चालाक बूढ़ा बिल्ला // अफ्रीका की लोक कथाएँ // सुषमा गुप्ता

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देश विदेश की लोक कथाऐें — अफ्रीका–1 :

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अफ्रीका की लोक कथाएँ–1

अफ्रीका, अंगोला, कैमेरून, मध्य अफ्रीका, कौंगो, मोरक्को

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संकलनकर्ता

सुषमा गुप्ता

Book Title: Africa Ki Lok Kathayen-1 (Folktales from Africa-1)

Cover Page picture: African Drums

Published Under the Auspices of Akhil Bhartiya Sahityalok

E-Mail: sushmajee@yahoo.com

Website: www.sushmajee.com/folktales/index-folktales.htm

Read More such stories at: www.scribd.com/sushma_gupta_1

Copyrighted by Sushma Gupta 2014

No portion of this book may be reproduced or stored in a retrieval system or transmitted in any form, by any means, mechanical, electronic, photocopying, recording, or otherwise, without written permission from the author.

Map of Africa

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विंडसर, कैनेडा

फरवरी 2018

Contets

सीरीज़ की भूमिका......................................................................................................... 4

अफ्रीका की लोक कथाएँ–1........................................................................................................................ 5

अफ्रीका की लोक कथाएँ–1........................................................................................................................ 7

1 चालाक बूढ़ा बिल्ला.................................................................................................... 9

2 पशुओं और पक्षियों की लड़ाई..................................................................................... 12

3 गिलहरी और शेर..................................................................................................... 16

4 तीन चूहे................................................................................................................ 21

5 बड़ा अंडू और छोटा अंडी........................................................................................... 29

मध्य अफ्रीका की लोक कथाएँ......................................................................................... 41

6 तैसे के लिये चाल.................................................................................................... 43

7 तालाब का रक्षक..................................................................................................... 59

8 ऐनगोम्बा और उसकी टोकरी...................................................................................... 65

9 बन्दर और खरगोश.................................................................................................. 75

उत्तरी अफ्रीका की लोक कथाएँ......................................................................................... 83

10 चतुर सँपेरा........................................................................................................... 85

सीरीज़ की भूमिका

लोक कथाएँ किसी भी समाज की संस्कृति का एक अटूट हिस्सा होती हैं। ये संसार को उस समाज के बारे में बताती हैं जिसकी वे लोक कथाएँ हैं। आज से बहुत साल पहले, करीब 100 साल पहले ये लोक कथाएँ केवल ज़बानी ही कही जातीं थीं और कह सुन कर ही एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को दी जाती थीं इसलिये किसी भी लोक कथा का मूल रूप क्या रहा होगा यह कहना मुश्किल है।

आज हम ऐसी ही कुछ अंग्रेजी और कुछ दूसरी भाषा बोलने वाले देशों की लोक कथाएँ अपने हिन्दी भाषा बोलने वाले समाज तक पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। इनमें से बहुत सारी लोक कथाएँ हमने अंग्रेजी की किताबों से, कुछ विश्वविद्यालयों में दी गयी थीसेज़ से, और कुछ पत्र्किाओं से ली हैं और कुछ लोगों से सुन कर भी लिखी हैं। अब तक 1200 से अधिक लोक कथाएँ हिन्दी में लिखी जा चुकी हैं। इनमें से 400 से भी अधिक लोक कथाएँ तो केवल अफ्रीका के देशों की ही हैं।

इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि ये सब लोक कथाएँ हर वह आदमी पढ़ सके जो थोड़ी सी भी हिन्दी पढ़ना जानता हो और उसे समझता हो। ये कथाएँ यहाँ तो सरल भाषा में लिखी गयी है पर इनको हिन्दी में लिखने में कई समस्याएँ आयी है जिनमें से दो समस्याएँ मुख्य हैं।

