मिनी कथाएं : घर –परिवार –कथाएं –व्यथाएँ // यशवंत कोठारी

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1- स्मार्ट बहू

काम वाली नहीं आई थी, सास ने जल्दी सारा काम निपटा दिया.

कुछ दिनों बाद फिर ऐसा ही हुआ. बहु कार लेकर गई. अपनी सहेली के यहाँ से काम वाली को लाई, काम कराया और वापस कार से छोड़ आई.

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२-संदूक

एक घर में आयकर वालों का छापा पड़ा. अधिकारी ने सब छान मारा . अंत में एक संदूक दिखा , बूढी माँ ने अनुनय की इसे मत खोलो , मगर संदूक खोला गया . उसमें कुछ सूखी रोटियों के टुकड़े थे , जो माँ के रात-बिरात काम आते थे.

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३-त्यौहार

घर में बड़ा त्यौहार . बुआ , बहन, बेटी , सब आई हुयी थीं . विदा के समय बुआ को हल्का लिफाफा, बहन को साड़ी पर लिफाफा, और बेटी के ससुराल के परिवार के लिए कपड़े और लिफाफे दिए गए.

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४-फ़ीस

माँ की मौत के बाद, जवान बेटे ने बाप से कहा- पापा बच्चों की फ़ीस –ट्यूशन के खर्चे बहुत बढ़ गए हैं, अपन ये मका न बेचकर टू बी एच के में शिफ्ट हो जाते हैं, जो बचेगा उस से बच्चे पढ़ लेंगे. बाप का सीधा जवाब था -

मैं यहाँ ठीक हूँ. तुम तुम्हारा देख लो.

बेटा-बहू बाप से नाराज है.

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५-दान

बूढी माँ दान के लिए बेटे से कह रही थी , इस बार कुछ ज्यादा ही खर्च होगा. बेटे ने कोई ध्यान नहीं दिया.

माँ चुप हो गई. बाद में बेटे बहू बच्चे मलेशिया के लिए निकल गए. माँ ताकती रह गयीं.

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यशवंत कोठारी ,८६,लक्ष्मी नगर ब्रह्मपुरी बाहर,जयपुर-३०२००२

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