सुधा गोयल ‘नवीन’ की 2 लघुकथाएँ

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

(2 लघु कथाएँ)

सुधा गोयल ‘नवीन’

कर्तव्य - बोध

सड़क पर पड़ा वह कराह रहा था।  चारों ओर भीड़ इकट्ठा हो गई थी। नई चमचमाती "डस्टर" गाड़ी उस मासूम को लगभग कुचलते हुए हवा में फुर्र हो गई थी। रास्ते से गुज़रते हुए पुलिस वाले को कर्तव्य बोध हुआ और डंडा घुमाते हुए भीड़ को चीर कर वह पीड़ित तक पहुंचा।  बच्चे के पूरे शरीर से खून रिस रहा था। पुलिस वाला चिल्लाया,

" किसने मारा" 

" गाड़ी का नंबर क्या था?"

"कितने बजे की घटना है?

" गाड़ी में कितने लोग थे?"

"गाड़ी की स्पीड बहुत तेज़ थी क्या?"

भीड़ में से किसी ने आवाज़ लगाई,

"सर…… इस समय इसे अस्पताल ले जाने की ज्यादा ज़रूरत है। "

पुलिस वाला भड़क गया।  "को है साला … हमें हमारा काम सिखाता है। कर्तव्य-बोध दे रहा है। पकड़ो साले को... "

जोर से डंडा ज़मीन पर पटकते हुए पुलिस वाले ने फिर से प्रश्नों की झड़ी लगा दी।

"क्यों?

' कैसे?"

"कहाँ?"

बच्चे के सिर, पैर, पेट से बेतहाशा खून बह रहा था।  धीरे-धीरे उसने दम तोड़ दिया।

प्रश्न बदस्तूर जारी रहे।


                             *******************

माँ-बेटी

शीना मर्डर केस पर पुलिस कार्यवाही की रिपोर्ट टी वी पर आ रही थी। सारे सबूतों और गवाहों पर गौर करते हुए पुलिस का शक शीना की माँ इन्द्राणी मुखर्जी पर था। शक ही क्या उन्हें पूरा विश्वास हो चला था कि इन्द्राणी ने ही अपने दूसरे पति के साथ मिलकर अपने पहले पति की बेटी शीना की गला दबा कर ह्त्या की है। शीना पर अपनी माँ को ब्लैक मेल करने का आरोप लगाया जा रहा था।  जब से खबर फैली थी, दुनिया के सबसे पवित्र माँ-बेटी के रिश्ते पर प्रश्नचिन्ह लग रहा था, कलयुग की दुहाई दी जा रही थी। मैंने टी वी बंद कर दिया। विचारों के झंझावात में डूब-उतरा रही थी कि फोन की घंटी ने ध्यान भंग किया। रिसीवर उठाया तो साधना की आवाज आई।

" सुधी…… विधु की खबर सुनी?"

"हां सुनी।  डेंगू बुखार ने असमय उसके पति को उससे छीन लिया। "

"उससे भी बड़ी खबर?"

"वह क्या?"

"विधु ने पति की चिता को मुखाग्नि देने का अधिकार अपने जेठ-देवर के बेटों को नहीं दिया। उसने कहा कि उसका कोई बेटा नहीं है तो क्या, बेटी तो है, वही अपने पिता के सारे क्रिया-कर्म करेगी।"

"पर भला क्यों? हमारे शास्त्रों में तो लिखा है कि यदि बेटा नही है तो परिवार का कोई बेटा ही यह धर्म, दायित्व निभाता है।" मैंने अपनी जानकारी व्यक्त की।

"जिम्मेदारी या दायित्व उठाने का मतलब होता है, सारी जिंदगी के दुःख-सुख में साथ देना, भरण-पोषण करना, शादी-ब्याह में हाथ बँटाना। क्या आज अपने परिवार के अतिरिक्त किसी और की जिम्मेदारी कोई निभाता है? नहीं  ना……।"

साधना ने जग-बीती बयान की, फिर बोली,

"विधु ने कहा वह अपने पैरों पर खड़ी है, और आगे जो भी संभालना होगा बेटी ही करेगी, फिर शास्त्रों में लिखे का बोझ वह अपने कंधे पर क्यों उठाये। उसकी बेटी ने भी हवन-कुण्ड की जलती ज्वाला के सम्मुख परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए पगड़ी की तरह की एक रस्म,  शॉल ओढ़ने की रस्म स्वीकार की। कौन कहता है नारी कमज़ोर है।

परिवार में दो गुट हो गए। कुछ लोगों को विधु की हठधर्मिता पर ऐतराज़ था, उन्होंने क्रिया-कर्म में शामिल होने से परहेज़ किया और कुछ ने विधु की पीठ थपथपाई।  कुछ ने कहा पंडित जी बिक गए हैं तो कुछ ने पंडित जी के आधुनिक विचारों, समय की मांग और समय के साथ चलने के कारण उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा की।"

मैंने पूछा,"तू क्या सोचती है साधना?"

वह बोली, "समय की मांग तो यही कहती है कि शास्त्रों का विवेचन नए ढंग से होना चाहिए।"

रिसीवर रखा तो मन शांत हो चुका था। शीना और इन्द्राणी को लेकर जो मन में हाहाकार मचा हुआ था, थमने लगा।  रिश्तों पर से उठ जाने वाला मेरा विश्वास वापस लौटने की प्रतीक्षा कर रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे माँ-बेटी का पवित्र-पाक और पूज्य रिश्ता कलंकित होने से बच गया।

एक दीर्घ निःश्वास के साथ मैंने सोफे पर ही पैर फैला लिए और आंखें मूँद विधु-स्वाति के ख्यालों में खो गई।

सुधा गोयल ‘नवीन’

                                     ***************************************

सुधा गोयल " नवीन"


3533 सतमला विजया हेरिटेज फेस - 7

कदमा ,  जमशेदपुर  - 831005


इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से मास्टर्स (हिंदी )

'और बादल छंट गए " एवं "चूड़ी वाले हाथ" कहानी संग्रह प्रकाशित

आकाशवाणी से नियमित प्रसारण एवं कई पुरस्कारों से सम्मानित ...

झारखंड की चर्चित, एवं जमशेदपुर एंथम की लेखिका 

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

0 टिप्पणी "सुधा गोयल ‘नवीन’ की 2 लघुकथाएँ"

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.