दक्षिणी अफ्रीका की लोक कथाएँ // 5 बाज़ और बच्चा // सुषमा गुप्ता

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देश विदेश की लोक कथाएँ — दक्षिणी अफ्रीका की लोक कथाएँ

अंगोला, बोट्सवाना, लिसोठो, मलावी, मोरेशस, मौज़ाम्बीक, नामिबिया, स्वाज़ीलैंड, जाम्बिया, ज़िम्बाब्वे

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संकलनकर्ता

सुषमा गुप्ता

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5 बाज़ और बच्चा[1]

यह लोक कथा दक्षिणी अफ्रीका के ज़ाम्बिया देश में कही सुनी जाती है। यह बहुत दिनों पुरानी बात है कि ज़ाम्बिया में एक जगह एक स्त्री रहती थी जिसके एक बहुत छोटा बेटा था।

उस स्त्री को रोज ही खेतों पर काम करने के लिये जाना पड़ता था। पर उसकी यह समझ में नहीं आता था कि जब वह काम पर जाये तो वह अपने बच्चे को कहाँ छोड़ कर जाये सो वह हमेशा ही उसको अपने साथ ले कर जाती थी।

वह उसको एक पेड़ के नीचे लिटा देती वहीं उसको दूध पिलाती फिर अपना हल ले कर अपने खेत जोतती।

एक दिन उसने बच्चे को ठीक से दूध पिला दिया था ताकि वह कुछ देर के लिये शान्त रहे और फिर एक बहुत ही सुन्दर केले का पेड़ देख कर उसकी छाँह में उसको आराम से लिटा दिया पर जैसे ही वह उसको लिटा कर वहाँ से अपना काम करने गयी तो वह बच्चा रोने लगा और चुप ही नहीं हो रहा था।

स्त्र्ी ने उसको चुप करने की बहुत कोशिश की पर उसके चुप होने के कुछ देर बाद ही जैसे ही वह उसको छोड़ कर वहाँ से गयी तो उसने फिर ज़ोर ज़ोर से रोना शुरू कर दिया।

उसी समय एक मादा बाज़[2] वहाँ ऊपर से उड़ कर नीचे आयी और बच्चे के पास आ कर बैठ गयी। उसने बच्चे को तब तक अपने पंखों से सहलाया और अपनी चोंच से गुदगुदी की जब तक वह बच्चा मुस्कुराया नहीं।

फिर उसने देखा कि बच्चे की माँ अपना हल लिये उसी की तरफ आ रही है। उसने सोचा कि वह उसको मारने के लिये चली आ रही है तो वह वहाँ से उड़ गयी। माँ ने बच्चे को उठाया और गाँव वापस चली गयी।

उसने अपने पति से इस असाधारण घटना के बारे में इस डर से कुछ नहीं कहा कि वह उसकी इस बात का विश्वास ही नहीं करेगा। रोज की तरह से उसने अपना शाम का खाना बनाया, बच्चे को दूध पिलाया और सोने चली गयी।

अगली सुबह रोज की तरह वह फिर अपने बच्चे को ले कर खेतों पर अपना काम करने चली गयी। उसने फिर अपने बच्चे को एक पेड़ की छाँह में लिटाया, दूध पिलाया और अपना हल ले कर अपने काम पर चली गयी।

पर कुछ देर बाद बच्चे ने फिर से रोना चिल्लाना शुरू कर दिया। पर देखो तो कि वही मादा बाज़ फिर से वहाँ आ गयी। उसने फिर से बच्चे को अपने पंखों से सहलाया और चोंच से गुदगुदाया जब तक वह चुप नहीं हो गया।

इस बार वह स्त्री डर कम रही थी और उसको आश्चर्य ज़्यादा हो रहा था। उसके मुँह से निकला — “कितने आश्चर्य की बात है कि यह मादा बाज़ मेरे बच्चे को कोई नुकसान पहुँचाने की बजाय उसको चुप करा रही है और बच्चा भी चुप हो गया। ”

उस स्त्री ने अपने बच्चे को उठाया और तुरन्त ही अपने गाँव वापस चली गयी। जैसे ही उसके पति ने उसको जल्दी जल्दी समय से पहले आते देखा तो उससे पूछा कि क्या हुआ वह आज जल्दी क्यों आ गयी थी।

अब की बार उस स्त्र्ी ने अपने पति को बताया — “आज एक बड़ी आश्चर्यजनक घटना घटी। ”

पति बोला — “यहाँ तो कभी ऐसी कोई असाधारण घटना होती नहीं। अब की बार यह चमत्कार कैसे हुआ?”

