कहानी " अनजाने में " देवराज दीपक

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कहानी

" अनजाने में "

देवराज दीपक

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धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले काश्मीर में रहने वाले लोगों को लगा कि जैसे पूरी घाटी में मानों भूकंप आ गया है। यह भूकंप धरती के हिलने से नहीं आया था, बल्कि यह भूकंप जैसी स्थिति आकाश में लहराते हुए एक विशाल विमान के वजह से उत्पन्न हुई थी। वह विमान बहुत देर से आकाश में चक्कर काट रहा था। कभी सागर के लहरों की तरह राँल करता, कभी घाटी के ऊपर लूप बनाता। कभी लगता मानों उड़ते उड़ते आकाश में ठहर गया है। फिर तेजी से नीचे गिरने लगता। दहशत से लोगों के मुँह से चीख निकल जाती। सभी इधर-उधर भागने लगते। धरती से टकराने के पहले विमान ऊपर उठ जाता और फिर आकाश में चक्कर काटने लगता। यह खेल काफी देर से चल रहा था। लोगों को लग रहा था, शायद कोई पायलट स्टंट फ्लाइंग कर रहा है।

लेकिन नीचे एअर ट्रेफिक कंट्रोल टावर में कंट्रोलर के चेहरे पर हवाईयां उड रही थी। विमान का पायलट उनके निर्देशों का पालन नहीं कर रहा था। कभी वह वेग से विमान को दूसरे देश की सीमा में प्रवेश करा देता, तो कभी विमान को एकदम नीचे ले आता। लगता कि विमान जमीन से टकरा देगा। लेकिन जमीन के पास पहुंच कर वह फिर विमान को लेकर उपर उड जाता। विमान के नीचे खड़े लोगों के होश उड़ जाते। कमजोर दिल के रोगी यह दृश्य सहन नहीं कर पाये। कइयों की दिल की धड़कन रूक गयी। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि वह पायलट एैसा क्यों कर रहा है। वह एयर फोर्स का सबसे अच्छा पायलट था। एयरोस्पेस इंजिनियरिंग में डिग्री लेने के बाद उसने विमान के निर्माण, टेस्टिंग और संचालन में दझता हासिल की। उसे बैलून उडान, ग्लाइडर, एयरक्राफ्ट और यहां तक कि स्पेश भहेकिल के फ्लाइट में मास्टरी थी। जब कंट्रोलर के पास कोई चारा नहीं रह गया तो उन्होंने सिविल एविएशन मिनिस्ट्री और डिफेंस मिनिस्ट्री को पूरी स्थिति की जानकारी दे दी। यह समाचार मिडिया को मिल गया। पूरे देश में यह खबर दावानल के तरह फैल गया। पायलट बार बार पडोसी देश के सीमा का उल्लंघन कर रहा था। पडोसी देश के सरकार को लगा की कि भारत ने उसके साथ अघोषित युद्ध छेड रहा है। हाँट लाइन पर दोनों देशों के प्राइम मिनिस्टर के बीच वार्ता होने लगी। भारत की ओर से पडोसी देश को समझाया गया कि एक सिरफिरे पायलट के वजह से सीमा का अतिक्रमण किया जा रहा है। सरकार की कोई मंशा नहीं है। पडोसी देश को धैर्य रखने की सलाह दी गयी। वायुसेना के अध्यक्ष को तुरंत कश्मीर जाने को कहा गया। अध्यक्ष ने आते ही कंट्रोल रूम का कमान अपने हाथ में ले लिया। उन्होंने पायलट को आदेश दिया कि वह तुरंत विमान को लैंडिंग करे। वह पायलट आदेश को अनसुनी कर अपने आप से बोलता रहा - " मैं विमान को नीचे नहीं लैंड कर सकता। जबतक इस विमान में इंधन बचा रहेगा, तबतक मैं उड़ता रहूंगा। तेल खत्म होने के बाद मैं विमान के साथ नीचे गिर कर मर जाएंगे। मैं जीना नहीं चाहता। देवता समान मेरे बडे भाई ने मुझसे छल किया। अपने कालेज के छात्रा से जी भरकर ऐश की और जब मन भर गया तो उसकी शादी मुझसे करवाया ताकि शादी के बाद भी उसकी रास लीला चलती रहे।"

