प्रेरणा पुरुष उर्फ़ विकास पुरुष( हास्य व्यंग्य) // डॉ. अनीता यादव

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परिवर्तन प्रकृति का नियम हैं। आखिर क्या परिवर्तित नहीं होता? प्रेमी,पत्नी,नौकरी,नियम,न्याय आदि सभी तो परिवर्तन-प्रेमी हैं। हो भी क्यों न! यही तो विकास और उन्नति, प्रगति का रास्ता हैं। फिर जब कोई नेता दल-बदल जैसी बेहतरीन प्रक्रिया से गुजरने की जरा सी कोशिश भर करता हैं तो ये आम सी जनता इतनी सचमच क्यों करती हैं? ये मुझे आज तक समझ नहीं आया! क्या उस निरीह प्राणी को अपना विकास करने का अधिकार नहीं ?जब आम और खास के विकास का ठेका वह वोट के आधार पर ग्रहण कर लेता हैं तो फिर छोटे-मोटे विकास पर उसका भी तो हक बनता हैं। इसे क्यों आमोखास मिलकर ‘मेरी गठरी में लागा चोर’ की भांति रियक्ट करते हैं?

अब आप चाहे न समझे पर मैं तो समझती हूँ कि दल बदलने से अन्य विकासों का तो पता नहीं पर ‘भाईचारा’ नामक विकास अत्यंत तीव्रता से पनपता हैं। अगर इस शब्द पर थोड़ी दृष्टि का पात डाले तो हो सकता हैं आपके ज्ञान का भी थोड़ा विकास हो जाये। यह भाईचारा शब्द ‘भाई’ और ‘चारा’ दो शब्दों क योग का परिणाम हैं। 'चारा' यदि व्यक्ति विशेष के साथ जुड़े तो सजा का प्रावधान बनते देर नहीं लगती। कारण स्पष्ट हैं- चूंकि चारा हैं भैंसों के लिए पर यदि उसका भक्षण मानव प्रजाति करेगी तो जेल जाने का रुतबा हासिल करने में उसे कोई माई का लाल नहीं रोक सकता। पर यदि यही लंडूरा ‘चारा’ ‘भाई’ जैसे का सहयोग ले तो ‘भाईचारा’ बड़ी से बड़ी मुसीबत से छुटकारा दिला जाता हैं और अनुभव के आधार पर कहूँ तो जिस भी खाकसार ने इसका पल्लू पकड़ा वह सत्ता नसीन हुये बिना न रहा। ‘इंसान का इंसान से हो भाईचारा यहीं संदेश हमारा’ रूप में फिल्में भी तो यही सिखाती हैं।

आप का तो पता नहीं पर मैं ऐसे महानुभावों के संपर्क में रही हूँ जिन्होंने इस भाईचारे रूपी तुरुप के पत्ते पर मेरे विश्वास को सीमेंट से बनी दीवार की भांति पुख्ता किया। ऐसी ही एक अतृप्त आत्मा से मुझे मिलने के रोज ही कुअवसर मिलते हैं और जब भी मिलती हूँ मैं उनका हाथ जोड़कर भव्य स्वागत करती हूँ। ये मेरे प्रेरणा पात्र हैं। हो सकता हैं आगे आनेवाले समय में मैं उनसे घनघोर रूप से प्रेरित हो राजनीति में ही कूदी न मार दूँ ।उन प्रेरणा पुरुष से परिचय करा दूँ तो आप भी ‘आठों सिद्धि,नवनिधि को सुख’ न पा जाएँ तो कहिएगा। ये महाशय दोनों शब्दों को {भाई+चारा} हमेशा साथ लिए घूमते हैं और जहां भी उन्हें सुविधा दिखती हैं फटाक से जोड़ देते हैं इसलिए फेविकोल भी साथ ही रखते हैं।

पर इनका फेविकोल ‘मजबूत जोड़ हैं, टूटेगा नहीं’ टाइप का कतई नहीं हैं। वे जब भी दूसरी ओर सुविधा देखते हैं तो बिना ‘भड़ाक’ की आवाज किये टूटकर दूसरी ओर जुड़ने में कोताही नहीं बरतते। पहली मुलाक़ात में मैंने उन्हें देखा तो वे केवल अपने हाथ के पंजे को ही निहारते रहते थे। आशीर्वाद में उठा हाथ उनका फेवरिट हुआ करता था। उन कामों को वे सरंजाम देने से गुरेज नहीं करते थे जो उनके गाल को ‘पंजा छाप कार्यक्रम’ सम्पन्न कराता रहे। मेरी उनसे दूसरी मुलाक़ात तक उन्हें बदलाव का कीड़ा काट चुका था। अब उनका वह ‘पंजा प्रेम’ परहित में परिवर्तित हो संवेदना से लबरेज आम आदमी का हो चुका था। कितनी ही गर्मी रही पर उन्होंने सिर से टोपी नहीं उतारी पर उनकी हरकतों से टोपी ने अपने को खुद ही उतार लिया। गिरगिट से प्रेरित उस महान आत्मा ने पुनः नई नाव की पतवार थाम ‘चरण कमल बंदो हरिराई’ गाते हुए जुत्ती सहित कोमल कमल को कुचलने चढ़ बैठे।

आजकल उनका सौंदर्य प्रेम चरम पर हैं। इस रूप में वे अब चरम पंथी कहाते हैं। आजकल महाशय विकासशील नहीं बल्कि विकसित देश माफिक व्यवहार कर रहे हैं। ये देख कर कोई अंधा भी कह सकता हैं कि उन्होंने अब अपना पूर्ण विकास कर लिया हैं। अब वे पूरी तरह से सवा करोड़ भारतीयों के प्रेरणा पुरुष हैं। मेरी भारतवासियों से गुजारिश हैं कि उन्हे ‘दल बदलू’ कह कर उनके शहराती काइयांपन की तौहीन न करें। भारत को आज अमेरिका की ओर नहीं बल्कि इन कर्णधार महाशय की ओर दृष्टि रखनी होगी ताकि भारत को विकासशील से विकसित बनाया जा सके वह भी स्वदेसी पात्र के माध्यम से ताकि ऊपर से देखती गांधी की चोटिल आत्मा को कुछ तो शांति मिल पाये। उम्मीद हैं मेरे साथ साथ- 'इस देसी की फैन ये दुनिया होवेगी'।

अनिता यादव

संक्षिप्त परिचय –

डॉ अनीता यादव

आधा-दर्जन से अधिक पुस्तकों का सम्पादन

विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं- जनसत्ता समाचार पत्र,नव-भारत टाइम्स समाचार पत्र,युद्धरत आम आदमी पत्रिका, आधुनिक साहित्य पत्रिका , सरस्वती सुमन पत्रिका,सहचर-ई पत्रिका,जन-कृति ई पत्रिका,जनसत्ता दैनिक समाचार पत्र ,समज्ञा दैनिक समाचार पत्र [कोलकाता] कालवाड़ टाइम्स{जयपुर}आदि में- व्यंग्य, कहानियाँ तथा लेख प्रकाशित ।

पिछले ग्यारह वर्षो से दिल्ली-विश्वविद्यालय [गार्गी महविद्यालय,हिन्दी विभाग] में स्थायी रूप से प्राध्यापक पद पर कार्यरत।


पता- 6/10, third floor, indra vikas colony, mukherji nagar, delhi-110009

मेल- dr.anitayadav@yahoo.com

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