रु. 25,000+ के  नाका लघुकथा पुरस्कार हेतु रचनाएँ आमंत्रित.

अधिक जानकारी के लिए यहाँ http://www.rachanakar.org/2018/10/2019.html देखें.

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

काव्य जगत // प्राची - जून 2018

साझा करें:

काव्य जगत विशेष नरेन्द्र मोदी की कविता मैं देश नहीं मिटने दूंगा, मैं देश नहीं झुकने दूंगा सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं देश नहीं मिटने दूंगा ...

काव्य जगत

विशेष

नरेन्द्र मोदी की कविता

clip_image002


मैं देश नहीं मिटने दूंगा, मैं देश नहीं झुकने दूंगा

सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं देश नहीं मिटने दूंगा

मैं देश नहीं मिटने दूंगा, मैं देश नहीं झुकने दूंगा

.

मेरी धरती मुझ से पूछ रही, कब मेरा कर्ज चुकाओगे

मेरा अम्बर मुझ से पूछ रहा, कब अपना फर्ज निभाओगे

मैंने वचन दिया भारत मां को, तेरा शीश नहीं झुकने दूंगा

सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं देश नहीं मिटने दूंगा,

मैं देश नहीं झुकने दूंगा, मैं देश नहीं झुकने दूंगा

.

वो लूट रहे हैं सपनों को, मैं चैन से कैसे सो जाऊं

वो बेच रहे हैं भारत को, खामोश मैं कैसे हो जाऊं

हां मैंने कसम उठाई है, हां मैंने कसम उठाई है

.

मैं देश नहीं बिकने दूंगा, सौगंध मुझे इस मिट्टी की,

मैं देश नहीं मिटने दूंगा, मैं देश नहीं झुकने दूंगा

मैं देश नहीं झुकने दूंगा...

.

वो जितने अंधेरे लायेंगे, मैं उतने उजाले लाऊंगा

वो जितनी रात बढ़ायेंगे, मैं उतने सूरज उगाऊंगा

इस छल फरेब की आंधी में, मैं दीप नहीं बुझने दूंगा

सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं देश नहीं मिटने दूंगा,

मैं देश नहीं झुकने दूंगा, मैं देश नहीं झुकने दूंगा

.

वो चाहते हैं जागे न कोई, बस रात का कारोबार चले

वो नशा बांटते जायें, और देश यूं ही बीमार चले

पर जाग रहा है देश मेरा, पर जाग रहा है देश मेरा

.

हर भारतवासी जीतेगा, सौगंध मुझे इस मिट्टी की,

मैं देश नहीं मिटने दूंगा, मैं देश नहीं झुकने दूंगा

मैं देश नहीं झुकने दूंगा.....

.

मां बहनों की किस्मत पर, गिद्ध नजर लगाये बैठे हैं

हर इन्सान है यहां डरा डरा, दिल में खौफ जमाये बैठे हैं

मैं अपने देश की धरती पर, अब देश नहीं मिटने दूंगा

सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं देश नहीं मिटने दूंगा,

मैं देश नहीं झुकने दूंगा

.

अब घड़ी फैसले की आई, हमने है कसम अब खाई

हमें फिर से दोहराना है, और खुद को याद दिलाना है

न भटकेंगे न अटकेंगे, कुछ भी इस बार,

हम देश नहीं मिटने देंगे

सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं देश नहीं मिटने दूंगा,

मैं देश नहीं झुकने दूंगा...

.-----


दोहे : हमने शब्दों को जिया

जय चक्रवर्ती

जीवन में है जब तलक, शेष एक भी साँस।

अनाचार, अन्याय की, काटूंगा हर फाँस।।

.

अभी हमारे पास है, जिन्दा एक जमीर।

अभी हमारी आँख में, बचा हुआ है नीर।।

.

रहें कलम की नोक पर, अक्षर यूँ आसीन।

जिन्दा हूँ इस बात का, मुझको रहे यकीन।।

.

मुँह से अक्षर एक भी, कभी न निकले व्यर्थ।

प्रभु! मेरे हर शब्द को, देना उसका अर्थ !!

.

हाथ पोंछकर जेब से, बाहर दिया निकाल।

मैं दुनिया के वास्ते, एक अदद रूमाल।।

.

धर्म और मजहब सभी, रख ले अपने पास।

मुझको दे दे प्यार का, थोड़ा-सा अहसास।।

.

शब्द रोशनी के दिये, हमने यहाँ बिखेर।

मुस्काने हर होंठ पर, होंगी देर-सवेर।।

.

कर लूँ तुझको जिंदगी, और तनिक अभिव्यक्त्त।

काश! वक्त दे दे मुझे, फिर से थोड़ा वक्त।।

.

झूठ और पाखंड से, जूझूँगा दिन-रात ।

मुझमें जिन्दा है अभी, कहीं एक सुकरात।।

.

हमने शब्दों को जिया, पग-पग खायी मात।

शब्द बेचकर तुम बने, नायक रातों-रात।।

.

