उत्तरी अमेरिका की लोककथाएँ // सात लड़ने वाले // सुषमा गुप्ता

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देश विदेश की लोक कथाएँ — उत्तरी अमेरिका–ईकटोमी :

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चालाक ईकटोमी


संकलनकर्ता


सुषमा गुप्ता


14 सात लड़ने वाले[1]

एक बार की बात है कि सात लोग लड़ने के लिये गये – राख, आग, ब्लैडर, टिड्डा, ड्रैगन फ्लाई, मछली और कछुआ[2]

वे सब बहुत ही तेज़ी से अपने अपने घूंसे उठा उठा कर लड़ाई के ढंग से बात कर रहे थे कि हवा का एक झोंका आया और राख को उड़ा कर ले गया।

यह देख कर दूसरे चिल्लाये — “अरे यह तो इससे लड़ ही नहीं सका। ”

बाकी के बचे छह लड़ने के लिये और तेज़ तेज़ भागे तो वे एक गहरी घाटी में चले गये। घाटी में एक नदी बह रही थी। आग सबसे आगे जा रही थी।

सो वे सब भागते भागते उस नदी के पास पहुंचे। जैसे ही आग उस नदी के पास पहुंची वह बोली “स्स्स छू” और वह तो बुझ गयी।

दूसरे बोले — “अरे यह तो इससे लड़ ही नहीं पायी। ”

अब बचे हुए पाँच लड़ने के लिये और तेज़ भागे। भागते भागते वे एक जंगल में आ पहुंचे। जब वे उस जंगल में से हो कर गुजर रहे थे तो ब्लैडर की आवाज सुनायी दी — “ए भाइयो तुम लोग इनसे ऊपर उठ कर चलो। ”

और यह कहते कहते वह वहाँ उगे पेड़ों के ऊपर से चलने लगा। वहाँ लगे काँटों वाले के काँटे उसको लग गये और वह उनकी शाखों के बीच से नीचे गिर पड़ा।

बचे हुए चार बोले — “तुमने देखा इसे? यह भी नहीं लड़ पाया। ”

इसके बाद भी वे बचे हुए लड़ने वाले वापस नहीं लौटे और लड़ने के लिये आगे बढ़ते ही गये। अब टिड्डा अपने भाई ड्रैगन फ्लाई के साथ आगे आगे चल रहा था।

चलते चलते वे लोग एक दलदल में आ पहुंचे। वहाँ कीचड़ बहुत ज़्यादा थी। जैसे जैसे वे उस कीचड़ में चलते गये टिड्डे के पैर कीचड़ में फंसते गये।

उसने अपनी टाँगें उसमें से खींची तो वह पास में पड़े एक लकड़ी के लठ्ठे पर चढ़ गया और रोते हुए बोला — “भाइयों तुम लोग देख रहे हो न। मैं अब और आगे नहीं जा सकता। तुम लोग चलो। ”

ड्रैगन फ्लाई अपने भाई के लिये रोता हुआ आगे चलता रहा। काई उसको तसल्ली नहीं दे पा रहा था क्योंकि वह अपने भाई के दुख से बहुत दुखी था। वह उसको बहुत प्यार करता था।

उसके लिये उसको जितना ज़्यादा दुख होता वह उसके लिये उतनी ही ज़ोर से रोता। इससे उसका शरीर बहुत ज़ोर से काँप जाता।

एक बार उसने अपनी रोने से सूजी हुई लाल नाक सिनकी तो उससे इतनी ज़ोर की आवाज हुई कि उसका सिर उसकी पतली सी गरदन पर आ गया और वह नीचे घास पर गिर पड़ा।

मछली ने अपनी पूंछ ज़ोर से फटकारी और बोली — “तुमने देखा कि क्या क्या हुआ? ये लोग लड़ने वाले नहीं थे। चलो लड़ने के लिये हम लोग आगे बढ़ते हैं। ”

clip_image002सो मछली और कछुआ आगे बढ़ते रहे और एक कैम्प लगाने की जगह आ गये। यहाँ टैपी[3] लगाने वाले गोल गाँव के लोग चिल्लाये “हो हो। ये छोटे छोटे लोग कौन हैं और ये यहाँ क्या कर रहे हैं?”

