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कहानी संग्रह - वे बहत्तर घंटे - आत्म निर्णय - राजेश माहेश्वरी

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कहानी संग्रह

वे बहत्तर घंटे

राजेश माहेश्वरी

आत्म निर्णय

राम और रहीम एक ही कारखाने में काम करते थे। वे प्रतिदिन एक साथ आते और जाते थे। एक दिन राम ने रहीम से पूछा- तुम्हारी सफलता का राज क्या है। तुम जो भी कार्य हाथ में लेते हो उसमें तुम्हें सफलता, यश व मान भी प्राप्त होता है। मैं इतनी मेहनत और परिश्रम के बाद भी सफल नहीं हो पाता हूँ।

रहीम ने बताया कि हमें जीवन में अरमानों की आंधी एवं भावनाओं के सैलाब को अपने नियन्त्रण में रखना चाहिए। मेरी सफलता के दो राज हैं वे मैं तुम्हें आज बतला देता हूँ। पहला तो यह है कि प्रतिदिन सूर्योदय के समय मैं खुदा को याद करके यह प्रण लेता हूँ कि आज दिन भर में सूर्यास्त के पूर्व कम से कम एक नेक काम अवश्य करुंगा और बुरे काम से अपने को बचा कर रखूंगा। जिससे मेरे अरमान नेक रहते हैं। दूसरा जब भी बहुत महत्वपूर्ण निर्णय लेना होता है तो सबसे वार्तालाप करता हूँ और उस समय में चुप रहकर दूसरों के विचारों को समझने का प्रयास करता हूँ। जब सब अपनी बात कह लेते हैं तो मैं उनके विचारों को दर्ज कर लेता हूँ। फिर उन पर चिन्तन और मनन करके खुदा को साक्षी रखते हुए निर्णय लेता हूँ। इस प्रकार मैं अपनी भावनाओं में बहकर नहीं वास्तविक धरातल पर निर्णय लेता हूँ और यही मेरी सफलता का राज है।


(क्रमशः अगले भाग में जारी...)

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