एक तो यह कि करीब करीब 95 प्रतिशत विदेशी नामों को हिन्दी में लिखना बहुत मुश्किल है, चाहे वे आदमियों के हों या फिर जगहों के। दूसरे उनका उच्चारण भी बहुत ही अलग तरीके का होता है। कोई कुछ बोलता है तो कोई कुछ। इसको साफ करने के लिये इस सीरीज़ की सब किताबों में फुटनोट्स में उनको अंग्रेजी में लिख दिया गया हैं ताकि कोई भी उनको अंग्रेजी के शब्दों की सहायता से कहीं भी खोज सके। इसके अलावा और भी बहुत सारे शब्द जो हमारे भारत के लोगों के लिये नये हैं उनको भी फुटनोट्स और चित्रें द्वारा समझाया गया है।

ये सब कथाएँ “देश विदेश की लोक कथाएँ” नाम की सीरीज के अन्तर्गत छापी जा रही हैं। ये लोक कथाएँ आप सबका मनोरंजन तो करेंगी ही साथ में दूसरे देशों की संस्कृति के बारे में भी जानकारी देंगी। आशा है कि हिन्दी साहित्य जगत में इनका भव्य स्वागत होगा।

सुषमा गुप्ता

मई 2016

अफ्रीका की लोक कथाएं–1

संसार में सात महाद्वीप हैं – एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, अन्टार्कटिका, यूरोप और आस्ट्रेलिया – सबसे पहले सबसे बड़ा और सबसे बाद में सबसे छोटा। इस तरह अफ्रीका साइज़ और जनसंख्या दोनों में एशिया से दूसरे नम्बर पर आता है। अफ्रीका की जनसंख्या 1 बिलियन से ज्यादा है और उनमें से भी इसमें 50 प्रतिशत जनता 20 साल की उम्र से कम की है। इस तरह से यह दुनियाँ का सबसे ज़्यादा जवानों का महाद्वीप है।

इस महाद्वीप में संसार के सातों महाद्वीपों में सबसे ज्यादा देश हैं – 54 देश। मिश्र, इथियोपिया, यूगान्डा, तनज़निया, केन्या, दक्षिण अफ्रीका, ज़िम्बाब्वे और नाइजीरिया यहाँ के जाने माने देशों में आते है। इस महाद्वीप में संसार का सबसे बड़ा रेगिस्तान भी है – सहारा रेगिस्तान। इसने अफ्रीका का 25 प्रतिशत हिस्सा घेरा हुआ है। इसकी मुख्य नदियाँ हैं नील नदी, ज़ाम्बेज़ी नदी, कौंगो नदी। इसकी मुख्य झील है विक्टोरिया झील जो तीन देशों में बँटी है – केन्या, यूगान्डा और तनज़ानिया। नील नदी इस विक्टोरिया झील से यूगान्डा के उत्तर की तरफ से निकलती है और उत्तर की तरफ ही चली जाती है। इसका मुख्य पहाड़ है किलिमन्जारो जो तनज़ानिया में है। इसमें तीन ज्वालामुखी चोटियाँ हैं।

इसके इथियोपिया देश को “तेरह महीने की धूप का देश” पुकारा जाता है। इसके लिसोठो देश को “आकाश में राज्य” नाम से पुकारा जाता है। [1] इसके मिश्र देश के पिराामिडों को कौन नहीं जानता। वे संसार के आठ आश्चर्यों में से एक हैं।

बहुत बड़ा होने की वजह से इसमें पूर्व से ले कर पश्चिम तक और उत्तर से ले कर दक्षिण तक बहुत भिन्नता है – खाने में, पीने में, पहनने में, रहने सहने में, लोगों की शक्लों में, भाषा में। पर एक बात सबमें एक सी है कि यहाँ के बहुत सारे देश फुटबाल खेलते हैं। यहाँ की जनसँख्या में ईसाई और मुसलमान करीब आधे आधे हैं।

