ज़ंज़ीबार की लोक कथाएँ // काइट चिड़ियें और कौए // सुषमा गुप्ता

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देश विदेश की लोक कथाएँ — पूर्वी अफ्रीका–ज़ंज़ीबार :

ज़ंज़ीबार की लोक कथाएँ

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संकलनकर्ता

सुषमा गुप्ता


4 काइट चिड़ियें और कौए[1]

एक दिन कौओं के राजा कूँगूरू ने काइट चिड़ियों[2] के राजा ऐमवेवे[3] को एक चिठ्ठी लिखी जिसमें बस यह लिखा था “मैं चाहता हूँ कि तुम लोग मेरे सिपाही बन जाओ। ” काइट चिड़ियों के राजा ऐमवेवे ने तुरन्त ही इसका जवाब लिख दिया “नहीं यह नहीं हो सकता। ”

तब कौओं के राजा कूँगूरू ने काइट चिड़ियों के राजा ऐमवेवे को डराने के लिये कहलवाया कि अगर वे उनकी बात नहीं माने तो वे उन पर चढ़ाई कर देंगे।

काइट चिड़ियों के राजा ने भी कह दिया — “हाँ हाँ ठीक है। कर दो चढ़ाई। हम लड़ेंगे। अगर तुम जीत गये तो हम तुम्हारा कहा करेंगे और अगर तुम जीत गये तो तुम हमारा कहा मानना। ”

बस फिर क्या था दोनों ने अपनी अपनी सेना इकठ्ठी कीं और उतर पड़े लड़ाई के मैदान में। लेकिन थोड़ी ही देर में ऐसा लगने लगा कि कौए बहुत बुरी तरह से हार रहे थे।

जैसा कि लड़ाई से लग रहा था कि अगर जल्दी ही कुछ न किया गया तो सारे कौए मर जायेंगे। उस समय एक बूढ़े कौए जीऊसी[4] ने सलाह दी कि उन सबको वहाँ से भाग जाना चाहिये। तुरन्त ही यह सलाह मान ली गयी और सारे कौए अपना अपना घर छोड़ कर उड़ चले और दूर जा कर अपना एक “कौआ शहर” बसा लिया।

एक दिन कौओं ने अपनी एक मीटिंग बुलायी। उस मीटिंग में उनका राजा कूँगूरू बोला — “ओ मेरे लोगों, अब जो मैं कहता हूँ वह करो तो सब ठीक हो जायेगा। तुम लोग मेरे कुछ पंख नोच लो और मुझे काइट चिड़ियों के शहर के बीचोबीच फेंक दो। फिर यहाँ वापस आ जाओ और मेरे हुकुम का इन्तजार करो। ”

बिना किसी सवाल के कौओं ने अपने राजा का हुकुम माना और राजा के कुछ पंख नोच कर उसको काइट चिड़ियों के शहर के बीचोबीच छोड़ आये।

अभी उसको वहाँ पड़े हुए कुछ ही देर हुई थी कि वहाँ से गुजरती हुई कुछ काइट चिड़ियोंं ने उसको वहाँ पड़े देखा तो पूछा — “तुम यहाँ हमारे शहर में क्या कर रहे हो?”

बहुत देर तक आहें भरने के बाद कौओं का राजा कूँगूरू बोला — “मेरे साथियों ने मुझे बहुत पीटा और शहर से निकाल दिया क्योंकि मैंने उनको काइट चिड़ियों के राजा ऐमवेवे का हुकुम मानने की सलाह दी थी और मैंने उनका कहा नहीं माना। ”

जब उन्होंने यह सुना तो वह उसे उठा कर अपने राजा के पास ले गये और उससे कहा — “हमने इसे अपने शहर की गलियों में पड़ा पाया। क्योंकि यह हमारे शहर में अपने आप नहीं आया इसको यहाँ डाला गया है इसलिये अच्छा हो अगर आप इसका हाल सुन लें। ”

कौओं के राजा कूँगूरू ने जो काइट चिड़ियों से गलियों में कहा था वही उसने काइट चिड़ियों के राजा ऐमवेवे के सामने भी दोहरा दिया और साथ में यह भी कहा कि हालाँकि उन्होंने काइट चिड़ियों के हाथों बहुत कुछ सहा है पर फिर भी काइट चिड़ियों का राजा ऐमवेवे बहुत ही अच्छा राजा है।

काइट चिड़ियों का राजा ऐमवेवे तो यह सुन कर बहुत ही खुश हो गया। वह बोला — “तुम अपने और साथियों से कहीं ज़्यादा होशियार लगते हो। अगर उन्होंने तुमको निकाल दिया तो कोई बात नहीं तुम हमारे शहर में रह सकते हो। ”

कौओं के राजा कूँगुरू ने उसको बहुत बहुत धन्यवाद दिया और वह वहीं रहने लगा। उसके वहाँ रहने के ढंग से ऐसा लगता था जैसे कि वह अपनी सारी ज़िन्दगी वहीं काइट चिड़ियों के साथ ही गुजारने वाला है।

एक दिन उसके पड़ोसी उसको चर्च ले गये और जब वे घर वापस लौट रहे थे तो उन्होंने उससे पूछा — “सबसे अच्छा धर्म किसका है, कौओं का या काइट चिड़ियों का?”

