मौत का जन्म // पश्चिमी अफ्रीका की लोककथाएँ // सुषमा गुप्ता

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  देश विदेश की लोक कथाएँ — पश्चिमी अफ्रीका–1 :

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पश्चिमी अफ्रीका की लोक कथाएँ–1

बिनीन, बुरकीना फासो, केप वरडे, गाम्बिया, गिनी, गिनी बिसाऔ, आइवरी कोस्ट, लाइबेरिया,


संकलनकर्ता

सुषमा गुप्ता


5 मौत का जन्म[1]

यह लोक कथा पश्चिमी अफ्रीका के गिनी देश में कही सुनी जाती है। यह कथा संसार की रचना के बारे में है।

शुरू शुरू में जब तक कुछ भी पैदा नहीं हुआ था तो दुनिया में केवल अँधेरा ही अँधेरा था। लेकिन उस समय “सा”[2] यानी मौत अपनी पत्नी और अपनी बेटी के साथ मौजूद था।

सा एक बहुत बड़ा जादूगर भी था और जब भी वह चाहता तो अजीब अजीब चीज़ें बना देता था। एक दिन सा ने कीचड़ का समुद्र बनाने का निश्चय किया और उसे बना भी दिया।

उसी समय अलटन्गाना[3] भगवान उससे मिलने के लिये आये तो उन्होंने सा से कहा — “यह तुमने कितनी गन्दी जगह बना रखी है। इतनी गन्दी जगह में तुम रहते कैसे हो? यहाँ कोई रोशनी नहीं है, तुम्हारे पास कोई पौधा नहीं है, तुम्हें मालूम है कि तुम इस कीचड़ में डूब भी सकते हो?”

पर सा ने अलटन्गाना से कहा कि वह जो कुछ कर सकता था उसने किया। वह इससे अच्छा कुछ बना ही नहीं सकता था। सो अलटन्गाना ने उसको उससे अच्छी दुनिया बनाने में सहायता की।

भगवान ने उस कीचड़ को और मजबूत बनाया ताकि उसके ऊपर पैर रखा जा सके। पर अकेले कीचड़ में तो कोई ज़िन्दगी नहीं थी सो उसने तारे बनाये, पौधे बनाये और सब तरह के जानवर बनाये।

तब सा ने कहा — “यह तो बड़ा सुन्दर है। अब दुनिया पहले से ज़्यादा हरी है और ज़िन्दगी से भरी हुई दिखायी देती है। मुझे इस में यह तरक्की अच्छी लगी। हमें और तुम्हें दोस्त हो जाना चाहिये। ”

सो सा और अलटन्गाना की दोस्ती हो गयी। सा ने उसकी खूब खातिरदारी की, खिलाया पिलाया और फिर दोनों ने बहुत सारी बातें की। अब दोनों अक्सर मिलने लगे थे और उनकी दोस्ती भी बढ़ने लगी थी।

अलटन्गाना कुँआरा था। समय गुजरता गया। अलटन्गाना ने एक दिन सा से शादी करने के लिये उसकी बेटी का हाथ माँगा। पर सा अपनी बेटी की शादी नहीं करना चाहता था क्योंकि वह अपनी अकेली बेटी से अलग नहीं होना चाहता था।

सा ने बहुत तरीके के बहाने किये कि अलटन्गाना को उसकी बेटी से शादी क्यों नहीं करनी चाहिये पर अलटन्गाना और सा की बेटी एक दूसरे को प्यार करते थे सो अलटन्गाना नहीं माना।

आखीर में जब सा इस शादी पर राजी नहीं हुआ तो अलटन्गाना ने उसकी बेटी से चोरी छिपे शादी कर ली।

अलटन्गाना और सा की बेटी आपस में बहुत खुश थे। उनके 14 बच्चे हुए – 7 लड़के और 7 लड़कियाँ। उनमें से 4 लड़के और 4 लड़कियाँ एक जाति के थे पर दूसरे 3 लड़के और 3 लड़कियाँ उनसे अलग थे।