एक अभावों की कथा, एक दर्द का गीत।

दोनों ने मुझको रचा, दोनों मेरे मीत।।

.

रखना प्रभो सहेज कर, मुझमें मेरी आग।

जिन्दा है इस आग में, मेरा जीवन-राग।।

.

पल-पल छूटी हाथ से, सम्बन्धों की डोर।

मैं एकाकी बावरा, रहा खोजता छोर।।

.

नहीं मान्य हरगिज हमें, चुप रहने की शर्त ।

बोलेंगे हम अन्त तक, खोलेंगे हर पर्त।।

.

अपना-अपना ले गये, हिस्सा सभी निकाल।

मुझमें अब कोई नहीं, मैं बिलकुल कंगाल।।

.

सब आये, सब चल दिये, छुड़ा छुड़ाकर हाथ।

एक अकेलापन रहा, सदा हमारे साथ।।

.

चली जिन्दगी-मौत की, कदम-कदम तकरार।

और अंततः जिन्दगी, गयी मौत से हार।।

.

सम्पर्कः एम.1/ 149, जवाहर विहार,

रायबरेली -229010 (उ.प्र.)

ई-मेलः jai-chakrawarti@gmail-com


रमेश मनोहरा की क्षणिकाएं

धारा

वे विकास की धारा

इस तरह बहाते हैं

उस धारा को वे

अपने घर की ओर

ले जाते हैं।

खिला हुआ

जो आदमी अपनी

जमीन से जुड़ा हुआ है

वो कमल के

फूल की तरह

खिला हुआ है।

मजबूरी

झूठ बोलना

उनकी मजबूरी है

यह सत्ता के लिए

बेहद जरूरी है।

संपर्क : शीतला माता गली,

जावरा, जिला- रतलाम (म.प्र.)


सर्वेश कुमार की कविता

clip_image004

मौत को जिया है

दर्द को पिया है

मौत को जिया है

हर शख्स से वाकिफ हूं

हर महफिल में सजा हूं

मधुशाला भी गया हूं

मदहोशी में रहा हूं

दोस्ती भी की है और

दुश्मनों में रहा हूं

भूख क्या होती है

दिन-रात देखी है।

हर रिश्ते को निभाया है

हर रिश्ते में बंधा हूं

घर में आराम से रहा हूं

बेघर भी रहा हूं

कभी लोगों के साथ

तो कभी बिल्कुल अकेले

अपनों से दूर

उनके पास भी रहा हूं

जिन्हें लोग अपना नहीं कहते

कभी जमीन पर

तो कभी बिस्तर पर सोया हूं

कभी ठंडक में मखमल के कम्बल

तो धरती माता के आंचल में ढका हूं

कभी अच्छे लोगों के साथ

तो कभी बुरे लोगों में फंसा हूं

छोटे और बड़ों में रहा हूं

नमक हक का अदा किया है

साधू-संतों में रहा हूं

ज्ञान पाखंडियों से लिया है

मंदिर मस्जिद भी गया हूं

कभी बदनाम

तो कभी मशहूर हुआ

सबकुछ जानते हुए

बेवकूफ भी बना हूं

न कहने की आदत कभी रही नहीं

हमेशा ‘हां’ में फंसा हूं

मिट्टी के घर बचपन में

बड़े अच्छे लगते थे

संगमरमर के फर्श पर

बहुत बार फिसल कर गिरा हूं

गांव में मां के हाथ की मीठी रोटियां

शहर में मैदे के जली रोटी खाकर रहा हूं

इश्क भी किया है

और कसूरवार भी रहा हूं।


अविनाश ब्यौहार की क्षणिकायें

1. सरकार की नींद

वादी ने

अदालत में

याचिका लगाकर

की ताकीद!

लेकिन सरकार की

खुलती नहीं

है नींद!!

2. नील का खेत

भटके को

रास्ता दिखाने

के लिये

कानून एक

बेंत है!

लेकिन ये

बात भी

उतनी ही

सही है

कि अदालत

नील का

खेत है!!

3. आशनाई

अभी तक

हम मानते थे

कि वकील और पुलिस

आम आदमी की

करती है भलाई!

पर इनसे

मित्रता रखना

गुर्ग आशनाई!!

संपर्क : रायल एस्टेट, माढ़ोताल,

कटंगी रोड, जबलपुर।


डॉ. ललितसिंह राजपुरोहित की कविता

कत्थई आँखों वाला शब्द

रातरानी की खुशबू में लिपटा हुआ

कत्थई आँखों वाला एक शब्द

डरा सहमा सा मेरे पास से गुजरा

गली के आखरी मुहाने पर ओझल हो जाने तक

मेरे आस-पास मंड़राता रहा

रातरानी की खुशबू में गूंथा हुआ

अजीब सा डर

कत्थई आँखों वाले शब्द के चेहरे पर

गली के नुक्कड़ पर पान की गुमटी में

डेरा जमाए हुए थे कुछ बदरंग शब्द

बिना किसी आहट

कर रहे थे पीछा

कत्थई आँखों वाले शब्द का

धुएँ के छल्ले बनाते हुए

कुछ मटमैले शब्द

अचानक सब कुछ थम सा गया

जब कत्थई आँखों वाला शब्द

खाकी रंग के शब्द के साथ

पलट कर लौटा पान की गुमटी की ओर

सारे मटमले शब्द छूमंतर हो गए

और

बदरंग शब्द बदल गए

रूई के फाये से सफेद रंग में।

संपर्क : अधिकारी (रा.भा.)

