370010869858007
नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

****

Loading...

व्यंग्य // अफसर का अभिनन्दन // यशवंत कोठारी

शहर में जी एस टी का नया अफसर आया है , सुना है बड़ा कड़क , इमानदार और उसूलों वाला अफसर है ,किसी को नहीं बख़्शता . व्यापारियों में हडकंप मचा हुआ है. पहले नोट बंदी ने मारा अब जी एस टी का वार . ऐसी भयंकर, विकट परिस्थितियों में व्यापारी लोग अपनी एसोसिएशन की शरण में जाते हैं. वही हुआ. व्यापर मंडल के अध्यक्ष ने कहा –यारों, इस अफसर ने नाक में दम कर रखा है, कुछ करो , इसकी कोई कमज़ोर नस पकड़ो. एक छोटे व्यापारी जो दिखते छोटे थे मगर साइज़ में बड़े थे बोले-यार सुना है कुछ लिखते पढ़ते हैं.

ये लिखना पढ़ना किस बीमारी का नाम है?

सर ये बीमारी बड़े लोगों में पाई जाती है कुछ लोग कविता करते है कुछ गद्य करते हैं , कुछ आलू चना का काम करते हैं.

ये आलु चना का काम तो हम लोगों का हैं.

वो वाला नहीं भाई अख़बार किताब वाला काम.

वो सब तो ठीक है मगर अपन लोग क्या करें?

मोटी तोंद वाले सेठ जी उवाचे –

अरे फिर तो काम बन गया. मेरे पोते की बहू पढ़ी लिखी है, कुछ कविता –वविता कर लेती है , एक बार स्कूल में उसकी कविता पर खूब ताली पिटी थी. मैं उस से पूछ कर बताता हूँ. मोबाइल पर सेठजी ने पौत्र-वधु से बात की फिर बोले –ऐसे अफसरों की दुखती राग सम्मान व् अभिनन्दन होता है, सो अपन लोगों का एक प्रतिनिधि मंडल जायगा और अफसर कवि का अभिनन्दन का प्रोग्राम फिट कर के आएगा. प्रतिनिधि मंडल के साथ मेरी बहू भी जायगी वो सब काम फिट कर के आ जायगी. यह कह कर उन्होंने मीटिंग की चाय पानी का खर्चा खुद उठाने की घोषणा कर दी.

दूसरे दिन व्यापारियों का प्रतिनिधि मंडल अफसर से मिला.

बहूजी बोली-सर आपकी कविता क पत्रिका में पढ़ी , क्या बिम्ब है ,क्या प्रतीक थे . अफसर मुस्कराया. वे फिर बोली सर आप तो अच्छे आलोचक भी हैं. नयी कविता पर आपका लेख ग पत्रिका की जान था. बाकी उस पत्रिका में रखा क्या था. अब अफसर आनंदित होने लगा. बहूजी ने धीरे से पासा फेंका-सर हम लोग आपका सम्मान –अभिनंदन करना चाहते हैं, कृपा कर के समय व तारीख आप अपनी सुविधा से देने की कृपा करें. अफसर कवि को क्या चाहिए. तुरंत अपनी दराज़ से अपनी पुस्तक की प्रतियाँ निकाली और बाँट दी, सभी व्यापारियों ने एक एक प्रति ली. अध्यक्ष ने कहा-ये कविता नहीं हीरों का हार है यह तो बेशकीमती है .बाहर आकर पी.ए. को किताब का भुगतान किया, ऐसा वे एक पुलिस कवि के मामले में पहले भी कर चुके थे .पी ए ने कमीशन काट कर रकम बोस को दे दी.

प्रतिनिधि मंडल को उन्होंने छुट्टी के दिन का समय दे दिया. व्यापारी मगन होकर आनंदित हुए, पौत्र वधु ने धीरे से अपनी फर्म का कार्ड दे दिया. अफसर ने प्रतिनिधि मंडल के जाते ही कार्ड वाली फ़ाइल निपटा दी.

अभिनन्दन का दिन आया, सब व्यापारियों ने मिल कर शहर के एक पांच सितारा होटल में आयोजन किया. अफसर को सपत्नीक बुलाया गया. शानदार तामजाम , शान दार व्यवस्था , मीडिया के लिए अलग इंतजाम , नेपथ्य में अलग इंतजाम . अफसर के एक बाबू ने स्वागत गान किया , सरस्वती के चित्र पर माला पहनाई गयी. दीप प्रज्वलन अफसर पत्नी ने किया. खूब फोटो खींचे गए. सोशल मीडिया वाले , अख़बार वाले, चेनल वाले सब हाज़िर थे.