माता पिता यह देख कर बहुत ही हैरान थे कि दोनों कितने अलग थे। इसके अलावा वे आपस में भी अलग अलग भाषा बोलते थे। उनके माता पिता उनकी भाषा नहीं समझते थे। अलटन्गाना इस बात से बहुत नाराज था और वह सा से पूछने गया कि ऐसा क्यों था।

उसने सा से पूछा — “ऐसा क्यों है कि मेरे तुम्हारी बेटी के साथ जो बच्चे पैदा हुए हैं वे सब अलग अलग हैं। वे अलग अलग भाषा बोलते हैं जो हम नहीं समझ सकते। क्या तुमने उनको ऐसा बनाया है?”

सा बोला — “हाँ। मैंने ही उनको ऐसा बनाया है कि वे देखने में भी अलग अलग हैं और भाषा भी अलग अलग बोलते हैं। यह मेरी एकलौती बेटी को बिना मेरी इच्छा के और बिना दहेज दे कर ले लेने की तुम्हारी सजा है। तुम कभी नहीं समझोगे कि वे क्या बोलते हैं। ”

अलटन्गाना बोला — “तुमको अपना यह शाप मेरे बच्चों के ऊपर से हटाना पड़ेगा। ”

सा ने जवाब दिया — “मुझे अफसोस है अलटन्गाना, अब बहुत देर हो चुकी है। पर क्योंकि वे मेरे भी बच्चे हैं इसलिये मैं उनको ऐसी भेंटें दूँगा ताकि वे अपनी ज़िन्दगी खुशी से गुजार सकें।

कुछ को मैंने कागज, स्याही और अक्लमन्दी दी है। इस तरह से वे जो कुछ भी सोचते हैं अपने भाइयों, बहिनों और बच्चों के लिये लिख पायेंगे। अब तुम जाओ और उनके एक जैसे लड़के और लड़की के जोड़े बनाओ और उनको दुनिया बसाने के लिये भेज दो। ”

अलटन्गाना यह सुन कर बहुत खुश हुआ कि सा ने कम से कम इतनी धीरज से उससे बात तो की हालाँकि उसने तो उसकी बेटी को उड़ा ही लिया था। इसलिये सा ने उससे जो कुछ कहा वह उसने मान लिया।

वह तुरन्त ही अपने घर गया, सा के बताये अनुसार बच्चों के जोड़े बनाये और उनको दुनिया के सारे हिस्सों में भेज दिया। वहाँ जा कर उन्होंने अलग अलग जातियों के बहुत सारे बच्चे पैदा किये।

इतना सब कुछ होने के बाद भी दुनिया में अभी भी अँधेरा था। सो अलटन्गाना ने एक मुर्गा सा के पास भेजा और उस मुर्गे से कहा — “जब तुम सा के पास पहुँचो तो उससे पूछना कि हमको और ज़्यादा रोशनी के लिये क्या करना चहिये क्योंकि इन तारों की रोशनी दुनिया के लिये काफी नहीं है और यह दुनिया अभी भी अँधेरे में है। ”

जब सा ने अलटन्गाना का दूत देखा तो उसको अपनी बेटी की याद फिर से आ गयी। वह अलटन्गाना से तो अभी तक गुस्सा था पर अपनी बेटी के प्यार की वजह से उसका गुस्सा कुछ कम था।

सा उस मुर्गे से बोला — “तुम बहुत लम्बी यात्र करके आये हो थोड़ा आराम कर लो तब तक मैं सोचता हूँ कि अलटन्गाना के अँधेरे के बारे में क्या करना चाहिये। ”

मुर्गे ने जब आराम कर लिया तो सा ने उसको अलटन्गाना के पास यह कहते हुए वापस भेज दिया — “जब तुम वहाँ पहुँचो तो तुम पूर्व की तरफ अपना मुँह करना और यह गाना गाना “कोको रो ओको ओ”[4]। यह सुन कर तारों का राजा जाग जायेगा और दिन हो जायेगा और लोग अपना काम पूरी रोशनी में कर पायेंगे। ”