वायुसेना के अध्यक्ष ने उसे समझाया मगर वह समझने को तैयार नहीं हुआ। अध्यक्ष को जानकारी दी गई कि वह विमान कोई साधारण विमान नहीं है, वह बम, गोला और बारूद से भरा कार्गो विमान है। अगर वह गिर गया तो पूरी कश्मीर घाटी तबाह हो सकती है। अध्यक्ष ने पूछा -" वह पायलट सुबह किसके साथ था? " जबाब मिला कि सुबह गोहाटी से आने के बाद वह फ्लाइट लेफ्टिनेंट दीपक बरुआ के साथ था। आनन-फानन में दीपक को बुलाया गया। दीपक ने कहा कि वह सुबह से काफी परेशान था। पहले लैंड करने के पश्चात वह उसके साथ एक पहाड़ी मन्दिर में गया.। वहाँ पुजारी को खोजने लगा। मगर वहां पुजारी नहीं मिला। रास्ते में एक फोटोग्राफर के दूकान में लगे तस्वीर पर उसकी नजर पड़ी। वह तस्वीर उसकी पत्नी की थी। उस तस्वीर में पत्नी के साथ एक युवक भी था।वह युवक और कोई नहीं, बल्कि उसका बड़ा भाई था। बस वहीं से उसका दिमाग फिर गया। अगर उस समय भाई वहां रहता तो उसको गोलियों से भून देता। वहाँ से निकल कर वह एक शराबखाने में गया। वह कभी शराब को हाथ भी नहीं लगाता था। मगर उस समय उसने जी भरकर पी। पीते समय वह भाई को गाली देता रहा। इसके बाद मैं उसको एअरपोर्ट पर छोड़कर घर चला गया। दीपक ने अध्यक्ष को जानकारी दी कि वह पायलट राज वर्मा गोहाटी के एअर फोर्स के डाक्टर विमल की पत्नी रेशमा से प्यार करता है। अगर रेशमा चाहे तो वह राज को प्यार का वास्ता देकर लैंड करा सकती है। आनन-फानन में डाक्टर विमल को यहां की स्थिति के बारे मे जानकारी दी गई और कहा गया कि तुरंत रेशमा को लेकर स्पेशल विमान से कश्मीर आ जाये।

प्रेम व्यक्ति के भीतर एक सक्रिय शक्ति का नाम है। यह वह शक्ति है, जो व्यक्ति और दुनिया के बीच के दीवारों को तोड़ डालती है, उसे दूसरे के साथ जोड़ देती है। अपनी अकेला पन और विलगाव के कारण राज में उस शक्ति का अभाव था जिसके कारण उसे बार बार शर्मिंदगी महसूस करना पड़ रहा था। रेशमा एक आदर्श भारतीय नारी रहती है। पति के अलावा किसी और के बारे में सोचना उसके लिए पाप था। उसने कभी राज को कोई और नजरों से कभी नहीं देखा। मगर राज में न जाने क्या कमजोरी थी कि छिपकर हमेशा रेशमा पर नजर रखता था। गोहाटी में दोनों का क्वार्टर आमने-सामने था। सुबह बिस्तर से उठकर वह आंखें बंद कर बालकनी में आकर बैठ जाता। जबतक रेशमा बालकनी में आकर उसे दर्शन नहीं देती, तबतक वह आंखें बंद कर बैठा रहता। उसकी इस हरकत से उसकी चौदह साल की नौकरानी, जिसे वह गरीब और अनाथ समझ कर रेल्वे स्टेशन से लेकर आया था और उसे प्यार से मम्मी कहकर बुलाता था, उससे बेहद खफा रहती थी। वह उसे समझाती कि दूसरे के बीवी पर नजर रखना बुरी बात है। राज उसकी बातों को सुनकर हँसते हुए टाल जाता। वह मम्मी को समझाता कि वह किसी और नजरों से नहीं देखता, बल्कि नींद टूटने के बाद सुबह में उसे देखने के बाद उसका दिन अच्छा गुजरता है। रेशमा को सुबह में देखने के बाद फिर वह उसे कभी नहीं देखता, चाहे कितनी बार रेशमा उसके सामने क्यों न आ जाए। राज को बचपन से ही गाने का बहुत शौक था। वह किसी भी गायक के आवाज को आसानी से नकल कर लेता था। एयर फोर्स के क्लब में प्रत्येक शनिवार को उसके गाने का प्रोग्राम रहता। उस प्रोग्राम में रेशमा अपने पति के साथ आती। रेशमा अगर किसी के साथ मुस्कुरा कर बात करती, तो उसे मम्मी राज को बतला देती कि रेशमा मुस्करा रही है। राज गाने लगता " तुम इतना जो मुस्कुरा रही हो, क्या गम है जो छिपा रही हो। "इसी प्रकार अगर वह कोई गाना गुनगुनाती तो राज बिना उसकी ओर देखे गाता " होठों से छुकर तुम मेरे गीत अमर कर दो।" राज के गाने के समय सभी पति अपनी पत्नियों के साथ बाल डाँस करने लग जाते। इससे उनके आनन्द की सीमा दुगुनी हो जाती।