इस महाद्वीप का अपना लिखा साहित्य और इसके बारे में लिखा साहित्य और दूसरे महाद्वीपों की तुलना में बहुत कम मिलता है इसी वजह से हमने इस महाद्वीप की लोक कथाएँ हिन्दी भाषा में प्रस्तुत करने का विचार किया हैइस महाद्वीप से हमने 400 से भी अधिक लोक कथाएँ इकठ्ठी की हैं। अफ्रीका के 54 देशों में से केवल कुछ ही देशों की ही लोक कथाएँ ज़्यादा मिलती हैं – नाइजीरिया, घाना, मिश्र, ज़ंजीबार, पश्चिमी अफ्रीका, दक्षिणी अफ्रीका, इथियोपिया आदि। इसलिये इन देशों की लोक कथाए इन देशों के नाम से ही दी गयीं हैं। दूसरे, अफ्रीका में नाइजीरिया और घाना देशों की लोक कथाओं में अनन्सी मकड़े, खरगोश और कछुए का अपना एक अलग ही स्थान है इसलिये इन तीनों की लोक कथाएँ भी अलग से ही दी गयीं है।

इन सब देशों की अपनी अपनी लोक कथाएँ है और अपनी अपनी दंत कथाएँ हैं। उदाहरण के लिये नाइजीरिया की योरुबा जनजाति की दंत कथाओं के अनुसार दुनियाँ का पहला आदमी नाइजीरिया के एक शहर इले–इफे में पैदा हुआ था इसलिये दुनियाँ यहीं से शुरू होती है और यहाँ की सभ्यता दुनियाँ की हर सभ्यता से पुरानी है। उधर इथियोपिया में करीब साढ़े तीन मिलियन साल पुराना एक ढाँचा ऐसा मिला है जिससे ऐसा लगता कि दुनियाँ का सबसे पुराना आदमी यहीं था। मिश्र के पिरामिडों को कौन नहीं जानता।

इस पुस्तक में अफ्रीका की कुछ ऐसी लोक कथाओं का संग्रह है जिनके बारे में या तो यह निश्चित नहीं है कि वे उसके किस देश की हैं और या फिर वे उन देशों की हैं जिनकी लोक कथाएँ इतनी कम हैं कि उनको किसी अलग पुस्तक में प्रकाशित करना सम्भव नहीं है। इसमें मध्य अफ्रीका और उत्तरी अफ्रीका के सभी देशों को शामिल कर लिया गया है क्योंकि वहाँ की लोक कथाएँ बहुत कम हैं। मिश्र की लोक कथाएँ उस देश के नाम से ही दी गयी हैं।

आशा है कि ये लोक कथाएँ तुम लागों को पसन्द आयेंगी और अफ्रीका के बारे में बहुत कुछ जानकारी देंगी। सो प्रस्तुत है तुम्हारे हाथों में यह अफ्रीका की लोक कथाओं का पहला सग्रह – “अफ्रीका की लोक कथाएँ–1”।

संसार के सात महाद्वीप

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Principal Countries of Africa

North Africa (6)

(1) Algeria (2) Egypt (3) Libya (4) Morocco (5) Tunisia (6) Western Sahara

East Africa (8)

(1) Djibouti (2) Eritrea (3) Ethiopia (4) Kenya (5) Madagascar (6) Sudan (7) Tanzania (8) Uganda

Southern Africa (10)

(1) Botswana (2) Lesotho (3) Malawi (4) Moratius (5) Mozambique (6) Namiba (7) South Africa (8) Swaziland

(9) Zambia (10) Zimbabwe

West Africa (16)

(1) Benin (2) Burkina Faso (3) Cape Verde (4) Ivory Coast (5) Gambia (6) Ghana (7) Guinea (8) Guinea-Bissau (9) Liberia (10) Mali (11) Mauritania (12) Niger (13) Nigeria (14) Senegal (15) Sierra Leone (16) Togo and Dahomey

Central Africa (7)

(1) Angola (2) Cameroon (3) Central African Republic (4) Chad (5) Congo (6) Gabon (7) Zaire

Folktales of highlighted countries are given under their own titles.

