"अनकही अनुभूतियों का सच”: एक विहंगावलोचन // हरिशंकर भट्ट

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"अनकही अनुभूतियों का सच”: एक विहंगावलोचन

अनकही अनुभूतियों का सच

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रचनाकार - अरविन्द भट्ट

प्रकाशक - अंजुमन प्रकाशन इलाहाबाद
मूल्य- रुपये 200

अमेज़न लिंक


जीवन के रेतीले रेगिस्तान में अनुभूतियों के नखलिस्तान से मन्द मन्द प्रवाहित होने वाली शीतल पयस्विनी में स्नात मन-भृंग मदमस्त हो, जब स्वर सरगम की वीणा को लेखनी के सहारे झंकृत करने को उद्धत हो उठता तो उससे सहज प्रवाहमान काव्यधारा कवि के वैयक्तिक जीवन के प्राचीर से बाहर निकल उसके अपने परिवार, परिवेश समाज को लांघते फांदते हुए उन्मुक्त भाव से सम्पूर्णत्व को समेट लेती है। रचना धर्मिता की यह सहज प्रकृति क्रमशः विकास के सोपानों से होते हुए रचनाकार के व्यक्तित्व को भी व्यापक फलक प्रदान करती है।

अनकही अनुभूतियों का सच रचनाकार श्री अरविंद भट्ट की 52 काव्यात्मक रचनाओं के प्रथम संकलन के रूप मे मुझे देखने को मिला। इसमें संकलित कविताएं श्री भट्ट की सहज भावुक प्रकृति स्वाभाविकरूप से नि:सृत, सृजित और संकलित हैं जिसके पीछे प्रयोजन की न तो कोई पूर्व पीठिका दीखती है , न प्रबंधन की कोई पहले से तैयार भूमिका। यहाँ है तो केवल और केवल अनुभूति का प्रवाह वेग जो कवि की सहृदयता से लेखनी के सहारे स्वर-वर्ण-शब्द-वाक्य से होता हुआ कविता की यति-गति में ढलकर भविष्य के प्रखर कवि के रूप में श्री अरविन्द जी के व्यक्तित्व की झलक प्रस्तुत करने को मानो उद्धत है।

संकलन में "अधिग्रहण" का जोधना, "धुन्ध" में गहराई तक पैठा एहसास, तो "24×7" मे टी.वी. चैनल्स की जीवन फलक पर पड़ते प्रभाव, "कृष्ण" में पारंपरिक अवधारणा के साथ कवि की अपनी स्वयं की तार्किकता का मनमोहक गुम्फन रचनाकार की नूतन संकल्पना को आधुनिकता के फलक पर सहज प्रस्तुति को सक्षम सबल और आकर्षक बनाती है। "कर्ण", "सम्बन्ध", "परिवर्तन" तथा "अहमियत" में पिरोई हुई मनोवैज्ञानिक सोच भी अभिसंशनीय है। इस प्रकार प्रथम कृति के रूप में "अनकही अनुभूतियों का सच" काव्य संकलन जहाँ एक ओर पाठक के मानस पटल पर कवि की सशक्त छवि छोड़ने में सक्षम है वहीं दूसरी ओर श्री अरविंद की रचनाकार के रूप में विकासमान व्यक्तित्व को भी प्रतिस्थापित करती है।


हरिशंकर भट्ट

लेखक, समीक्षक, सेवानिवृत्त संयुक्त सचिव

उत्तर प्रदेश सचिवालय, लखनऊ

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कवि-परिचय

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30 जनवरी 1981 को उत्तर प्रदेश में सुल्तानपुर जिले के कादीपुर तहसील के ज़फरपुर गाँव में जन्मे अरविन्द भट्ट पेशे से बहुराष्ट्रीय कंपनी में टेक्निकल आर्किटेक्ट (सॉफ्टवेयर) के पद पर हैं. अरविन्द भट्ट एक उदीयमान लेखक हैं. लेखन इनके विरासत में है. ‘अनकही अनुभूतियों का सच’ इनका प्रथम काव्य संग्रह है. साहित्य और लेखन की अपनी विरासत को आगे बढ़ाते अरविन्द को वस्तुतः ख़ुद के लिए कवि या लेखक के उपनामों से गुरेज़ है. इनके शब्दों में “...मैं अपने मन में चलने वाले विचारों को, अपनी सोच को मात्र एक वाक्य विन्यास में व्यवस्थित करने का प्रयत्न करता हूँ कदाचित, अगर यही कविता है तो हाँ मैं कवितायेँ लिखता हूँ...”. जीवन को जीवन्तता प्रदान कर सकें ऐसी बहुधा सभी चीज़ें इनकी रुचियों की फेहरिस्त में शामिल हैं मसलन यात्रा, फोटोग्राफी, कविता पठन और खेल कूद आदि. इलेक्ट्रोनिक गैज़ेट, पेन, घड़ी और किताबों का संग्रहण इनका प्रिय शगल है. प्रकृति और आध्यात्मिकता अरविन्द के लिए एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और इनके लिए ईश्वर की अनुभूति का साधन भी.

माता/पिता – श्रीमती मनोरमा भट्ट/श्री ओम प्रकाश भट्ट

शिक्षा – B.Sc.(कंप्यूटर साइंस) लखनऊ यूनिवर्सिटी, M.Sc.(सॉफ्टवेयर) इलाहबाद यूनिवर्सिटी

सृजन – यात्रा वृतांत, कविता, आर्टिकल, संस्मरण

प्रकाशन – दैनिक जागरण, राष्ट्रीय सहारा, निष्कर्ष, कथा समवेत, अभिनव प्रसंगवश.

स्थायी पता – 108 स्वप्नलोक कॉलोनी , कमता, चिनहट, लखनऊ , उत्तर प्रदेश, 2226028

वर्तमान पता – F2-763, गौर होम्स, गोविन्दपुरम, गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश, 201013

Emailarvindkrbhatt@gmail.com,

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