़म लगायी जाती है । मैंने पति की ओर देखा ,उनका विश्वास अब भी अडिग था।
आश्रम पहुंचे । वहां बाबा जी का सत्संग चल रहा था। बाबा जी प्रवचन दे रहे थे --जीवन नश्वर है , मृत्यु का समय निश्चित है , भौतिक पदार्थों का मोह त्याग दो ,शरीर तो एक दिन नष्ट हो जाना है ।
आदि आदि । सत्संग के बाद बाबा जी ने भक्तों के प्रश्नों के उतर दिए । जयजयकार हुई ।
बाबा जी उठे । उनके दोनों और दो - दो ब्लैक कैट कमांडो थे । पूरी सुरक्षा । बुलेट प्रूफ विदेशी गाड़ी आयी और बाबा जी ने अपने आलीशान बंगले की ओर प्रस्थान किया । वो बंगला सारी भौतिक वस्तुओं ,सुविधाओं से लैस था । आश्रम से कुछ दूर था ।
अगले दिन फिर सत्संग हुआ । वही पहले दिन वाले प्रवचन की बातें दुहरायी गईं । सत्संग के बाद प्रश्न पूछने की बारी आयी । मैँ निश्चय कर चुकी थी --आज बाबा जी को निरुत्तर करना है ।
मैंने कहा :”बाबा जी , आप कहते हो -- जीवन नश्वर है , मृत्यु अटल है , भौतिक वस्तुओं का त्याग करो , शरीर तो नष्ट हो जाना है आदि आदि| फिर आपकी मृत्यु भी तो अटल है ! आपको ये कमांडो सुरक्षा क्यों चाहिए , आलीशान बंगले की भौतिकता क्यों चाहिए ? , जीवन नश्वर है ! तो फिर ये बुलेट प्रूफ गाड़ी क्यों ? किसका डर है आपको ?"
बाबा जी बगलें झांक रहे थे । उनके भक्त मुझे घूर रहे थे । मैंने पति की ओर देखा । हम उठे और वापिस आ गए । मेरा परिवार ढोंगी बाबा की आध्यात्मिकता के ढोंग से मुक्त हो चुका था ।
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Dr Sangeeta gandhi.

Email rozybeta@gmail.com

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