मुर्गा यह सुन कर बहुत खुश हुआ कि उसके पास तारों के राजा को जगाने की ताकत थी। उसने सा को धन्यवाद दिया और इस खबर के साथ अलटन्गाना के पास जल्दी जल्दी वापस गया।

जब उसने अपनी लम्बी यात्र से आराम कर लिया तो उसने पूर्व की तरफ अपना मुँह किया और सा का बताया गीत गाया – “कोको रो ओको ओ”।

उसी समय आसमान में हल्की सी रोशनी दिखायी दी। कुछ पल के बाद मुर्गे ने वह गीत फिर से गाया तो उसको लगा कि किसी का हाथ फैला हुआ है और बस तारों का राजा सूरज जाग गया।

इस तरह पहला दिन शुरू हुआ। सूरज मुर्गे की पुकार का जवाब दे रहा था। मुर्गा सारा दिन उसको पुकारता रहा और वह सारा दिन उसकी पुकार का जवाब देता हुआ सारा आसमान पार कर गया।

जब मुर्गा सूरज को पुकारते पुकारते थक गया और उसने उसको पुकारना बन्द कर दिया तो सूरज भी धरती के दूसरी तरफ सोने चला गया और फिर से अँधेरा छा गया।

उसी समय लोगों की उनके देखने में सहायता करने के लिये चाँद और तारे निकल आये क्योंकि सूरज सोने चला गया था।

एक दिन सा अलटन्गाना से मिलने गया और बोला — “इसके बावजूद कि तुमने मेरी बेटी को मुझसे दूर कर दिया है मैंने तुमको रोशनी दी पर तुमने मुझे मेरी मेहरबानियों के बदले में कुछ नहीं दिया।

तुमने तो मेरी बेटी के बदले में दहेज भी नहीं दिया। मेरे इन कामों के बदले में तुमको मेरी एक सेवा करनी पड़ेगी। ”

अलटन्गाना सा से बोला — “यह तो तुम ठीक कहते हो। तुम जो कुछ भी तुम चाहो मैं वह तुम्हारे लिये करूँगा। ”

सा बोला — “ठीक है। क्योंकि तुमने मेरी बेटी बिना दहेज दिये ही ले ली है और अब मेरे पास कोई बच्चा नहीं है सो उसके बदले में तुमको मुझे मेरा एक पोता या पोती देनी होगी जिसको मैं जब चाहूँ बुला सकूँ।

जब भी मैं किसी को बुलाना चाहूँगा तो मैं उसको अपने कैलेबाश[5] की एक आवाज पर बुला लूँगा। जो भी मेरे कैलेबाश के बजने की आवाज अपने सपने में सुनेगा उसको तुरन्त मेरे पास मेरी उस पुकार का जवाब देने के लिये आना पड़ेगा। ”

अपना वायदा पूरा करने के लिये अलटन्गाना के पास और कोई चारा नहीं था कि वह अपने बच्चों को सा की पुकार पर उसके पास भेजे, जब भी वह पुकारे।

सो आज भी अलटन्गाना के बच्चे सा की पुकार का जवाब देते हैं। वे जब भी सपने में कैलेबाश के बजने की आवाज सुनते हैं उनको सा के पास जाना पड़ता है चाहे वे चाहें या न चाहें।

यह सब इसलिये हो रहा है क्योंकि अलटन्गाना ने जब सा की बेटी से शादी की थी तो उसको दहेज नहीं दिया था।


[1] The Origin of Death – a Kono folktale from Guinea (pronounced as Ginee), West Africa

Adapted from the Book “The Orphan Girl and the Other Stories”, by Offodile Guchi. 2001.

[2] Sa – Death

[3] Alatangana – God

[4] Koko Ro Oko O – if spoken it sounds like Indian “Kukadoo Koo”

[5] Dry outer cover of a pumpkin-like fruit which can be used to keep both dry and wet things – mostly found in Africa. See its picture above.

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से सैकड़ों लोककथाओं के पठन-पाठन का आनंद आप यहाँ रचनाकार के  लोककथा खंड में जाकर उठा सकते हैं.

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