कौओं के राजा ने चतुराई से जवाब दिया — “यकीनन काइट चिड़ियों का। ” यह जवाब सुन कर तो काइट चिड़ियाँ फूली नहीं समायीं उनको लगा कि यह कौआ तो बहुत ही अच्छी चिड़िया है।

कौओं के राजा को वहाँ रहते जब दो हफ्ते हो गये तो एक दिन वह वहाँ से रात को खिसक लिया और अपने शहर जा पहुँचा। वहाँ जा कर उसने अपनी जनता को बताया कि कल काइट चिड़ियों का एक बहुत बड़ा धार्मिक त्यौहार है सो वे सब कल सुबह ही चर्च चले जायेंगी।

तुम सब अभी अभी चले जाओ और कुछ लकड़ियाँ और आग इकठ्ठी कर लो और काइट चिड़ियों के शहर के पास इन्तजार करो। जब मैं तुम्हें बुलाऊँ तब तुम आ जाना और उनके चर्च में आग लगा देना। ”

और वह तुरन्त ही उन सबको यह समझा कर काइट चिड़ियों के राजा ऐमवेवे के शहर वापस चला गया।

सारी रात कौए लकड़ी और आग इकठ्ठा करने में लगे रहे। सुबह तक उनके पास काफी लकड़ी और आग इकठ्ठी हो गयी थी। उन सबको ले कर वे अपने दुश्मन के शहर के पास अपने राजा कूँगूरू के बुलाने का इन्तजार करने लगे।

अगले दिन सारी काइट चिड़ियाँ चर्च गयी हुईं थीं। एक भी काइट चिड़िया घर में नहीं थी सिवाय बूढ़े कूँगूरू के। जब उसके पड़ोसी उसको चर्च ले जाने के लिये आये तो उन्होंने देखा कि वह तो लेटा हुआ है।

वे आश्चर्य से बोले — “अरे यह क्या हुआ है तुमको? तुम आज चर्च नहीं जा रहे?”

कौओं के राजा ने जवाब दिया — “मेरी इच्छा तो बहुत थी कि मैं भी चर्च जाऊँ पर क्या करूँ आज मेरे पेट में बहुत दर्द है। ”

वे बोले — “तब तुम घर में आराम करो। आराम करने से तुम्हारा दर्द कुछ ठीक हो जायेगा। ” और वे चर्च चले गये।

जैसे ही वे सब लोग वहाँ से चले गये वह उड़ा और अपने सिपाहियों के पास पहुँचा और बोला — “आओ आओ जल्दी करो वे सब चर्च में हैं। ”

और सारे कौए तुरन्त चर्च की तरफ दौड़ चले। कुछ कौओं ने दरवाजे पर लकड़ी रखी और दूसरों ने उसमें आग लगा दी।

लकड़ियों ने बहुत जल्दी आग पकड़ ली। इससे पहले कि काइट चिड़ियों को खतरे का पता चलता चर्च में चारों तरफ आग लग गयी। कुछ काइट चिड़ियों ने खिड़कियों से भागने की कोशिश भी की पर वे आग की वजह से निकल ही नहीं सकीं।

सबसे बड़ी बात तो यह थी कि बहुत सारी काइट चिड़ियाँ धुँए से घुट कर मर गयीं। बहुत सारी काइट चिड़ियों के तो पंख ही झुलस गये। इनमें काइट चिड़ियों का राजा एमवेवे भी था।

इस तरह कूँगूरू कौए ने अपना शहर फिर से वापस ले लिया। उस दिन से काइट चिड़ियाँ कौओं से नीचे ही उड़ती हैं।


[1] The Kites, and the Crows – a folktale from Zanzibar, Eastern Africa.

[2] Kite – a kind of preying bird. See its picture above

[3] Koongooroo the King of crows, and Mwayway the King of kite birds

[4] Jeeoosee, the old crow

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से सैकड़ों लोककथाओं के पठन-पाठन का आनंद आप यहाँ रचनाकार के लोककथा खंड में जाकर उठा सकते हैं.

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(कहानियाँ क्रमशः अगले अंकों में जारी...)

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