हिन्दू कालेज में आषाढ़ का एक दिन का मंचन

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नई दिल्ली। देश के अग्रणी शिक्षण संस्थान हिन्दू कालेज की हिंदी नाट्य संस्था 'अभिरंग' द्वारा रंग महोत्सव के अंतर्गत रंगसमूह 'शून्य' द्वारा अभिनीत 'आषाढ़ का एक दिन' का मंचन हुआ। मोहन राकेश द्वारा लिखे गए इस अत्यंत चर्चित नाटक की कथावस्तु संस्कृत कवि कालिदास के जीवन पर आधारित है। कालिदास और मल्लिका की दुखांत प्रेम कथा के साथ सत्ता और कलाकार के द्वंद्व का भी इस नाटक में चित्रण किया गया है। नाटक का निर्देशन कर रही डॉ रमा यादव ने मल्लिका का भावप्रवण अभिनय भी किया। वहीं मल्लिका की माता अम्बिका की भूमिका में मनीषा स्वामी ने अपने संवाद 'तुम जिसे भावना कहती हो वह केवल छलना और आत्म प्रवंचना है।..... भावना में भावना का वरण किया है।..... मैं पूछती हूँ भावना में भावना का वरण क्या होता है? उससे जीवन की आवश्यकताएँ किस तरह पूरी होती हैं ?' से दर्शकों से भरपूर सराहना प्राप्त की।

नाटक में कालिदास के प्रतिनायक विलोम का सशक्त अभिनय विनीत खन्ना ने किया। उनके मंच पर आगमन के साथ नेपथ्य से आती विशेष ध्वनियाँ दर्शकों को बरबस आकृष्ट कर देती थीं। वहीं मातुल के अभिनय में राहुल सिंह ने भी दर्शकों की सराहना प्राप्त की। अंत में कालिदास का मल्लिका से कहना 'तुम्हारे सामने जो आदमी खड़ा है यह वह कालिदास नहीं जिसे तुम जानती थी।' दर्शकों को मर्मस्पर्शी लगा। कालिदास का अभिनय मयंक गुप्ता ने किया। वहीं प्रियंगुमंजरी का अभिनय शुभांगी तथा विक्षेप व दंतुल के अभिनय में अंकुर देव थे। हिन्दू कालेज के खचाखच भरे प्रेक्षागृह में आसपास के कॉलेजों के विद्यार्थी भी बड़ी संख्या में आए थे। इससे पहले अभिरंग के परामर्शदाता डॉ पल्लव ने शून्य के सभी अभिनेताओं का स्वागत किया। अंत में अभिरंग के छात्र संयोजक पीयूष पुष्पम ने आगामी सत्र की कार्यकारिणी की घोषणा की।

नाटक के कुछ महत्वपूर्ण दृश्य-

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पीयूष पुष्पम

अभिरंग, हिन्दू कालेज

दिल्ली

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