मंगलूर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड,

कर्नाटक, पोस्ट : कुत्तेतूर

वाया काटिपल्ला-575 030

मंगलूरु (कनार्टक)

---


राकेश शर्मा की कवितायें

कविता में माँ

माँ तुम्हें

रचने के लिए कविता में

भटकता हूँ

शब्दों की मृगमरीचिका

बार-बार शब्दकोश खंगाल कर

लौटता है मन, खाली हाथ

नहीं मिलते है वे विराट शब्द

जिनमें समा जाए

असहाय प्रतीत होती है भाषा

तुम्हें कविता में रचते समय

यही होता है बार-बार

उम्र के हर मोड़ पर

सघन पीड़ा के क्षणों में

सर्वव्याप्त सत्ता की तरह

उपजती है तुम्हारी याद

माँ! तुम्हें नहीं रचा जा सकता

कविता में

शब्द होकर भी

शब्दातीत हो तुम।।.

आवरण

देखकर आवरण

मत पालो विचार।

छिपाने के लिए विद्रूपताएँ

ओढ़े जाते हैं आवरण।

दिख सके सौम्य

ठग सकें दूसरों को

इसलिए आदमी

ओढ़ता है आवरण।

आवरण ही तो हैं

जिन्हें ओढ़कर

मनुष्य कहलाता है सभ्य

जिसे नहीं होती है समझ

आवरण ओढ़ने की

सभ्य होते हुए भी

खा जाता है मात।

आवरण वस्तुओं के ही नहीं

शब्दों के भी होते हैं

शब्दों के आवरण

होते हैं अधिक घातक

शब्द कहलाता है ब्रह्म

शब्दों से ओढ़ा गया आवरण

बन जाता है ब्रह्मास्त्र।


सम्पर्क : सम्पादक ‘वीणा’

‘मानस निलयम’, एम-2,

वीणा नगर (सुखलिया), इन्दौर

मोबा. 94253-21223

E-mail: rakeshsharmaindore@gmail.com

---

कविता

विजय निकोर

हो विश्वव्यापी सूर्य

या हों व्योम की तारिकाएँ

गहन आत्मीयता की उष्मा प्रज्ज्वलित

तुम्हारा स्वर्णिम सुगंधित साथ

काल्पनिक शून्य में भी हो मानो

तुम यहीं-कहीं आस-पास ...

सम्मोहित शनैः-शनैः सहला देती हूँ तुम्हारा हाथ।

संकुलित कटे-छंटे शब्द हमारे

मन्द मौन में रीत जाते

और कुछ और तैरते स्वछन्द

बस घूमते आस-पास

सैलानी बुलबुलों की तरह

उड़े, उड़े जा रहे

हमारे निज से भी बड़े

आकाशीय, निसीम अखण्ड निजि शून्य में।

असीम सियाह गुहाओं में तुम्हारी

जानती हूँ, है कहीं उर-विदारक शोर

इस पर भी निज कष्टों के कण्ठ मरोड़

बारिश के बाद बटोर लाते हो हर बार

सातों इन्द्रधानुषी रंगों की आभाएँ

निःसंदेह रंग-रंग देते हो रोम-रोम तुम मेरा

स्नेह-दृष्टि और अनुकंपा से प्रिय तुम कैसे

मेरी चेतना की आँखों को जगमगा देते हो।

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

-----****-----

-----****-----

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1

.... प्रायोजक ....

-----****-----

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधाएँ ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


|आपके लिए कुछ चुनिंदा रचनाएँ_$type=blogging$count=8$src=random$page=1$va=0$au=0

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3844,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,336,ईबुक,192,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2787,कहानी,2116,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,486,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,90,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,329,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,327,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,50,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,9,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,17,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,238,लघुकथा,834,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,7,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,315,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,62,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1921,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,649,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,688,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,55,साहित्यिक गतिविधियाँ,184,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,58,हास्य-व्यंग्य,68,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: काव्य जगत // प्राची - जून 2018
काव्य जगत // प्राची - जून 2018
https://lh3.googleusercontent.com/-1Of1beUPhXU/Wzx0IZWo0YI/AAAAAAABDQM/RG66JM_LpBYfWNqNQ1GhnDr7JiMv_PjLQCHMYCw/image_thumb?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-1Of1beUPhXU/Wzx0IZWo0YI/AAAAAAABDQM/RG66JM_LpBYfWNqNQ1GhnDr7JiMv_PjLQCHMYCw/s72-c/image_thumb?imgmax=800
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2018/07/2018_60.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2018/07/2018_60.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