अब इन दोनों लड़ने वालों के पास कोई हथियार तो था नहीं। दूसरे इनकी अजीब सी शक्लों ने भी उन उत्सुक लोगों को भटका दिया।

मछली उन दोनों की तरफ से बोलने वाली थी सो वह कुछ अक्षरों के बिना बोली — “शू , , , ही पी[4]। ”

वे आदमी कुछ समझे नहीं सो वे बोले — “क्या क्या। क्या कहा। ”

मछली फिर बोली — “शू , , , ही पी। ”

हर आदमी वहाँ अपने कान पर हाथ रखे उन शब्दों को ठीक से सुनने के लिये खड़ा था पर फिर भी किसी की समझ में नहीं आया कि मछली ने क्या कहा।

फिर उस भीड़ में से बात करने में चतुर ईकटोमी बाहर आया क्योंकि जहॉ भी कोई परेशानी होती वह वहीं पहुंच जाता।

सो वह अपनी शरारती हथेलियाँ मलते हुए बोला — “ए सुनो। यह अजीब आदमी कह रहा है “ज़ूया अनहीपी”[5] यानी कि हम लड़ने के लिये आये हैं। ”

वहाँ खड़े लोग बोले — “हूं। तो हमें इस बेवकूफ जोड़े को मार देना चाहिये। ये लोग तो कुछ कर नहीं सकते। ये तो इस वाक्य का मतलब भी नहीं समझते। चलो आग जलाते हैं और इन दोनों को उबालते हैं। ”

मछली बोली — “अगर तुम हम दोनों को उबालोगे तो बहुत मुश्किल में पड़ जाओगे। ”

वहाँ खड़े लोग बहुत ज़ोर से हँसे ओर बोले “देखते हैं। ” और उन्होंने आग जला ली।

मछली बोली — “मुझे इतना गुस्सा कभी नहीं आया। ”

कछुआ फुसफुसाया — “ऐसे तो हम मर जायेंगे। ”

जब आग जल गयी और उसके ऊपर पानी उबलने लगा तो दो मजबूत हाथों ने मछली को उठाया और उसकी पूंछ पकड़ते हुए उसका मुंह नीचे करते हुए उसको उबलते हुए पानी के ऊपर ले गया और उसे उस पानी में डाल दिया।

“व्हिश” कहते हुए मछली ने बहुत सारा पानी वहाँ खड़ी भीड़ के ऊपर छिटका दिया। उस गरम पानी के छिटकने से बहुत सारे लोग जल गये और बहुत सारे देख भी नहीं सके। वे दर्द के मारे चिल्लाते हुए वहाँ से भाग निकले।

वे बोले — “इन डरावने जानवरों का हम क्या करें। ”

कुछ दूसरे बोले — “इनको हम झील के कीचड़ वाले पानी में ले चलते हैं वहाँ इनको उसमें डुबो देंगे। ”

सो तुरन्त ही वे उनको ले कर झील की तरफ दौड़े। वहाँ पहुंच कर उन्होंने मछली और कछुए दोनों को झील में फेंक दिया।

कछुआ तुरन्त ही झील के बीच की तरफ तैर गया। वहाँ पहुंच कर वह पानी में से बाहर की तरफ झाँका और भीड़ की तरफ हाथ हिलाते हुए बोला — “यही तो वह जगह है जहाँ मैं रहता हूं। यही मेरा घर है। ”

मछली भी वहाँ इतनी तेज़ी से इधर उधर तैरी कि वहाँ से उसने बहुत सारा पानी छिटका कर बाहर फेंक दिया। वह बोली “ई हैन[6]। मैं यहीं तो रहती हूं। ”

यह सुन कर तो लोग डर गये और बोले — “अरे यह हमने क्या किया। यह तो हमने उलटा ही कर दिया। ”

उनका एक अक्लमन्द सरदार बोला — “खाने वाला इया[7] आयेगा ओर इस झील को खा जायेगा। ”

सो वहाँ से एक आदमी भागा गया और खाने वाले इया को ले आया। इया वहाँ सारा दिन उस झील का पानी पीता रहा जब तक उसकी जमीन दिखायी नहीं देने लगी। इससे मछली और कछुआ दोनों कीचड़ में फँस गये।

इया बोला — “अब इनका मैं कुछ नहीं कर सकता। ”

यह सुन कर तो वहाँ खड़े लोग बहुत ज़ोर ज़ोर से रोने लगे।

ईकटोमी पानी में चल रहा था सो इया ने उसको भी निगल लिया था। अब वह इया के अन्दर से आसमान की तरफ देख रहा था।

