ब्रदी प्रसाद वर्मा अनजान की बाल कविता // प्राची - जून 2018

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ब्रदी प्रसाद वर्मा अनजान की बाल कविता

हमें जगाने आता कौआ

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कांव-कांव की बोली से

हमें जगाने आता कौआ।


रोज सुबह हमारी छत पर

आकर बैठ जाता कौआ।


घंटों रोज कांव कांव की

अपना गीत सुनाता कौआ।


चारों तरफ अपनी आवाज का

अपना फरचम लहराता कौआ।


रोज सुबह आ कर

अपनी ड्यूटी निभाता कौआ।


सबको नींद से जगाकर

अपना फर्ज निभाता कौआ।


पेड़ों पर घर के ऊपर

रोज नजर आ जाता कौआ।


रुखा सूखा जो पा जाता

खा कर खुश हो जाता कौआ।


संपर्क : गल्ला मण्डी

पोस्ट- गोला बाजार- 273408

गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)

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