लोककथा // ईकटोमी, कायोटी और चट्टान // सुषमा गुप्ता

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देश विदेश की लोक कथाएँ — उत्तरी अमेरिका–ईकटोमी :

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चालाक ईकटोमी


संकलनकर्ता


सुषमा गुप्ता


7 ईकटोमी, कायोटी और चट्टान[1]

एक बार कायोटी अपने दोस्त ईकटोमी के साथ कहीं जा रहा था कि उनके रास्ते में इन्यान चट्टान[2] पड़ी। यह कोई साधारण चट्टान नहीं थी बल्कि एक खास चट्टान थी।

उस पूरी चट्टान के ऊपर हरी काई की मकड़े की तरह की लाइनें बनी हुई थीं जो उसकी कहानी बता रही थीं कि वह इन्यान चट्टान थी और उसके पास ताकत थी।

कायोटी उसकी तरफ देखता हुआ बोला — “अरे वाह। यह तो बड़ी सुन्दर चट्टान है। मुझे लगता है कि इसके पास जरूर कुछ ताकत है। ”

यह कह कर कायोटी ने अपना ओढ़ा हुआ कम्बल उतारा और उसे उस चट्टान को ओढ़ा दिया और बोला — “ओ इन्यान मेरे दोस्त, यह लो मेरी तरफ से एक भेंट। तुमको ठंड लग रही होगी। इस कम्बल से तुम ठंड से बच पाओगे। ”

ईकटोमी बोला — “अरे वाह यह तो बड़ा अच्छा दान है। दोस्त तुम तो आज लगता है देने के मूड में हो। ”

कायोटी बोला — “अरे यह तो कुछ भी नहीं है मैं तो हमेशा कुछ न कुछ देता ही रहता हूं। यह इन्यान तो मेरा कम्बल ओढ़े हुए बहुत ही अच्छा लग रहा है। ”

ईकटोमी बोला — “तो अब तो यह कम्बल इसका हो गया। ”

इन्यान को कम्बल ओढ़ा कर दोनों दोस्त आगे चल दिये। कुछ ही देर में ठंडा हो गया और बारिश होने लगी। फिर ओले भी पड़ने लगे। कायोटी ओर ईकटोमी दोनों बारिश और ओलों से बचने के लिये एक गुफा में चले गये जो ठंडी भी थी ओर गीली भी।

ईकटोमी तो ठीक था क्योंकि उसने भैंस की मोटी खाल का कोट पहना हुआ था पर कायोटी केवल एक कमीज पहने था। वह इस ठंड में कांप रहा था। वह जमा जा रहा था। ठंड के मारे उसके दांत बज रहे थे।

कायोटी अपने दोस्त ईकटोमी से बोला — “ओ मेरे दोस्त कोला[3] जरा उस चट्टान के पास जा कर मेरा कम्बल तो ले आओ। उस चट्टान को तो उसकी जरूरत नहीं है पर मुझे अब उसकी जरूरत है। वह तो बरसों से वहाँ बिना कम्बल के ही पड़ी हुई है। जल्दी करो मैं तो बिल्कुल जमा जा रहा हूं। ”

सो ईकटोमी वापस इन्यान चट्टान के पास गया ओर उससे बोला — “मेहरबानी करके क्या आप मुझे वह कम्बल वापस कर सकते हैं?”

चट्टान बोली — “नहीं नहीं। मैं इसे वापस नहीं दूंगा। यह कम्बल तो मुझे बहुत अच्छा लगा। और फिर जो कुछ भी दे दिया गया वह दे दिया गया। ”

ईकटोमी यह सुन कर वापस कायोटी के पास आया और उसे सब बताया कि अब वह चट्टान तो उस कम्बल को वापस नहीं कर रही।

कायोटी को यह सुन कर गुस्सा आ गया वह बोला — “यह तो कोई अच्छी बात नहीं है। यह चट्टान तो बड़ी बेईमान निकली। क्या उसने वह कम्बल पैसे दे कर खरीदा था या फिर उसने उस कम्बल के लिये कोई काम किया था? मैं खुद जाता हूं और उससे वह कम्बल ले कर आता हूं। ”

ईकटोमी बोला — “दोस्त टुन्का[4], इस इन्यान चट्टान के पास बहुत ताकत है। अच्छा होगा अगर तुम उसको वह कम्बल रख लेने दो। ”

“क्या तुम पागल हो गये हो? यह तो मेरा बहुत सारे रंगों का बना बहुत ही मोटा और कीमती कम्बल है। मैं जा कर उससे बात करके आता हूं और अपना कम्बल वापस ले कर आता हूं। ”

कह कर कायोटी वापस चट्टान के पास गया ओर उससे बोला — “ओ चट्टान यह सब क्या है? तुमको यह कम्बल किसलिये चाहिये? इसको तुम मुझे अभी अभी वापस कर दो। ”

चट्टान बोली — “नहीं मैं इसे वापस नहीं करूंगा। जो चीज़ एक बार दे दी गयी तो दे दी गयी। ”

कायोटी गुस्सा हो कर बोला — “तुम तो बहुत ही बुरी चट्टान हो। क्या तुमको इस बात का जरा सा भी खयाल नहीं है कि मैं ठंड से कितना सिकुड़ रहा हूं। मैं तो जम कर मरा जा रहा हूं। ”

कह कर कायोटी ने उस चट्टान से अपना कम्बल एक झटके के साथ छीन लिया और उसे खुद ओढ़ लिया और बोला — “बस यही ठीक है। ”

चट्टान बोला — “नहीं यह ठीक नहीं है। ”

पर कायोटी उसको अनसुना करते हुए अपनी गुफा की तरफ चल दिया। इतनी देर में बारिश और ओले सब रुक गये थे और सूरज फिर निकल आया था सो ईकटोमी और कायोटी दोनों अपनी गुफा के सामने ही बैठ गये।

वे दोनों वहाँ बैठ कर धूप का आनन्द ले रहे थे और पैमीकैन[5], तली हुई डबल रोटी, बैरी का सूप आदि खा पी रहे थे। खा पी कर वे अपने अपने पाइप पीने लगे।

कि अचानक ईकटोमी बोला — “अरे यह शोर कैसा है?”