इसके अलावे जिस समय राज आफिस के कामों में व्यस्त रहता, उसी समय मोबाइल पर उसे मैसेज मिलता कि रेशमा माँल जा रही है, सिनेमा देखने जा रही है, झील किनारे घूमने जा रही है। मैसेज मिलते ही राज सब काम छोड़ कर रेशमा के पास चला जाता और उसे छुप छुप कर देखा करता। कभी कभी पकड़ा जाने पर रेशमा उसे उपेक्षित नजरों से देखकर बिना बात किये वहां से चली जाती। उसे समझ में नहीं आता कि राज ऐसा क्यों कर रहा है? उधर राज भी नहीं चाहता था कि वह इस तरह की हरकतें करे। मगर वह दिल के हाथों मजबूर हो गया था। वह बार बार रेशमा के पास इसलिए आना चाहता था, ताकि वह रेशमा से माफी मांग सके। मगर किस बात की माफी, यह उसके समझ में नहीं आ रहा था। रेशमा के आग उगलती आखों के सामने से भागने में ही वह अपना कल्याण समझता। उसकी हिम्मत नहीं थी कि वह रेशमा के सामने आये।

डाक्टर विमल ने जब राज के हरकतों के बारे में रेशमा को बताया, तब वह रोने लगी। राज के बचकानी हरकतों से आजिज आने पर भी वह राज के गाने के दीवानी थी। मगर यह कैसे संभव था कि पति के सामने एक पराये आदमी से प्यार का इजहार करे। डाक्टर विमल ने समझाया कि देश के हित के लिए उसे ऐसा करना होगा। रेशमा मान गयी। वह जाने की तैयारी करने लगी। राज जब भी बाहर जाता,तब मम्मी को रेशमा के पास पहुंचा देता। राज के हरकतों को सुनकर मम्मी रोने लगी। उसे चुप कराकर रेशमा कमरे में फैले कपड़े, गहने आदि को वार्डरोब में रखने लगी। इस काम में मम्मी भी उसे मदद करने लगी। अचानक मम्मी की नजर वार्डरोब के लाँकर में रखे एक घुँघरू पर पडी। वह उस घुँघरू को देखकर आश्चर्यचकित हो गयी। उसने रेशमा से पुछा कि क्या यह तुम्हारा घुँघरू है? रेशमा जल्दी से मम्मी के हाथ से घुँघरू को लेकर वार्डरोब में रखने लगी। मम्मी ने फिर पूछा -" इस घुँघरू का जोड़ा कहाँ है। " रेशमा को समझ में नहीं आ रहा था कि वह आखिर इस घुँघरू के पीछे क्यों पडीं है। उसने बताया कि इसका जोडा कही खो गया है। मम्मी रेशमा के सामने आकर बोली -" क्या बचपन में तुम्हारा पुकार का नाम रिशी था। " अगर कमरे में उस समय बम भी फूटता तो इतना आश्चर्य नहीं होता जितना अपना पुकार का नाम मम्मी के मुँह से सुनकर हुआ। वह घबरा कर मम्मी को दोनों हाथों से पकड़ कर जोर से बोली -" तुम्हें कैसे मालूम कि मेरा नाम रिशी है। " मम्मी रोने लगी और कहा -" इसका जोडा मेरे पास है। " वह रोते हुए अपने क्वार्टर की ओर भागी। वहाँ से घुँघरू का जोड़ा लाकर रेशमा को दिखलाया। उसे देखकर रेशमा रोने लगी। मम्मी ने बतलाया -" अक्सर राज इस घुँघरू को सीने से लगाकर रोता रहता और बोलता मुझे माफ कर दो रिशी। मुझे माफ कर दो। " मम्मी ने कहा कि जब मैं रिशी के बारे में पुछती तो वह कुछ नहीं बतलाता। सिर्फ रोने लगता। रेशमा रोते हुए बोली -" हाँ, मैं ही रिशी हूँ। राज मेरे बचपन का साथी है। हम दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे। स्कूल के उत्सव में राज गाना गाता और मैं उसके बोल पर नाचा करती। एकबार नाचते नाचते घुँघरू के बन्धन खुल गया। मैंने राज से उसे बांधने के लिए कहा। राज ने इसे अपना तौहीन समझा। उसने बाँधने से इनकार कर दिया। मुझे गुस्सा आ गया। मैंने घुँघरू को राज के पास फेंक दिया और कहा कि वह जबतक इसे मेरे पैर में नहीं बाँधेगा, तबतक मैं नहीं नाचूंगीं। बस इसी बात को लेकर हमदोनो में तकरार हो गया। फिर हमलोग कभी नहीं मिले।"

