लघुकथा // नाविक // राजेश माहेश्वरी

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नर्मदा नदी के किनारे राजन नाम का एक कुशल गोताखोर एवं नाविक रहता था। उसने कई लोगों की जानें बचाई थी। वह एक ईमानदार एवं स्पष्टवादी व्यक्ति था,उसने लालच में आकर कभी अपनी नौका में क्षमता से अधिक सवारी नहीं बैठाई, कभी किसी से तय भाड़े से अधिक राशि नहीं ली।

एक बार नेताजी अपने समर्थकों के साथ नदी के दूसरे ओर जाने के लिए राजन के पास आए। नेताजी के साथ उनके समर्थकों की संख्या नाव की क्षमता से अधिक थी। राजन ने उनसे निवेदन किया कि वह उन्हें दो चक्करों में पार करा देगा। लेकिन नेताजी सबको साथ ले जाने पर अड़ गए। जब राजन इसके लिए तैयार नहीं हुआ तो नेताजी, एक दूसरे नाविक के पास चले गए। नेताजी के रौब और पैसे के आगे वह नाविक राजी हो गया और उन्हें नाव पर बैठाकर पार कराने के लिए चल दिया।

राजन अनुभवी था। उसने आगे होनेवाली दुर्घटना को भाँप लिया। उसने अपने गोताखोर साथियों को बुलाया और कहा- हवा तेज चल रही है और उसने नाव पर अधिक लोगों को बैठा लिया है। इसलिए तुम लोग भी मेरी नाव में आ जाओ। हम उसकी नाव से एक निश्चित दूरी बनाकर चलेंगे। वह अपनी नाव को उस नाव से एक निश्चित दूरी बनाकर चलाने लगा।

उसके साथियों में से किसी ने यह कहा कि हम लोग क्यों इनके पीछे चलें। नेताजी तो बड़ी पहुँच वाले आदमी हैं, उनके लिए तो फौरन ही सरकारी सहायता आ जाएगी। राजन ने उन्हें समझाया कि उनकी सहायता जब तक आएगी तब तक तो सब कुछ खत्म हो जाएगा। हम सब नर्मदा मैया के भक्त हैं, हमें अपना धर्म निभाना चाहिये। उसकी बातों से प्रभावित उसके साथी उसके साथ चलते रहे।

जैसी उसकी आशंका थी, वही हुआ। तेज बहाव में पहुँचने पर नाव तेज हवा और बहाव के प्रभाव से डगमगाने लगी। हड़बड़ाहट में नेताजी और उनके चमचे सहायता के लिए चिल्लाने लगे और उनमें अफरा-तफरी मच गई। इस स्थिति में वह नाविक संतुलन नहीं रख पाया और नाव पलट गई। सारे यात्री पानी में डूबने और बहने लगे। जिन्हें तैरना आता था वे भी तेज बहाव के कारण तैर नहीं पा रहे थे। राजन और उसके सभी साथी नाव से कूद पड़े और एक-एक को बचाकर राजन की नाव में पहुँचाने लगे, तब तक किनारे के दूसरे नाव वाले भी आ गए। सभी का जीवन बचा लिया गया।

पैसे और पद के अहंकार में जो नेताजी सीधे मुँह बात नहीं कर रहे थे अब उनकी घिग्घी बँधी हुई थी। अपनी खिसियाहट मिटाने के लिए उन्होंने राजन और उनके साथियों को ईनाम में पैसे देने चाहे तो राजन ने यह कहकर मना कर दिया कि हमें जो देना है वह हमारा भगवान देता है। हम तो अपनी मेहनत का कमाते हैं और सुख की नींद सोते हैं। आपको बचाकर हमने अपना कर्तव्य पूरा किया है इसका जो भी ईनाम देना होगा वो हमें नर्मदा मैया देंगी।


परिचय

राजेश माहेश्वरी का जन्म मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर में 31 जुलाई 1954 को हुआ था। उनके द्वारा लिखित क्षितिज, जीवन कैसा हो व मंथन कविता संग्रह, रात के ग्यारह बजे एवं रात ग्यारह बजे के बाद ( उपन्यास ), परिवर्तन, वे बहत्तर घंटे, हम कैसें आगे बढ़े एवं प्रेरणा पथ कहानी संग्रह तथा पथ उद्योग से संबंधित विषयों पर किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं।

वे परफेक्ट उद्योग समूह, साऊथ एवेन्यु मॉल एवं मल्टीप्लेक्स, सेठ मन्नूलाल जगन्नाथ दास चेरिटिबल हास्पिटल ट्रस्ट में डायरेक्टर हैं। आप जबलपुर चेम्बर ऑफ कामर्स एवं इंडस्ट्रीस् के पूर्व चेयरमेन एवं एलायंस क्लब इंटरनेशनल के अंतर्राष्ट्रीय संयोजक के पद पर भी रहे हैं। लेखक को पाथेय सृजन सम्मान एवं जबलपुर चेंबर ऑफ कामर्स द्वारा साहित्य सृजन हेतु लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

आपने अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी, फ्रांस, इंग्लैंड, सिंगापुर, बेल्जियम, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, हांगकांग आदि सहित विभिन्न देशों की यात्राएँ की हैं। वर्तमान में आपका पता 106 नयागांव हाऊसिंग सोसायटी, रामपुर, जबलपुर (म.प्र) है।

प्रकाशित पुस्तकें -

क्षितिज - कविता संग्रह - प्रकाशक - जबलपुर चेम्बर ऑफ कामर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज।

जीवन कैसा हो, मन्थन - कविता संग्रह - प्रकाशक - राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली।

परिवर्तन, वे बहत्तर घण्टे - कहानी संग्रह - प्रकाशक - राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली।

रात के 11 बजे - उपन्यास - प्रकाशक - राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली।

पथ - लघु उपन्यास - प्रकाशक - राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली।

हम कैसे आगे बढ़े - कहानी संग्रह - प्रकाशक - पी∙एम∙ पब्लिकेशन, नई दिल्ली।

प्रेरणा पथ - कहानी संग्रह - प्रकाशक - पी∙एम∙ पब्लिकेशन, नई दिल्ली।

रात 11 बजे के बाद - उपन्यास - प्रकाशक - पी∙एम∙ पब्लिकेशन, नई दिल्ली।

जीवन को सफल नही सार्थक बनाए - प्रकाशक - कहानी संग्रह - प्रकाशक - ग्रंथ अकादमी , नई दिल्ली ।

92 गर्लफ्रेन्ड्स - उपन्यास - इंद्रा पब्लिकेशन, भोपाल।

संपर्क -

RAJESH MAHESHWARI

106, NAYAGAON CO-OPERATIVE

HOUSING SOCIETY, RAMPUR,

JABALPUR, 482008 [ M.P.]

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