संस्मरण लेखन पुरस्कार आयोजन - प्रविष्टि क्र. 116 : परियों का देश ---डिज्नीवर्ल्ड // डॉ .सरस्वती माथुर

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जादुई दुनिया के गलियारे में ----- मोनोरेल


प्रविष्टि क्र. 116

परियों का देश ---डिज्नीवर्ल्ड

डॉ .सरस्वती माथुर


हम लोग इस दिसंबर  में जब अमेरिका पहुँचे तो बच्चों ने पहले से ही डिज्नीलैंड का कार्यक्रम बना रखा था। हमें भी हमेशा से डिज्नीलैंड घूमने की ख़्वाहिश थी ,जो इस साल पूरी हुई। हम बोस्टन से रवाना हुअे। फ़्लाइट बदलने व लंबा सफ़र करने के बाद जब फ़्लोरिडा पहुँचे तो तो थकान के बावजूद सभी ख़ुश व उत्साहित थे। हम एयरपोर्ट से सीधे होटल पहुँचे जो डिज्नीलैंड से बहुत पास था ,हमारा घूमने फिरने का कार्यक्रम दूसरे दिन था। अगले दिन जल्दी नाश्ता करके हमने टैक्सी ली व डिज्नीलैंड पहुँच गये। डिज्नीलैंड एक मनोरंजक पार्क है जहाँ वाल्ट के तमाम कार्टून चरित्र जीते -जागते ,चलते -फिरते नज़र आते हैं और सम्मोहित कर देते हैं।  वाल्ट  डिज़्नी के पात्रों और फ़िल्मों की थीम पर बना यह पार्क इतना बड़ा व विशालकाय है कि एक किनारे से दूसरे किनारे तक जाने के लिये मोनोरेल का सहारा लेना पड़ता है।

बच्चों का मन था कि सबसे पहले सिंडेरेला का महल देखेंगे ,यह पूरे डिज्नीलैंड की शान तो है ही पर जादुई भी है। इतना सुंदर है कि एक बार तो लगता है कि हम सचमुच परीलोक में आ गये हैं। बच्चों के लिये ही नहीं ,हर उम्र के लोगों के लिये इस परिसर में देखने लायक बहुत कुछ है। डिजनीलैंड का निर्माण कहने को तो बच्चों के मनोरंजन के लिये हुआ है पर बड़ों के लिये भी यहाँ कम आकर्षण नहीं है ,यह वहाँ जाने के बाद ही पता चलता है। इसलिये बच्चे चाहते थे कि वह हमारे साथ ही वहाँ जायें और छुट्टियों का आनंद लें।

इतना को हम भी जानते थे कि वाल्ट डिज़्नी अमेरिका के व्यवसायी , कार्टून कलाकार, फ़िल्मों के निर्माता -निर्देशक स्क्रीन प्ले व प्रसिद्ध लेखक थे। जो जानते थे कि बच्चों को कार्टून बहुत पसंद है। बीसवीं सदी के अंतराष्ट्रीय सितारों में उनका नाम बड़े आदर से लिया जाता था। दुर्भाग्यवश फेफड़ों के कैंसर के कारण उनका पैंसठ वर्ष की अल्प आयु में ही निधन हो गया था। उनकी मृत्यु के एक वर्ष के बाद फ़्लोरिडा में डिज्नीलैंड का और विस्तार किया गया। डिज्नीलैंड अपने आप में एक जादुई दुनिया है। यहाँ  की सजावट व प्राकृतिक छँटा देखने लायक है। पूरे इलाक़े को कई भागों में बाँटा गया है और उनके अलग अलग नाम रखे गये हैं -लैंड ऑफ़ मिस्टरी (रहस्य),फैंटसी लैंड,फ्यूचरिस्टिक थीम्स एंड टैक्नोलोजी एंड बिग थंडर माऊंटेन ! दातर थीम परियों की कहानी पर आधारित हैं। डिज़्नी का प्रबंधन करने वाले लोग समय समय पर इनमें परिवर्तन लाते रहते हैं ताकि लोगों को कुछ नया देखने को मिले। यहाँ का प्रेसिडेंटस हाउस तो विस्मित कर देता है। जहाँ पहले राष्ट्रपति से लेकर आख़िरी तक के चलते फिरते मोम के पुतले बनें हैं और जो एक ही मंच पर बैठे हैं। बारी बारी से उठ कर मंच पर माइक लेकर वह भाषण देते हैं तो एक बारगी  तो लगता है कि वह सब जीवित है। इस बीच मंच पर बैठे  राष्ट्रपति के हाव भाव भी आश्चर्यचकित कर देते हैं। कोई डेस्क पर रखा गिलास उठा कर पानी पीता है तो कोई पास वाले प्रोसिडेंट से बात करने के लिये अपनी गरदन उस तरफ़ मोड़ता है। शब्दों में क्या कहें बडेी अजीब सी अनुभूति होती है। अब्राहम लिंकन भी भाषण देने उठते हैं ,पहले गला खंखारते हैं ,फिर माइक एडजस्ट करके बोलना शुरू करते हैं तो लगता है मानों हम उन्हीं के समयकाल  में बैठे हैं!

