वृद्धाश्रम की हकीकत (लघु कथा) // डॉ. राजीव कुमार पाण्डेय

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

वृद्धाश्रम की हकीकत  (लघु कथा)

------------------------------

1 (2)

   आज प्रातःकाल से ही बड़ी चहल पहल थी, क्योंकि श्री चोपड़ा साहबऔर श्रीमती चोपड़ा द्वारा नवनिर्मित एवं महत्वाकांक्षी  वृद्धाश्रम का उद्घाटन जो होना था। सारे जीवन की कमाई जो लगाई थी।

परिवार कल्याण मंत्री आये इस शुभ कार्य हेतु। मंत्री जी की गरिमा के अनुकूल  माला, ,स्मृति चिन्ह, पटका आदि से भव्य स्वागत किया गया। मंत्री अभिभूत हुए श्री एवं श्रीमती चड्ढा के स्वागत से और उनके द्वारा किये इस अद्भुत सामाजिक कार्य से।

मंत्री जी के द्वारा कुछ बुजुर्गों को सम्मानित भी किया गया।

माइक पर उन दोनों की प्रशंसा में अनेकों शब्दोच्चार किये और उपस्थित श्रोताओं ने भी तालियां बजाकर उनकी समाज सेवा की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

वहीं जलपान वगैरह की अच्छी व्यवस्था की गई। कार्यक्रम की समाप्ति पर मंत्री जी को बड़े सम्मान के साथ विदा किया गया। मंत्री जी गाड़ी में बैठने ही वाले थे कि उनकी निगाह वहीं पहुंच गयी जहाँ श्रीमती चड्डा किसी को डाँटते हुए सफाई के निर्देश दे रही थी। गौर से देखने पर पता चला ये तो वही 80 वर्षीय वृद्ध महिला है जिसे उन्होंने सम्मानित किया था।

मंत्री गाड़ी में बैठ गए, लेकिन वृद्धाश्रम की हकीकत को भी अपने साथ ले गए।

डॉ राजीव कुमार पाण्डेय

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

0 टिप्पणी "वृद्धाश्रम की हकीकत (लघु कथा) // डॉ. राजीव कुमार पाण्डेय"

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.