संस्मरण लेखन पुरस्कार आयोजन - प्रविष्टि क्र. 93 : आत्मविश्वास // रवि भुजंग

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------


एक संस्मरण लगभग तीन से चार वर्ष पूर्व घटा था।

नाट्य कला से जुड़े होने के नाते हम दो मित्र मध्यप्रदेश के भोपाल में स्थित भारत भवन में एक नाटक देखने आए थे। नाटक शुरू होने में कुछ समय शेष था, हम ऑडिटोरियम के बाहर सीढ़ियों पर बैठकर इंतज़ार करने लगे। उसी क्षण एक बाल कलाकार दौड़ती हुई सीढियां उतर रहीं थी, उसके पीछे उसकी माँ चली आ रही थी।

माँ ने चिंता जताते हुए उसे आवाज़ लगाई "धीरे उतरो तुम गिर जाओगी" उस क्षण उस मासूम बच्ची ने जो जवाब दिया था वो अब तक ज़ेहन में कुछ करने की, कुछ बनने की, प्रेरणा बना हुआ है। उस बच्ची ने कहा था "मैं कभी नहीं गिरती" उस मासूम को जब खुदपर इतना यकीन था, तो हम बड़ो को क्यों नहीं होना चाहिए। इन वाक्यों के कानों में पड़ने के बाद मैंने अपनी पहली अधूरी क़िताब को पूरा कर प्रकाशित करवाया था।

मुझमें एक आत्मविश्वास पैदा हो चुका था। जो अब तक है।

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

0 टिप्पणी "संस्मरण लेखन पुरस्कार आयोजन - प्रविष्टि क्र. 93 : आत्मविश्वास // रवि भुजंग"

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.