युवावस्था में मिले सबक जिन्होंने मुझे मज़बूत बनाया // निशांत मिश्र

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मैं अक्सर ही अपने अतीत के जीवन को याद करता हूं और अपनी युवावस्था के अनुभवों से मिले सबक मुझे उन अच्छे-बुरे दिनों की याद दिलाते हैं जिन्होंने मेरे व्यक्तित्व और चरित्र का निर्माण किया. काश मैं किसी टाइम-मशीन में बैठकर बीस साल पीछे जा सकता और जवानी में कदम रखते अपने प्रतिरूप को कुछ सलाह और चेतावनियां दे पाता! लेकिन आज मैं अपने जीवन से खुश हूं और यह मानता हूं कि जो होता है अच्छे के लिए होता है.

अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने भी दूसरे नौजवानों की तरह नौकरी खोजने की जद्दोजहद की. मुझे कई तरह के काम करने के मौके मिले. मैं जिस तरह का व्यक्ति था उसे देखते हुए कई काम चुनौतियों से भरे थे. मैं अकादमिक टाइप का लड़का था जो पढ़ने-पढ़ाने में रूचि लेता था लेकिन मैंने छोटे कस्बों और दूसरे शहर में रहकर मार्केटिंग की, प्रेस में काम किया, घर-घर जाकर ट्यूशन दी, कॉलेज में पार्ट-टाइम पढ़ाया, और भी बहुत कुछ मैंने करके देखा. इन बीस वर्षों में दुनिया और मैं खुद बहुत बदल चुका हूं. अब मैं पब्लिक सेक्टर में फुल-टाइम काम करता हूं और जब मैं छोटे बच्चों अपने कैरियर के बारे में गंभीरता से सोचते देखता हूं तो मुझे बहुत खुशी होती है कि किशोरवय युवक-युवतियां अपने कैरियर के विकल्पों के बारे में बहुत जानकारी रखते हैं. वे अपने माता-पिता की इच्छाओं को ही नहीं बल्कि अपने सपनों को पूरा करने के लिए भी मेहनत करने के लिए तैयार और दृढ़-निश्चयी हैं.

मैं कैरियर से संबंधित सलाह मांगनेवाले हर नवयुवक से कहना चाहता हूं कि वह ज़िंदगी से मुझे मिले इन सबक से प्रेरणा लेते हुए आगे बढ़े. स्थाई नौकरी में आने से पहले लगभग 10 साल के दौरान मेरी ज़िंदगी ने मुझे जो कुछ भी सिखाया वह हर उस व्यक्ति के काम आ सकता है जो सफलता, समृद्धि, संतुष्टि और परफ़ेक्शन की कामना करता है. ये हैं वे सबकः

1. ज़िंदगी कभी भी तय प्लान के हिसाब से नहीं चलती

इसे ज़िंदगी की खूबसूरती कह लें या विसंगति, ज़िंदगी अपने यूनिवर्सल पैटर्न पर चलती है. वह हमारी परवाह नहीं करती. जब हम बड़े हो रहे होते हैं तो यह उम्मीद करते हैं कि ज़िंदगी में चीज़ें हमारे मुताबिक हों लेकिन ऐसा बहुत कम ही होता है.  ऐसे में अनासक्ति के नियम के अनुसार चलने वालों को निराशा नहीं होती. यह नियम कहता है कि व्यक्ति को उस दिशा में जाना चाहिए जहां जीवन ले जा रहा हो और अपना कर्म करते रहना चाहिए. वह काम करते रहना चाहिए जो सही है.


आगे पूरा आलेख यहाँ पढ़ें - https://hindizen.com/2018/03/05/strong-lessons-that-shaped-my-life/

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1 टिप्पणी "युवावस्था में मिले सबक जिन्होंने मुझे मज़बूत बनाया // निशांत मिश्र"

  1. इसे यहां शेयर करने का बहुत-बहुत धन्यवाद.

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