एअरपोर्ट जाने के लिए गाड़ी आ चुकी थी। दोनों रोते हुए गाडी में बैठ गयी। गाडी सीधे उनलोगों को लेकर रनवे पर लेकर गया। एक जेट विमान वहां पहले से खडा था। डाक्टर विमल पहले से ही वहां बैठे थे। इनलोगों के आने के तुरंत जेट विमान कश्मीर की ओर उड चला। वहाँ इनलोगों की बेसब्री से इंतजार हो रहा था। इनके आने के बाद कंट्रोल टावर में पहुँचा दिया गया। राज के विमान में मुश्किल से पन्द्रह मिनट का तेल बचा था। रेशमा डाक्टर विमल के गले से लगकर रोते हुए बेसुध हो रही थी। किसी तरह अपने को संयत कर उसने माइक्रोफोन पर गाना गाने लगी। यह वही गाना था जो बचपन में राज के साथ गाया करती थी। इस गीत के बोल राज ने लिखा था। इसके बारे में डाक्टर विमल को कुछ नहीं मालूम था। गाते गाते रेशमा गाने के बोल भूलने लगी। उस समय राज ने उसे सँभाला। बाकि बचे बोल वह खुद गाने लगा। गाना खतम होने के बाद जब रेशमा ने कहा कि वह रिशी बोल रही है। उस समय राज खुशी से उछल पड़ा। रिशी ने कहा कि वह आज भी बिना नृत्य के अधूरी है। उसकी कला साधना बेकार हो गयी है। अगर वह पैर में घुँघरू में बाँध दे तो वह नृत्य करने लगेगी। वह अपने प्यार का वास्ता देकर आग्रह करने लगी कि उसके हठ को अन्यथा न लें। उसके हठ को स्वीकार कर ले नही तो वह अपनी जान दे देगी।

राज किसी कीमत पर रिशी को खोना नहीं चाहता था। वह विमान को जमीन पर उतारने के लिए तैयार हो गया। कंट्रोल रूम में खुशी की लहर दौड़ गई। आनन-फानन में उसे लैंड करने का सिग्नल दे दिया गया। कुछ समय बाद राज का विमान भली-भांति रनवे पर उतर गया। सबने राहत की साँस ली।

उधर रेशमा और मम्मी का रोते-रोते बुरी हालत थी। रेशमा ने बचपन की यादों की हर बात डाक्टर विमल को बताती गई। मम्मी ने जब उस घुँघरू को दिखलाया तभी वह समझ गयी, राज ही उसके बचपन का साथी है।

राज को कॉकपिट से खींच कर बाहर निकाल कर जेल में बंद कर दिया गया। उसपर कोर्ट मार्शल चलाने की तैयारी की जाने लगी। डाक्टर विमल, रेशमा और मम्मी राज से बिना मिले ही गोहाटी लौट गये।