अफ्रीका की लोक कथाएँ–1

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1 चालाक बूढ़ा बिल्ला[2]

एक बार एक समय में अफ्रीका में एक जवान बिल्ला रहता था। वह बहुत तेज़ था, बहुत ताकतवर था और हमेशा ही उसके पास बहुत सारा खाना रहता था। वह वहाँ का सबसे अच्छा चूहे पकड़ने वाला था सो सारे चूहे उससे बहुत डरते थे।

धीरे धीरे वह बिल्ला बूढ़ा हो गया। उम्र के साथ साथ वह शरीर से भी कमजोर होता गया और उसके शरीर की तेज़ी भी खत्म होती गयी। इस वजह से अब उसको कभी कभी खाना भी नहीं मिलता था और उसको भूखे ही रह जाना पड़ता था।

पहले चूहे जब भी उसको आते देखते थे तो भाग जाते थे और छिप जाते थे परन्तु अब जबसे वह बूढ़ा हो गया था तबसे न उनको उससे भागने की जरूरत थी और न ही छिपने की।

अब वह खड़े खड़े देखते रहते, हँसते रहते। बूढ़ा बिल्ला बेचारा इतना कमजोर हो गया था कि वह उनके पास होते हुए भी उनको नहीं पकड़ सकता था।

एक दिन जब बिल्ला बहुत भूखा था तो उसने अक्लमन्दी से चूहा पकड़ने की सोची। वह एक जगह जा कर अपनी पीठ के बल बिना हिले डुले लेट गया। उसको ऐसे शान्त लेटा देख कर चूहे उसके पास आये और हँसने लगे।

चूहों ने सोचा कि “अरे आज बिल्ले को क्या हो गया यह तो हमको पकड़ने की कोशिश भी नहीं कर रहा है। ” पर फिर भी बिल्ला न बोला और न हिला।

धीरे धीरे एक छोटी चुहिया उसके पास तक पहुँच गयी और उसको छू कर तुरन्त ही दूसरे चूहों के पास वापस आ गयी। पर बिल्ले ने सोच रखा था कि आज वह बिल्कुल नहीं हिलेगा सो वह बिल्कुल भी नहीं हिला।

उसको इस तरह शान्त लेटा देख कर चूहों की हिम्मत बढ़ गयी। उनमें से एक चूहा बोला — “लगता है कि यह बिल्ला आज मर गया। ”

बस फिर क्या था चूहे धीरे धीरे उसके पास आने लगे। फिर वे एक एक करके उसके शरीर पर चढ़ कर खेलने लगे। वे कभी आगे जाते, कभी पीछे जाते। इस तरह दौड़ते हुए वे हँस भी रहे थे पर वह बिल्ला न कुछ बोला और न हिला।

एक बार एक चूहा भागते भागते बिल्ले के सिर तक पहुँच गया और हँस हँस कर नाचने लगा “आहा, बिल्ला तो मर गया। आहा, बिल्ला तो मर गया। ”

पर तभी बिल्ले ने आँख खोली और उस चूहे को मुँह में दबा लिया। दो चूहे उसने अपने दोनों अगले पंजों में पकड़ लिये।

उस रात उन दो चूहों से उसकी खूब अच्छी दावत हुई। अगली कुछ रातों में भी उसने खूब खाना खाया। उसके खाने में वे बेवकूफ चूहे होते थे जो यह सोचते थे कि वह मर गया है और वे उसके पास तक आ जाते थे।

कभी कभी बिल्ले की तरह से झूठ बोलना भी फायदा करता है।

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[1] “Land of Thirteen Months of Sunshine” and “Kingdom in the Sky”

[2] Sly Old Cat – a folktale from Africa. Adapted from the Web Site :

http://www.mikelockett.com/stories.php?action=view&id=192

Retold by Mike Lockett

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से सैकड़ों लोककथाओं के पठन-पाठन का आनंद आप यहाँ रचनाकार के लोककथा खंड में जाकर उठा सकते हैं.

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