सबसे पहले व्यापार मंडल के अध्यक्ष ने घोषणा की - हम अफसर के काव्य संग्रह तोता मैना को पांच लाख का नकद इनाम देने की घोषणा करते हैं, खूब करतल ध्वनि हुयी . बाद में स्वागत भाषण दिया. फिर अफसर पत्नी को समर्पित करते हुए एक लघु कविता पढ़ी जो उन्होंने एक स्थानीय कवि को एक बोतल दे कर लिखवाई थी. बहुत वाह वाह हुयी. फिर व्यापर मंडल के सचिव ने बताया कि हमारे अफसर साहित्य के ध्रुव तारे हैं, वे आलोचना भी लिखते हैं. मेरे बेटे ने मुझे बताया की आलोचना लिखना बड़ा मुश्किल काम है मगर वो अफसर ही क्या जो मुश्किल काम न कर सके. याने हमारे साहब मुश्किल फाइलों को भी सरका देते हैं. सरकार को ऐसे कवि ह्रदय अफसर को और प्रमोशन देना चाहिए. हम उनकी कविता को क्या समझे मगर वे सूर तुलसी, कालिदास से बड़े हैं. मेरी बेटी ने बताया इनकी कविता तो मुक्तिबोध से आगे की कविता है. वो हिंदी पढ़ती व् समझती हैं अफसर गदगद हो गए. व्यापारी सब खुश .

सचिव के बाद एक मोटी तोंद के सेठ जी खड़े हुए और तभी एक अन्य व्यापारी बोल उठा –चंदा तो मैंने सबसे ज्यादा दिया है, मेरी कविता भी पढ्वाओ , मेरा भी केस पेंडिंग है. व्यापारी की कविता भी पढ़ी गयी जो वे किताब से उतार कर लाये थे.

अफसर और अफसर पत्नी मज़े ले रहे थे ,अंत में अफसर बोलने के लिए खड़े हुए

उन्होंने आभार व्यक्त किया अपनी कविता पढ़ी, आलोचना और व्यंग्य के बारे में व्यापारियों को समझाया, उन्होंने यह भी कहा –सरकार और व्यापारी मिल कर चले तो देश में सबका विकास आसानी से हो जायगा, आप लोग जी एस टी से डरो म़त, हम लोग है सब ठीक हो जायगा. किसी निर्दोष को फसाया नहीं जायगा , किसी दोषी को छोड़ा नहीं जायगा. आप लोग तो सच्चे व्यापारी है , आज आप लोगों ने बहुत अच्छा काम किया, साहित्य कला के बिना मनुष्य बिना सींग पूंछ का जानवर हो जाता है. व्यापारियों ने जम कर ताली बजाई . धन्यवाद देने व्यापार मंडल के सचिव की पत्नी मंच पर आई , सब ठीक से निपट जाता मगर अफसर पत्नी ने भी कविता पढ़ने की जिद पकड़ ली. आखिर में उनका भी काव्य पाठ हुआ. ख़ूब खाना पीना हुआ. अफसर का सफल और स्वादिष्ट अभिनन्दन हुआ, पांच लाख के पुरस्कार से व्यपारी जी .एस. टी. से मुक्त हो गए.

०००००००

यशवंत कोठारी ,८६,लक्ष्मी नगर ब्रह्मपुरी बाहर ,जयपुर -३०२००२

व्यंग्य 2404816784543416794

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

emo-but-icon

मुख्यपृष्ठ item

रचनाकार में छपें. लाखों पाठकों तक पहुँचें, तुरंत!

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं.

   प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 14,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. किसी भी फ़ॉन्ट में रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

rachanakar@gmail.com
कॉपीराइट@लेखकाधीन. सर्वाधिकार सुरक्षित. बिना अनुमति किसी भी सामग्री का अन्यत्र किसी भी रूप में उपयोग व पुनर्प्रकाशन वर्जित है.
उद्धरण स्वरूप संक्षेप या शुरूआती पैरा देकर मूल रचनाकार में प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जा सकता है.

इस साइट का उपयोग कर आप इस साइट की गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं.

नाका में प्रकाशनार्थ रचनाएँ भेजने संबंधी अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

आवश्यक सूचना : कृपया ध्यान दें -

कविता / ग़ज़ल स्तम्भ के लिए, कृपया न्यूनतम 10 रचनाएँ एक साथ भेजें, छिट-पुट एकल कविताएँ कृपया न भेजें, बल्कि उन्हें एकत्र कर व संकलित कर भेजें. एकल व छिट-पुट कविताओं को अलग से प्रकाशित किया जाना संभव नहीं हो पाता है. अतः उन्हें समय समय पर संकलित कर प्रकाशित किया जाएगा. आपके सहयोग के लिए धन्यवाद.

*******


कुछ और दिलचस्प रचनाएँ

फ़ेसबुक में पसंद करें

---प्रायोजक---

---***---

ब्लॉग आर्काइव