कोर्ट मार्शल के द्वारा राज को फांसी की सजा सुनाई गई। उसे कडी से कड़ी सजा दी गई ताकि कोई दूसरा कभी भी इस तरह की हरकतें न कर सके। राज के फाँसी की खबर को मिडिया के द्वारा पुरे देश में फैलायी गई। राज की पत्नी कविता और उसकी अंधी माँ को भी यह खबर मिली। रोते-रोते दोनों का बुरा हाल हो गया था। वे दोनों जेल में राज से मिलने आयी, मगर राज ने उनलोगों से मिलने से मना कर दिया। काफी कोशिश करने पर भी राज नहीं मिला। निराश होकर वे दोनों लौट रही थी कि डॉक्टर विमल से उनलोगों की मुलाकात हुई। डाक्टर विमल भी राज से मिलने आए थे। कविता ने डॉक्टर को पूरी कहानी सुनाई। राज का बड़ा भाई अमर एक कालेज में बोटनी का लेक्चरर था। कविता उसी कालेज में पढ़ती थी। अमर के घर पर वह राज से पढने आती थी। बचपन में ही उसकी मां की मौत हो गयी थी। अमर के यहाँ अच्छी पढाई के साथ उसे माँ की प्यार भी मिला। कुछ दिनों में ही ऐसा हो गया कि कविता अपनी मां से बढ़कर अमर की मां को प्यार करने लग गयी। दोनों में ऐसा अटूट संबंध स्थापित हो गया कि उसे टूटना असंभव सा हो गया। धीरे-धीरे वह अमर से भी प्यार करने लग गई। काफी ना नुकुर करने के बाद माँ के लिए अमर को कविता के साथ शादी के लिए हाँ करना पड़ा। शादी के पहले कालेज के टूर में कविता अमर के साथ कश्मीर गयी। वहाँ एक मन्दिर के पुजारी ने कहा था कि दोनों का संबंध अटूट है। दोनों का विवाह होकर रहेगा। यह सुनकर कविता खुशी से झूम उठी। वापस आते समय दोनों ने एक स्टूडियो में फोटो खिंचवाई। और घाटी में गाना गाया।

कश्मीर से वापस लौटने के बाद अमर की तबीयत बिगड़ने लगी। उसका सारा शरीर फूलने लगा। डाक्टर ने बताया कि उसका दोनों किडनी खराब हो गया है। काम नहीं कर रह है। जिन्दगी का कोई भरोसा नहीं है। उसे शादी न करने की सलाह दी गयी। कविता को समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक यह क्या हो गया। अमर के माँ के बिना वह कैसे जिन्दगी गुजारेगी। भाइ के बी मारी के बारे में सुनकर राज आ गया। वह अमर से बहुत प्यार करता था। पिता की मृत्यु के बाद अमर ने ही उसे पढाया और काबिल बनाया। भाइ का एहसान कभी भूल नहीं सकता था। काफी इलाज के बाद भी अमर ठीक नहीं हो सका। कविता का अमर के परिवार से ताल्लुक हद से ज्यादा बढ़ गया था कि किसी भी हालत में उसे छोड़ नहीं सकती थी। ऐसी स्थिति में अमर ने सुबकते हुए कहा कि राज की शादी कविता के साथ करा दी जाये। इस तरह कविता माँ के साथ रह जायेगी और मैं भी बाकी जिन्दगी हँसते हुए गुजार लूंगा। अमर का सुझाव कविता को पसंद नहीं आया। लेकिन काफी समझाने-बुझाने के बाद वह मान गयी। अमर की माँ बेटे की बीमारी से काफी चिंतित थी। शादी की बात सुनकर बहुत खुश हो उठी।इस तरह कविता उसके साथ रह जायेगी।

शादी के बाद सुहागरात के पहले कविता राज के साथ कश्मीर के उसी मंदिर में जाती है, जहां वह अमर के साथ गयी थी। वही पुजारी राज के साथ कविता को देखकर चिल्ला उठता है कि यह शादी झूठा है। उसकी शादी उसके प्रेमी के साथ ही होगी, जिसके साथ वह पहले यहां आयी थी। कविता के प्रेमी के बारे मे सुनकर राज को काफी आक्रोश हुआ। अगर कोई प्रेमी था तो उससे क्यों छुपाया गया। कविता से लाख पुछने पर उसे उसके प्रेमी के बारे में नहीं जान सका। उसने पुजारी से भी पूछताछ की, लेकिन पुजारी ने कुछ नहीं बताया। गुस्से में आकर वह कविता को वहीँ मन्दिर में छोड़कर वापस गोहाटी लौट गया। यह बात जब अमर को मालूम हुई तो वह समझ गया कि जबतक वह यहां माँ के साथ रहेगा, तबतक राज कविता को नहीं अपनाएगा। इसलिये एक रात एक अनजान मंजिल की तलाश में वह घर छोड़कर चला गया। आजतक उसका पता नहीं चला। पूरी बात सुनाने के पश्चात कविता बुरी तरह रोने लगी। डाक्टर विमल ने उसे काफी दिलासा दिया। भगवान् को शायद यही मंजूर था। उनके आगे किसी की नहीं चलती। किसी तरह उन्होंने राज की मां और कविता को समझा-बुझा कर वापस घर भेज दिया।

