370010869858007
Loading...

मिनी कथाएं : घर –परिवार –कथाएं –व्यथाएँ // यशवंत कोठारी

1- स्मार्ट बहू

काम वाली नहीं आई थी, सास ने जल्दी सारा काम निपटा दिया.

कुछ दिनों बाद फिर ऐसा ही हुआ. बहु कार लेकर गई. अपनी सहेली के यहाँ से काम वाली को लाई, काम कराया और वापस कार से छोड़ आई.

००००००००००००००००००००

२-संदूक

एक घर में आयकर वालों का छापा पड़ा. अधिकारी ने सब छान मारा . अंत में एक संदूक दिखा , बूढी माँ ने अनुनय की इसे मत खोलो , मगर संदूक खोला गया . उसमें कुछ सूखी रोटियों के टुकड़े थे , जो माँ के रात-बिरात काम आते थे.

००००००००००००००००००००

३-त्यौहार

घर में बड़ा त्यौहार . बुआ , बहन, बेटी , सब आई हुयी थीं . विदा के समय बुआ को हल्का लिफाफा, बहन को साड़ी पर लिफाफा, और बेटी के ससुराल के परिवार के लिए कपड़े और लिफाफे दिए गए.

०००००००००००००००००००००००००००

४-फ़ीस

माँ की मौत के बाद, जवान बेटे ने बाप से कहा- पापा बच्चों की फ़ीस –ट्यूशन के खर्चे बहुत बढ़ गए हैं, अपन ये मका न बेचकर टू बी एच के में शिफ्ट हो जाते हैं, जो बचेगा उस से बच्चे पढ़ लेंगे. बाप का सीधा जवाब था -

मैं यहाँ ठीक हूँ. तुम तुम्हारा देख लो.

बेटा-बहू बाप से नाराज है.

००००००

५-दान

बूढी माँ दान के लिए बेटे से कह रही थी , इस बार कुछ ज्यादा ही खर्च होगा. बेटे ने कोई ध्यान नहीं दिया.

माँ चुप हो गई. बाद में बेटे बहू बच्चे मलेशिया के लिए निकल गए. माँ ताकती रह गयीं.

००००००

यशवंत कोठारी ,८६,लक्ष्मी नगर ब्रह्मपुरी बाहर,जयपुर-३०२००२

लघुकथा 7601534344926941733

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

emo-but-icon

मुख्यपृष्ठ item

कुछ और दिलचस्प रचनाएँ

फ़ेसबुक में पसंद करें

---प्रायोजक---

---***---

ब्लॉग आर्काइव