स्त्री बोली — “कल भी और आज भी जब मैं खेत जोत रही थी एक मादा बाज़ उड़ कर नीचे आयी। ”

पति ने बीच में ही बात काटी “तो क्या हुआ। बाज़ देखना तो कोई ऐसी असाधारण घटना नहीं है। ”

“अरे आगे तो सुनो, बात यहीं तक नहीं है। बात यह है कि हमारा बच्चा रोये जा रहा था रोये जा रहा था। चुप ही नहीं हो रहा था।

मैं उसको देखने जाने वाली ही थी कि वह क्यों रो रहा है कि कहीं से खुले नीले आसमान में से एक मादा बाज़ नीचे आयी और आ कर उसके पास बैठ गयी।

उसने उसको अपने पंखों से सहलाया और अपनी चोंच से उसे गुदगुदाया और बच्चा जल्दी ही चुप हो गया। ”

पति थोड़ी ज़ोर से बोला — “यह तुम क्या बेकार की बातें कह रही हो? जहाँ तक किसी को भी याद पड़ता है ऐसा पहले कभी हुआ है क्या? तुम ऐसी कहानियाँ अपने पास ही रखो। ” यह सुन कर स्त्री ने अपना सिर झुका लिया और फिर कुछ नहीं कहा।

उसने अपने बच्चे को उठाया, हल को अपने कन्धे पर रखा और फिर से काम पर चली गयी।

उसने फिर से अपने बेटे को एक पेड़ की छाँह में लिटाया, दूध पिलाया और हल ले कर खेत जोतने चली गयी। बच्चे ने फिर से रोना शुरू कर दिया।

स्त्री ने सोचा मैं अभी अभी घर जाती हूँ और अपने पति को बुला कर यह सब दिखाती हूँ। उसने तुरन्त ही बच्चे को उठाया और तुरन्त ही गाँव भागी भागी गयी।

जब वह घर पहुँची तो उसने अपने पति को झोंपड़ी के बाहर अपने तीर तेज़ करते हुए बैठे देखा तो उसने उससे चिल्ला कर कहा — “आओ जल्दी आओ और आ कर देखो कि मैंने तुमसे सच कहा था या झूठ। ”

पति को बड़ा आश्चर्य हुआ और उसने तुरन्त ही अपना तीर कमान उठाया और अपनी पत्नी के पीछे पीछे चल दिया। जैसे ही वे खेत के पास पहुँचे स्त्री ने कहा — “उन झाड़ियों के पीछे छिप जाओ और देखो हिलना नहीं। मैं बच्चे को यहाँ इस पेड़ की छाँह में लिटाती हूँ। ”

जैसे ही बच्चे की माँ उसको वहाँ अकेला छोड़ कर गयी बच्चे ने फिर से रोना शुरू कर दिया। कुछ पल में ही वह मादा बाज़ वहाँ आ गयी और आ कर उसने उसको अपने पंखों से सहलाना शुरू कर दिया और चोंच से गुदगुदाना शुरू कर दिया।

यह देख कर बच्चे का पिता तो बहुत ही डर गया। उसने अपनी कमान खींच ली, निशाना साधा और तीर छोड़ दिया। पर इत्तफाक से उसी पल वह मादा बाज़ एक तरफ को हट गयी और जो तीर उस बाज़ को मारने के लिये चलाया गया था वह बच्चे को लग गया।

बड़े लोगों का कहना है कि इस तरह से दुनिया का यह पहला खून था।

मादा बाज़ यह कहते हुए ऊपर उड़ गयी — “ओ आदमी, तुम और तुम्हारे जैसे और जो भी आदमी इस समय इस दुनिया में हैं और जो आने वाले हैं वे भी, जैसे मैं तुम्हारे बच्चे को तसल्ली देने आयी फिर भी तुमने मुझे मारने की कोशिश की मेरी बद्दुआ तुमको भी लगेगी।

तुमने अपने ही बच्चे को मारा है तुमको भी तुम्हारा अपना ही कोई आदमी मारेगा और इस तरह वे सब आपस में एक दूसरे को मारते रहेंगे। ” और बदकिस्मती से उसकी वह बद्दुआ अभी तक चल रही है।

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[1] Hawk and the Child – a folktale from Baila (Ila) Tribe, Zambia, Southern Africa.

Adapted from the book “African Folktales” by A Ceni. English Edition in 1998.

[2] Translated for the word “Hawk” – see its picture above.

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से सैकड़ों लोककथाओं के पठन-पाठन का आनंद आप यहाँ रचनाकार के लोककथा खंड में जाकर उठा सकते हैं.

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