डाक्टर विमल को राज पर काफी गुस्सा आ रहा था। वह दूसरे के बीवी पर नजर रख सकता है, मगर अपनी बीवी के पुराने प्रेमी को सहन नहीं कर सकता। वह जानते थे कि राज उनसे मिलने को राज तैयार नहीं होगा। इसलिए उन्होंने डिफेंस मिनिस्ट्री से अनुमति लेकर काल कोठरी जहां राज कैद था, वहीं मिलने चला गया। डाक्टर विमल को देखकर राज मुहँ फेर लिया। डाक्टर विमल आवाज बदलने में माहिर थे। उन्होंने आवाज बदल कर चिल्लाते हुए कहा कि रेशमा जेल के बाहर खड़ी है। अगर मिलना है तो जल्दी गेट के सामने जाओ वर्ना वह चली जाएगी। राज को यह आवाज जानी पहचानी सी लगी। यही आवाज में उसके मोबाइल पर संदेश आता कि रेशमा माँल जा रही है, झील किनारे घूमने जा रही है, सिनेमा देखने जा रही है। वह चकित रह गया। अभी उसे समझ में आ गया कि खुद डाक्टर विमल ही उसे रेशमा के पास भेजा करते थे। लेकिन क्यों? भला कौन पति चाहेगा कि पराये मर्द को अपनी पत्नी के पास रोमांस लडाने के लिए भेजे। डाक्टर विमल ने बिना किसी झिझक के बोले - " हाँ, मैं ही तुम्हें रेशमा से मिलने के लिए भेजा करता था ताकि रेशमा तुमसे प्यार करने लगे और मैं रेशमा को तलाक देने के बाद तुमसे उसकी शादी करवा सकूँ। मगर तुमने शक की आड़ में पडकर खुद को जला डाला और मेरे अरमानों पर बिजली गिरा दिया। " राज डाक्टर की ओर मुखातिब होकर बोला कि आप ऐसा क्यों करना चाहते थे? एक लंबी साँस लेते हुए डाक्टर विमल बोलने लगे -" मैंने घोर स्वार्थ और कुत्सित विचार में पडकर रेशमा की जिन्दगी को बर्बाद कर दिया। मैं रेशमा से बहुत प्यार करता था। उसके बिना मैं रह नहीं सकता था। मेरे रोम रोम में रेशमा बस चुकी थी। मुझे भी वही बीमारी है, जो तुम्हारे भाई को था। मिलिट्री की नौकरी ज्वॉइन करने के पश्चात मैं बहत पीने लग गया। इसके कारण मेरे दोनों किडनी काम नहीं करने लगा। इस बीमारी के बारे में मुझे शादी के पहले ही मालूम हो गया था। फिर भी मैंने रेशमा से शादी कर ली। शादी के दिन सुहागरात मनाने के पहले एक इमरजेंसी केस के कारण मुझे अस्पताल जाना पड़ा। लिवर सिरोसिस का केस था। मर्द पत्नी के सामने गिडगिडा रहा था, मुझे बचा लो डाक्टर। अब हम कभी भी शराब को हाथ नहीं लगाएंगे। मेरी पत्नी की जिंदगी बर्बाद हो जायेगी। मुझे मालूम था कि मेरी जिंदगी काफी कम दिनों की है। फिर भी अपने स्वार्थ में अंधा होकर मैंने इसके साथ शादी की। इसका जीवन बर्बाद कर दिया। कहकर वह फूट-फूट कर रोने लगा। मै उसकी जिंदगी को नहीं बचा सका। मेरे आखों के सामने वह तडप तडप कर मर गया। जाते जाते वह मुझे यह सोचने पर बाध्य कर गया कि मैं भी रेशमा की जिंदगी बर्बाद करने के लिए उससे शादी कर ली। मैं भी कुछ दिनों का मेहमान हूँ। मेरे बाद रेशमा का क्या होगा, जिसे मै जान से बढ़कर प्यार करता था। रेशमा घर पर मेरा इंतज़ार कर रही थी और मै अस्पताल के कमरे रात भर जागकर रेशमा के बारे में सोचता रहा। उसी रात मैंने निश्चय किया कि हम कभी रेशमा के पास नहीं जाएँगे और किसी और से उसकी शादी करवा देगें। इसी समय रेशमा के लिए तुम्हारा प्यार देखकर मुझे बहुत खुशी हुई। तुमसे अच्छा पति कोई और नहीं हो सकता था। सबकुछ ठीक चल रहा था, मगर तुम्हारे वेबकूफी से सब चौपट हो गया। " कहकर डाक्टर रोने लगे। रोते-रोते वह कहने लगे-" मैंने रेशमा को पाने की लालच में पड़कर उसकी जिंदगी को बर्बाद कर दिया, लेकिन तुम्हारे भाई देवता तुल्य निकले। कितनी सहजता से अपने प्यार को त्याग कर कविता को अपना बहू न बनाकर घर का बहू मनाया, यह काबिले-तारीफ है। ऐसे भाई पर तुमने गंदी आरोप लगाया, उन्हें इस तरह जलील किया कि वे घर छोडने पर मजबूर होना पड़ा। आज बीमारी के हालात में कहाँ की ठोकरें खा रहे होंगे, कोई नहीं जानता। पता नहीं वे जिंदा है कि नहीं कोई नहीं बतलाता सकता। " डाक्टर की बात सुनकर राज रोने लगा। उसने अपना सिर लोहे के गेट पर मारना शुरू कर दिया। सिर लहूलुहान हो गया। सिपाहियों ने अन्दर जाकर उसे बचाया। डाक्टर विमल कुछ देर तक वहाँ ठहरे। फिर भारी मन से वहाँ से विदा हो गये।