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बच्चों के प्रिय पात्र डोनल्ड डक

बच्चों के इस रंगीन दुनिया में कई अभिनेता जैसे मिकी माउस ,गूफी आदि आते रहते हैं और सबसे हाथ मिलाते हैं। बच्चों का उन्हें देख कर उत्साह दुगुना हो जाता है। डिज्नीलैंड का एक आकर्षण वहाँ निकलने वाली कार्टून पात्रों की परेड है, जिसमें सारे अभिनेता अपने अपने कार्टून चरित्रों में आते हैं। उसके बाद यहाँ ग़ज़ब  की आतिशबाज़ी होती है। वहाँ का स्टंट शो भी ख़ूब लुभाता है। शो में पहले मोटर साइकिल सवार आते हैं । वो कभी पहिये पर मोटर साइकल चलाते है ,कभी एक पैडल पर ही साइकल का करतब दिखाते हैं। फिर चार पहियों वाली कारें आती है , उसी में जादुई परिवर्तन होते रहते हैं। ये कारें कभी बाज़ार के सीन में बदल जाती हैं। कभी तेज़ रफ़्तार से इधर -उधर घूमती है। लगता है इनमें अब टक्कर हुई पर अग़ल बग़ल से फुर्र से निकल जाती हैं तो जनता की चीखे निकलजाती हैं। हम भी चीखे बिना नहीं रह पाये।

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यहाँ की मनोरंजक राइडस का तो कहना ही क्या। बड़ी ही रोमांचक होती है। यहाँ की हर राइड में रोमांच बसा है। मेरे ग्रैंड किडस का उत्साह देखते ही बनता था ,जब डिज्नीलैंड की सैर करते समय ख़ूबसूरत कार्टून सजीव हो उठते हैं तो बच्चे प्रफुल्लित हो उठते हैं। इन कार्टून से हाथ मिलाते हैं , उनके पास खड़े होकर फ़ोटो खिंचाते हैं !

बच्चों की इस जादुई दुनिया की ज़मीन पर जब रात को रोशनी गिरती है तो वह बेहद ख़ूबसूरत बन जाती है। जगमग जगमग करती पृष्ठभूमि देख लगता है जैसे स्वर्ग में आ गये हों। इसलिये यहाँ ली गयी तस्वीर जादुई दृश्य देती है मानो किसी दूसरी दुनिया की हो। हमने यहाँ महसूस किया कि पूरे वातावरण में वनीला जैसी भीनी भीनी ख़ुशबू आती है। क्रिसमस के समय में इस ख़ुशबू को बदल कर पिपरमिंट जैसी ख़ुशबू कर दी जाती है।

सबसे ज़्यादा आनंद हमें टॉय स्टोरी में आया जिसमें पात्र एंडी के खिलौने एंडी के बाहर जाते ही ज़िंदा हो जाते थे और सुरक्षा के  मद्दे नज़र एंडी को डिज्नीलैंड की जेल में बंद कर दिया जाता है ,यहाँ के कैरेक्टर खिलौनों से एंडी के बारे में पूछने पर वे बताते है कि एंडी स्कूल में है।

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जादुई दुनिया के गलियारे में..


मेरे ग्रैंड किडस को कार्टून देखने का बहुत शौक़ है ,सभी बच्चों को होता है इसलिये इस डिज्नीलैंड में आकर वह उन्हें सजीव रूप में देख कर हतप्रभ व खुश थे। हर पल को एंजॉय कर रहे थे। हम यहाँ बिग थंडर माऊंटेन भी गये जो अच्छे रोलर रोस्टर में गिना जाता है। यह यहाँ के मैजिक किंगडम में था। यहाँ बच्चों ने बहुत मस्ती की। फिर हम टाइम स्क्वायर में घूमें और मंत्रमुग्ध हो गये। मूवी थियेटर से बच्चे निकलना ही नहीं चाह रहे थे। जब हम "एलिस इन वंडरलैंड "में गये तो पता लगा यहाँ बहुत ख़ुफ़िया रास्ते बने हुए  हैं -जगह जगह यहाँ के कर्मचारी खड़े थे उनके हाव भाव व सतर्कता देख कर देख कर सिर चकरा गया था। सच में जब एलिस ख़रगोश का पीछा करते हुए अंदर घुसी होगी तो खो गयी होगी। हम भी इस रोमांचक दुनिया की भुलभलैया में खो गये थे। 'एडवेंचर टाऊन ' में पहुँच कर लगा मानो हम धरती की सभ्यता से दूर चले गये हैं -वहां कहीं गुफाएँ थी कहीं पहाड़ ,कहीं चुडैलों के निवास थे तो कहीं हर देश की गुड़ियाओं के गलियारे सजे थे। वहाँ के जंगल के दृश्य देख कर हमने दाँतो तले उँगली दबा ली थी। डाइनोसौर किस तरह दिखते होंगे यहाँ आकर अनुभव हुआ! डिजनीलैंड में दस दिन में हमने बहुत कुछ देखा पर जब भी कैटालॉग देखते तो यह देख कर आश्चर्य से भर जाते थे कि अभी तो कुछ भी कवर नहीं हुआ है। एक बार में संभव भी नहीं है-फिर आना पड़ेगा कभी !  इस राउंड में तो बस बच्चों के कार्टून पात्रों तक ही ज़्यादा सीमित रहे। वहाँ सी वर्ल्ड भी था पर अब ज़्यादा घूमने की शक्ति नहीं थी। थकान भी स्वाभाविक थी !फिर हम सब को मालूम है कि समय के पंख होते है वो चिड़िया सा से उड़ जाता है। वापस घर लौटने का दिन पास आ गया थे। यह  यात्रा ज्ञानवर्धक व मनोरंजक थी -हमेशा याद रहेगी ! अलविदा डिज़्नीलैंड कहने का मन नहीं था पर कहना पड़ा और भारी मन से अविस्मरणीय स्मृतियों के साथ एयरपोर्ट की ओर बढ़ गये।

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डॉ .सरस्वती माथुर

ए-2, सिविल लाइन्स

जयपुर -6

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