कायोटी कुछ सुनता हुआ बोला — “कहां कैसा शोर? मुझे तो कुछ सुनायी नहीं दे रहा। ”

ईकटोमी बोला — “जैसे दूर कोई किसी को तोड़ता फोड़ता और कुचलता चला आ रहा हो। ”

कायोटी ने फिर कुछ सुनने की कोशिश की और बोला — “हां दोस्त अब मुझे भी कुछ सुनायी दे रहा है। ”

ईकटोमी बोला — “दोस्त कायोटी यह आवाज तो अब और पास आती जा रही है और ज़्यादा तेज़ भी होती जा रही है। ऐसा लग रहा है जैसे या तो यह कोई बिजली की कड़क हो या फिर भूचाल आ रहा हो। ”

“हॉ यह तो बहुत तेज़ है पता नहीं यह किसकी आवाज है। ”

ईकटोमी बोला — “मुझे पता है कि यह किसकी आवाज है। ”

तभी उन दोनों ने देखा कि एक चट्टान लुढ़कती हुई उन्हीं की तरफ चली आ रही है। अरे यह तो इन्यान चट्टान है जो लुढ़कती हुआ, बिजली की कड़क की आवाज करती हुआ, अपने रास्ते में आयी हुई सब चीज़ों को कुचलती हुई उन्हीं की तरफ चली आ रही है।

ईकटोमी चिल्लाया — “दोस्त भागो यह इन्यान तो हमको मारने के लिये आ रहा है। ”

सो दोनों जितनी जल्दी वहाँ से भाग सकते थे भाग लिये। चट्टान उनके पीछे भागती रही और उनके और पास और और पास आती रही।

ईकटोमी फिर चिल्लाया — “हमको यह नदी तैर कर पार कर लेनी चाहिये कायोटी। मुझे यकीन है कि यह चट्टान तो बहुत भारी है यह इस पानी में नहीं तैर सकेगी ओर डूब जायेगी। ”

सो वे दोनों तैर कर नदी पार करने लगे। पर इन्यान जैसी बड़ी चट्टान ने भी तैर कर नदी पार कर ली। ऐसा लग रहा था जैसे कि वह चट्टान पत्थर की नहीं बल्कि लकड़ी की बनी हो।

अब कायोटी चिल्लाया — “ईकटोमी इन बड़े पेड़ों में घुस जाओ। , मुझे यकीन है कि यह चट्टान इस घने जंगल में नहीं घुस पायेगी। ”

सो वे जंगल में पेड़ों में चले गये पर वह बड़ी इन्यान चट्टान तो जंगल के किनारे भी नहीं रुकी। वह अपने दांये बांये लगे उन बड़े बड़े पाइन के पेड़ों को रौंदती हुई उनके पीछे पीछे चलती चली आ रही थी।

अब कायोटी और ईकटोमी दोनों बाहर मैदान में निकल आये थे। ईकटोमी फिर चिल्लाया “उफ उफ। दोस्त कायोटी यह मेरी लड़ाई नहीं है। मुझे अभी याद आया कि मुझे तो किसी जरूरी काम से जाना था। ठीक है फिर मिलते है। ”

सो ईकटोमी एक छोटी सी गेंद के रूप में सिकुड़ गया और मकड़ा बन गया। पास में उसे एक चूहे का बिल दिखायी दे गया तो वह उसमें घुस गया और गायब हो गया।

अब कायोटी अकेला रह गया वह फिर भागा। वह बड़ी चट्टान भी उसके पीछे पीछे भागी आ रही थी। वह पास आ कर कायोटी के ऊपर चढ़ गयी और उसको करीब करीब चौरस कर दिया। फिर उसने अपना कम्बल उठाया और वापस चली गयी।

एक घोड़ा पालने वाला वहाँ से अपने घोड़े पर बैठा गुजर रहा था तो उसने कायोटी को वहाँ चौरस पड़ा देखा तो उसको लगा कि वहाँ कोई कालीन पड़ा है।

उसने उसको उठाते हुए कहा — “अरे यह तो कितना सुन्दर कालीन है। ” वह उसको अपने घर ले गया और अपने कमरे में आग जलाने की जगह ले जा कर बिछा दिया।

जब कभी कायोटी मरता है तो वह फिर से ज़िन्दा हो जाता है। पर इस बार उसको अपनी पुरानी शक्ल में आने में सारी रात लग गयी।

सुबह को उस घोड़े पालने वाले की पत्नी अपने पति से बोली — “अरे यह क्या? मैंने अभी अभी तुम्हारे कालीन को यहाँ से भागते हुए देखा है। ”


[1] Iktomi, Coyote and the Rock – a foltale from Lakota Tribe of North America.

Taken from the Web Site :

http://www.firstpeople.us/FP-Html-Legends/Iktome-Coyote-And-The-Rock-Sioux.html

[2] Inyan Rock is the rock which is Iktomi’s great grandfather. It is the Primordial stone spirit of Sioux Tribe mythology.

[3] Cola – knickname of Iktomi

[4] Tunka – knickname of Coyote

[5] Pemmican is a diet of Native Americans living in Alaskan Tundra region. It is made up of sea animals with no vegetables whatsoever.


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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,इथियोपिया व इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

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