फाँसी की तिथि निर्धारित नहीं किया गया था। इसी समय बँगला देश के सीमा पर लडाई छिड़ गई। एक जगह पर दुश्मन की सेनाओं ने मुक्ति वाहिनी के हजारों सिपाहियों को चारों ओर से घेर लिया था। उनका रसद पानी बंद कर दिया था। भूखे मरने की नौबत आ गई थी। रडार के नजर से बचकर नीचे उडान भरने की आवश्यकता थी। इसमें काफी खतरा धा। इस खतरनाक काम को अंजाम तक पहुंचाने वाला सिर्फ राज था।

राज को जब यह जानकारी मिली, तो वह खुशी-खुशी इस काम को करने के लिए तैयार हो गया। उसने वायुसेना अध्यक्ष से निवेदन किया कि वह फाँसी से नहीं डरता। वह मरते समय देश के लिए कुछ काम करना चाहता है। उसे मोर्चे पर जाने की अनुमति दी जाए। उसे अनुमति दी गई। राज को गोहाटी लाया गया। राज के आने की खबर कालोनी में फैल गई। सभी लोगों ने इच्छा जताई कि क्लब में राज के गाने का एक प्रोग्राम हो जाये। राज इसके लिए तैयार हो गया। उसी दिन डाक्टर विमल को रेशमा के साथ बम्बई जसलोक अस्पताल किडनी के इलाज के लिए जाना था। उन्होंने जाने का फैसला स्थगित कर दिया और राज का गाना सुनने रेशमा के साथ क्लब में आ गए। मंच पर राज ने रेशमा को बुलाया और उसके पैर में घुँघरू बाँधा।अपना हठ पुरा होने पर रेशमा नाचने के लिए तैयार हो गयी। राज ने गाना गाया -" देख,पिया का गाँव। ऐसे थिरके मेरे पाँव। कि घुँघरू टूट गए। " उसी दिन लोगों को पता चला कि रेशमा एक कुशल नर्तकी है। अंत में लोगों के आग्रह पर राज ने गाया -" बात निकलेगी तो बहुत दूर तक जायेगी "। तालियौ के गड़गड़ाहट के बीच गानों की फरमाइशें आती रही और राज दिल खोलकर उन फरमाइशें को पूरा करता रहा। अंत में सभी लोगों का अभिवादन स्वीकार करते हुए कहा कि यह मेरा अंतिम प्रोग्राम है। कहते हुए वह स्टेज पर बच्चों के समान फुट फुट कर रोने लगा। उसके साथी अफसर उसे दिलासा देते हुए एअरपोर्ट ले आये।वहीं से उसे उडान भरकर दुश्मनों की घेराबंदी को तहस नहस कर देना था। राज अपने मिशन पर कामयाब हो गया। उसने राडार की नजरों से बचते हुए नीची उडान भरते हुए दुश्मन पर काफी बम बरसाये। इससे उनकी घेराबंदी खत्म हो गई। इसका फायदा मुक्ति वाहनी को मिला। उनलोगों ने आनन-फानन में दुश्मनों को कब्जे में कर लिया। लेकिन वापस लौटते समय राज के विमान में आग लग गयी। राज किसी तरह विमान को अपने देश की सीमा में ले आया और एक खेत में फोर्स लैंडिंग कर लिया। इसमें वह बुरी तरह घायल हो गया। उसके बचने की उम्मीद नहीं थी। अंत समय में उसने सरकार से निवेदन किया कि उसका दोनों किडनी निकाल लिया जाये। एक किडनी डाक्टर विमल को ट्रांसप्लांट किया जाये और दूसरा किसी और जरूरतमंद को दे दिया जाये। उस समय बम्बई के जसलोक अस्पताल में किडनी का ट्रांसप्लांट होता था। सरकार राज की अंतिम इच्छा की पूर्ति के लिए सजग हो गई थी। आनन-फानन में राज को स्पेशल विमान से बम्बई लाया गया। डाक्टर विमल, रेशमा और मम्मी वहां पहले से ही थे। डाक्टर विमल को हास्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए भर्ती कर लिया गया था। राज के बहादुरी और त्याग की चर्चा पूरे देश में होने लगी। कविता को राज के बारे में सारी जानकारी मिली। वह माँ के साथ जसलोक आ गयी। तबतक राज का देहांत हो चुका था। उसका किडनी डाक्टर विमल के शरीर में लगा दिया गया था।

