व्यंग्यात्मक कहानी - - - "पति की प्रतिमा" // जय प्रकाश पाण्डेय

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             विरोध करने की उनकी जन्मजात आदत थी तो हर बात में विरोध करने में उनको संकोच नहीं होता था। वे निंदा करते समय बड़ी सतर्कता से निंदा करते थे, उनका मानना था कि आपला मानुष ज्यादा विश्वासपात्र होता है और निंदा करने की प्रेक्टिस वहीं से की थी। अपने वार्ड के पार्षद के आगे पीछे घूम घूम कर और पूंछ हिलाने की प्रेक्टिस करके उन्होंने अपने आपको नेतागिरी लायक बना लिया था और अपने पार्षद के विश्वासपात्र बन गए थे पार्षद ने पेंट पहनना भी सिखा दिया था और परेड करना भी।

जनता की सेवा के चक्कर में नेताओं का दिल कमजोर हो जाता है एक दिन पार्षद जी का हार्ट फट गया राम जी को प्यारे हो गए, और इनको पार्षद की टिकिट मिल गई और धोखे से जीत भी गये। राम मंदिर के लिए ईंट लेकर अयोध्या गये वहां पिट गये इज्जत बचाने शहर लौटे तो अखबार में फोटो - ओटो छपवाकर अयोध्या रिटर्न कहलाने लगे। सुबह शाम चौराहे में खड़े होने लगे सबसे नमस्ते करने लगे। अपनी पार्टी के लोगों को छुड़ाने थाने भी जाने लगे। पार्टी में सक्रिय नेता के रूप में पहचान सी होने लगी, विधायक प्रतिनिधि बनकर विधायक की सीडी वायरल करा दी फिर विधायक भी बन गये। सांसद बनने के चक्कर में राजधानी दौड़ने लगे आपला मानुष की तलाश में राजधानी में दिल दे बैठे हार्ट ने साथ नहीं दिया, चल दिए। राम राम सत्य हो गया।


           मरे तो उनकी घरवाली को टिकट मिल गई, घरवाली सुंदर थी बड़े नेताओं की नजर लग गई खबर राजधानी तक गई तो चुनाव जीतकर शहर की महापौर की कुर्सी में बैठ गईं। बन-ठन के सड़क पे निकलतीं तो सड़क के गढ्ढे सकुचाते, विकास के होर्डिंग मुस्कराते, राम मंदिर के पुजारी बादाम खाके दण्ड पेलते, मैडम रामभक्त थीं सो सुबह शाम राममंदिर के राम जी को बाहर से सलाम करतीं, पुजारी जी उनको देख कर बादाम और भांग का शर्बत पीने लगते...... पहले वाली बात अलग थी तब मैडम के पास समय रहता था। पुजारी जी के साथ एक बार अयोध्या गईं थीं राम मंदिर जहां बनेगा वो जगह देखने। पुजारी जी सुबह सुबह मंदिर के पीछे दण्ड पेलते थे उसी समय मैडम कार से गुजरतीं। एक दिन अकेले में पुजारी जी ने मैडम को पकड़ लिया कहने लगे अगले चौराहे में अपने नेता जी की प्रतिमा लगनी चाहिए तुम महापौर हो और तुम्हारे पति ने जनता की सेवा की थी तो उनकी मूर्ति तो लगना ही चाहिए। मैडम को पुजारी की बात में वजन लगा शहर भर में मांग उठने लगी। प्रस्ताव पारित हो गया उनके पति की मूर्ति चौराहे में लगाने की मांग उन्होंने मान ली। सर्वे हुआ पता चला उस चौराहे में पचासों साल से राम सीता और देवी की मूर्तियां पहले से विराजमान थीं, मैडम ने अकेले में पुजारी से सलाह मशविरा किया, चुपके-चुपके बात हो गई।


            मैडम ने स्वच्छता अभियान चलाया सफाई के बहाने चौराहे की मूर्तियों का जायजा लिया, सामने के मंदिर के हनुमानजी चुपके-चुपके सब देखते रहे। एक हफ्ते बाद राम सीता और देवी की मूर्तियां चोरी चलीं गईं, पुलिस मुस्तैदी से तलाश करने लगी जब तक जयपुर से नेता जी की संगमरमर की प्रतिमा शहर पहुंच चुकी थी पुलिस उसकी व्यवस्था में बैचैन हो गई। मूर्ति अनावरण के लिए मंत्री जी आये मैडम के घर में ही रुक गये रात भर नेता जी की चर्चा चलती रही। सुबह प्रतिमा का अनावरण हो गया मंत्री जी ने नेता जी को महान बताया राम मंदिर निर्माण का माहौल बनाने और जनता की सेवा करने वाला मसीहा बताया, मैडम माईक में रो पड़ीं...

माहौल गमगीन हो गया पुजारी जी ने नारा लगाया "मंदिर वहीं बनाएंगे" अनावरण पट्टिका में काले अक्षरों से नाम लग गये फिर मंहगी कार में मंत्री जी के साथ मैडम "मंदिर वहीं बनाएंगे"  वाली रैली में भाग लेने रवाना हो गईं.... चौराहे के बाजू के हनुमान मंदिर में अखण्ड हनुमान चालीसा का पाठ चालू हो गया था ।
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जय प्रकाश पाण्डेय
416 - एच, जय नगर जबलपुर

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