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अध्ययन सामग्री - कहानी – गदल – रांगेय राघव // डॉ. जयश्री सिंह

डॉ. जयश्री सिंह

सहायक प्राध्यापक एवं शोधनिर्देशक, हिन्दी विभाग,

जोशी - बेडेकर महाविद्यालय ठाणे - 400601

महाराष्ट्र

कहानी – ४ गदल – रांगेय राघव

लेखक परिचय :- डॉ रांगेय राघव आधुनिक हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभासम्पन्न साहित्यकार हैं I उन्होंने विविध विधाओं के माध्यम से हिन्दी में सृजनकार्य किया है I डॉ रांगेय राघव का वंश दक्षिण भारतीय अहिन्दी भाषी है I फिर भी हिन्दी के प्रति उनकी विशेष लगाव है I उनका सर्जन मात्रात्मक एवं गुणात्मक दृष्टि से अपना महत्व रखता है I हिंदी साहित्य में उनका असाधारण योगदान है - कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, रिपोताज के अतिरिक्त आलोचना सभ्यता और संस्कृति पर शोध व व्याख्या के क्षेत्रों को उन्होंने १५० से भी अधिक पुस्तकों से समृद्ध किया है। अपनी अद्भुत प्रतिभा, असाधारण ज्ञान और लेखन क्षमता के राघव जी सर्वमान्य अद्वितीय लेखक हैं। डॉ. रांगेय राघव जी ‘हिन्दुस्तानी अकादमी पुरस्कार, डालमिया परसकर, उत्तर प्रदेश सरकार पुरस्कार, राजस्थान साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा महात्मा गाँधी पुरस्कार से सम्मानित हैं।

ड़ॉ रांगेय राघव की कहानियों में उत्तरप्रदेश तथा राजस्थान और दक्षिण भारत के तमिलनाडु के समाज का अंकन है I डॉ रांगेय राघव ने समाज में स्थित धर्म तथा धर्म से सम्बंधित गतिविधियों को अपनी कहानियों में चित्रित किया है I भारतीय समाज रूढ़ि परम्परावादी समाज हैI रुढ़ी परम्पराएं ग्रामीण जीवन की अभिन्न अंग होती हैंI ग्रामवासी पूरी निष्ठा से उसका पालन करते है I ग्रामीण अंचलों में इनका विशेष महत्व हैI रांगेय राघव जी ने अपनी रचनाओं में ग्रामजीवन के साथ उनकी रूढ़ि परंपरा को भी दर्शाया हैI गदल कहानी में रूढ़ि परंपरा के रूप में मृत्यु भोज कारज का करुण चित्रण रांगेय राघव जी ने किया है।

कहानी की कथावस्तुः- गदल कहानी में ग्राम जीवन का चित्रण है I गदल अपने पति गुन्ना की मृत्यु के बाद खारी गुजर जाति की होते हुए भी अपने से कम उम्र के लौहारे गुजर मौनी से व्याह करके उस के घर जा बैठती है I इससे खारी गुजर जाति मे कोलाहल मच जाता हैI बेटों – बहुओं वाली गदल के इस कार्य से उसके परिवार वालों की बड़ी बदनामी होती है।
जिस दिन गदल मौनी के घर जा बैठी उसी दिन संध्या समय उसके बेटे निहाल और नारायण मिलकर उसे जबरदस्ती पकड़कर घर ले आते हैंI उस समय डोडी निहाल और परिवार के बहुओं के बीच कहा सुनी होती है I अगली सुबह गदल पुनः अपने नये पति मौनी के घर चली जाती हैI
'गदल' गूजरों में यह रूढ़ि परम्परा रही है की यदि बड़े भाई की मृत्यु होती है तो उसकी पत्नी के साथ उसका पुनः विवाह रचाया जा सकता है I देवर - भाभी के बीच इस प्रकार की स्थिति में किया गया ब्याह समाज सम्मत है I गदल के पति गुन्ना की मृत्यु के बाद उसका देवर डोडी उससे पुनर्विवाह कर अपने घर में रख सकता था I किन्तु लोकलाज के कारण डोडी ने गदल को पत्नी के रूप में स्वीकारा नहीं किया I डोडी की पत्नी बहुत पहले ही गुजर चुकि थी उसके बच्चे भी नहीं रहे। भाई गुन्ना की मृत्यु के बाद डोडी ने ही उसके तीनों बेटों व बेटियों को पाला था। बेटे - बेटियों की शादियाँ हो चुकि थीं उनके बच्चे हो चुके थे इतने बड़े परिवार को छोड़ कर गदल लौहारे मौनी से ब्याह करके उसके घर जा बैठी थीI