मरने के पहले राज ने एक चिट्ठी मम्मी को दी और कहा कि अगर जीवन में कभी कविता से मुलाकात हो जाये तो उसे देना। कविता को अस्पताल में देखकर मम्मी ने रोते-रोते वह चिट्ठी कविता को दे दी। उस चिट्ठी में लिखा था -

भाभी,

अग्नि के सात फेरे ही विवाह नहीं होता है, वो भी फेरे अगर " अनजाने में " लिए गये हो। तुम तो मेरे भैया की धरोहर हो। वह शादी शादी नहीं बल्कि जल्दी में किया गया एक समझौता था। शादी के पहले प्यार तो मन का बंधन है। अगर मन मिल जाए तो मिलन से कोई रोक नहीं सकता। उम्र की सीमा या समाज की बेड़ियाँ उस मिलन को रोक नहीं सकता। कोई नहीं जानता कि कौन कब किस के मन को छुएगा। किसके साथ सुकून मिलेगा। वीराने में बहार किसके साथ आयेगा। मेरा बचपन ही मुझे जीवन भर रुलाता रहा। दूर देश में एक महल बनाया। उसमें प्यार का दीपक जला कर खुद बुझा दिया। दिल के तराने जब होने लगे पुराने तब समझ में आया कि जीवन में प्यार के अलावे और भी कई काम है। मैं सभी यादों को भूल कर मैं अपने कामों में व्यस्त हो गया। लेकिन मैं विधाता की विधान को भूल गया। सृष्टि को आगे बढ़ाने के लिए मन का मिलन का होना जरूरी है। एकबार अगर मन मिल जाए तो उससे भागना मुश्किल हो जाता है। इसीलिए विधाता ने मुझसे रेशमा का मिलन करवाया। विधाता का चक्र था जो मुझे रोशनी दिखाई और फिर उसे धुआं से भर दिया। मैंने देवता समान भाइ पर शक कर इतना बड़ा हंगामा खड़ा कर दिया। सामने मौत को देखकर भी वह घर छोड़कर न जाने कहाँ चले गए। माँ के लिए आह भरी होगी, मगर कोई भी उस आह को न सुना होगा। हर वक्त बीते दिनों की याद काटों की तरह चुभता होगा। लगातार आँसू बहते होंगे। पोंछने वाला कोई नहीं होगा। यह सब मेरे कारण हुआ है। भगवान इसका दंड मुझे दे दिया। जिस समय तुम यह पत्र पढ़ रही होगी, उस समय तक मैं आसमान के सूनापन का हिस्सा बन चुका हूँगा। तारों के जगत में शामिल हो गया हूँगा। लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि भाई तुम्हारे लिए अवशय आयेगा। पुजारी की भविष्यवाणी गलत नहीं हो सकता।

अगर मैं जिन्दा रहता तो बता देता कि मैं तुम्हारा कितना लायक देवर बन सकता था।

तुम्हारा नालायक देवर राज

चिट्ठी पढकर सभी रो पड़े।

चलते समय कविता को जानकारी मिली कि राज का दूसरा किडनी एक जरूरतमंद को लगा दिया गया है। कविता के मन में भावना आयी कि एकबार उस जरूरतमंद को देख लिया जाये। वह माँ के साथ उसे देखने चली गई। उसे देखकर कविता चकरा कर गिर गई। वह जरूरतमंद और कोई नहीं, अमर था।

समाप्त

देवराज दीपक

पता - आसो आवास, रोड नंबर 7 ईस्ट, राजीव नगर पोस्ट केशरी नगर,पटना 800024, बिहार।

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