क्योंकि इया के पेट में झील का पिये पानी इतना ऊँचा था कि हुए पानी की सतह आसमान को छू रही थी। ईकटोमी ने आसमान के उस गोले के गहरे हिस्से की तरफ देख कर सोचा मैं उस तरफ चलता हूं।

उसने इया के पेट में अपना चाकू घुसाया तो उसके पेट में भरा हुआ झील का सारा पानी नीचे गिर पड़ा जिससे सारा गाँव डूब गया।

यह पानी जब झील की अपनी जगह पर गिरा तो वहाँ फिर पानी ही पानी हो गया और मछली और कछुआ फिर से कीचड़ में से बाहर निकल आये।

वे फिर जीत का डंका बजाते हुए गाते नाचते अपने अपने घर वापस चले गये।

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1 नाइजीरिया की लोक कथाएँ–1

2 नाइजीरिया की लोक कथाएँ–2

3 इथियोपिया की लोक कथाएँ–1

4 रैवन की लोक कथाएँ–1

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1 ज़ंज़ीबार की लोक कथाएँ — 10 लोक कथाएँ — सामान्य छापा, मोटा छापा दोनों में उपलब्ध

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1 रैवन की लोक कथाएँ–1 — इन्द्रा पब्लिशिंग हाउस

2 इथियोपिया की लोक कथाएँ–1 — प्रभात प्रकाशन

3 इथियोपिया की लोक कथाएँ–2 — प्रभात प्रकाशन

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1 इथियोपिया की लोक कथाएँ–1

http://www.rachanakar.org/2017/08/1-27.html

2 इथियोपिया की लोक कथाएँ–2

http://www.rachanakar.org/2017/08/2-1.html

3 रैवन की लोक कथाएँ–1

http://www.rachanakar.org/2017/09/1-1.html

4 रैवन की लोक कथाएँ–2

http://www.rachanakar.org/2017/09/2-1.html

5 रैवन की लोक कथाएँ–3

http://www.rachanakar.org/2017/09/3-1-1.html

6 इटली की लोक कथाएँ–1

http://www.rachanakar.org/2017/09/1-1_30.html

7 इटली की लोक कथाएँ–2

http://www.rachanakar.org/2017/10/2-1.html

8 इटली की लोक कथाएँ–3

http://www.rachanakar.org/2017/10/3-1.html

9 इटली की लोक कथाएँ–4

http://www.rachanakar.org/2017/10/4-1.html

10 इटली की लोक कथाएँ–5

http://www.rachanakar.org/2017/10/5-1-italy-lokkatha-5-seb-wali-ladki.html

11 इटली की लोक कथाएँ–6

http://www.rachanakar.org/2017/11/6-1-italy-ki-lokkatha-billiyan.html

12 इटली की लोक कथाएँ–7

http://www.rachanakar.org/2017/11/7-1-italy-ki-lokkatha-kaitherine.html

13 इटली की लोक कथाएँ–8

http://www.rachanakar.org/2017/12/8-1-italy-ki-lokkatha-patthar-se-roti.html

14 इटली की लोक कथाएँ–9

http://www.rachanakar.org/2017/12/9-1-italy-ki-lok-katha-do-bahine.html

15 इटली की लोक कथाएँ–10

http://www.rachanakar.org/2017/12/10-1-italy-ki-lok-katha-teen-santre.html

नीचे लिखी पुस्तकें जुगरनौट डाट इन पर उपलब्ध हैं

1 सोने की लीद करने वाला घोड़ा और अन्य अफ्रीकी लोक कथाएँ

https://www.juggernaut.in/books/8f02d00bf78a4a1dac9663c2a9449940

2 असन्तुष्ट लड़की और अन्य अमेरिकी लोक कथाएँ

https://www.juggernaut.in/books/2b858afc522c4016809e1e7f2f4ecb81

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Updated on Sep 27, 2017


[1] Warlike Seven – a folktale from Native Americans, North America.

Adapted rom the Web Site : http://www.worldoftales.com/Native_American_folktales/Native_American_Folktale_50.html

[2] Ashes, Fire, Bladder, Grasshopper, Dragon Fly, Fish and Turtle

[3] Tepee is the local type of conical huts of Native Americans in North America – see its picture above.

[4] Shu… hi pi

[5] Zuya unhipi

[6] E Han

[7] Iya, the Eater




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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,इथियोपिया व इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

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