दरअसल गदल स्वाभिमानी स्त्री थी I वह पति के रूप में डोडी के लिए चूल्हे – चौके का काम करने के लिए तैयार थी लेकिन जीवन भर अपने अनुसार चलने वाली गदल को इस उम्र में बहुओं की टहल बजाना उनके हिसाब से चलना स्वीकार न था I गदल चाहती थी कि डोडी उससे ब्याह कर ले I डोडी उसका देवर है I वह बेहद सज्जन पुरुष है भाई के परिवार को उसने अपना ही परिवार माना I वह जो कुछ कमाता अपनी भाभी गदल को ही ला कर देता किन्तु भाई गुन्ना की मृत्यु के पश्चात् अपनी भाभी गदल को पत्नी के रूप में स्वीकार करना डोडी को उचित न लगा I गदल जानती थी कि डोडी उसे मन ही मन चाहता है उसके परिवार को अपना मानता है लेकिन फिर भी भाभी से शादी नहीं कर पत्नी के र्रोप में स्वीकार करने कि हिम्मत न थी I गदल इसी कारण उससे नाराज थी उससे ब्याह न करने पर उससे बदला लेना चाहती थी इसलिए उसने डोडी को छोड़ कर अपने से कम उम्र के गुजर नामक आदमी से ब्याह करके उसके घर चली गयी थी I उसी के कहने पर निहाल और नारायण गदल को जबरजस्ती घर ले आते हैं उस रात गदल और डोडी के बीच कहा सुनी होती है अगली सुबह गदल अपने नए पति के घर लौट जाती है I गदल का यूँ चले जाना और उसके कारण जतिबंधुओं के बीच उसके व उसके परिवार का अपमानित होना डोडी बर्दाश नहीं कर पाता वह किसी से कुछ कह भी नहीं पाता I उसका शरीर बुखार से तपने लगता है उसी रात डोडी की मृत्यु हो जाती है I डोडी के मृत्यु की खबर पा कर गदल अपने पति से विरोध कर अपने घर लौट आती है I

गदल अपने देवर डोडी का मृत्युभोज बड़े पैमाने पर करना चाहती है I राज्य और कानून का विधान था कि किसी भी विशिष्ट समारोह में केवल पच्चीस आदमियों को भोजन के लिये बुलाया जाये I किन्तु गदल अपने पति गुन्ना के मृत्यु भोज में अधिक लोगों को बुला ना सकी इस बात का उसे खेद है I अतः वह अपने देवर डोडी का मृत्युभोज बड़े पैमाने पर करना चाहती है I इस कार्य के लिए गदल ने दरोगा को रिश्वत भी दी I गिर्राज ने गदल की सारी बाते मौनी को जाकर बता दी कि डोडी के म्रत्युभोज में गदल बड़ा इंतजाम कर रही है I लोग कहते है उसे अपने मरद का इतना गम नहीं हुआ था जितना अब लगता है I इस खबर से मौनी का मन प्रतिशोध से भर गया और उसने कारज में व्यवधान डालने के लिए बड़े दरोगा के पास शिकायत की I फलस्वरूप जब कारज चलरहा था तभी रिश्वत खाये दरोगा के सिपाही पहुँच कर दावत बंद करने का आदेश देते है I इतना ही नहीं तो वे बताते हैं कि बड़े दरोगा आ गये हैI किन्तु गदल आये हुये अतिथियों को सौगन्ध खिलाकर भोजन करने का आग्रह करती है I अन्ततः गोलियाँ चलती है गदल बेटे – बहुओं व गाँव वालों को पीछे के रास्ते से निकल कर अकेले ही बंदूक सम्हाल लेती है दोनों ओर से गोली बरी होती है अन्तत गदल के पेट में गोली लग जाती है I पुलिस उसके घर की तलाशी लेती है घर में गदल के अलावा पुलिस को कोई नहीं मिलता I उसे अकेली पा कर पुलिस पूछती है कि तू कौन है गदल जवाब में कहती है कि “जो मेरे बिन एक दिन भी न रह सका उसी की... I” उसी समय गदल की गदल की भी मृत्यु हो जाती है I मरते समय गदल को इस बात का संतोष था कि डोडी के मरणोपरान्त का काज उसकी इच्छानुसार सकुशल सम्पन्न हुआ I इस घटना के साथ कहानी समाप्त हो जाती है I

निष्कर्ष :- रांगेय राघव की यह कहानी गदल एक ऐसे स्त्री की कहानी है जो अपनी संस्कारगत सीमाओं में रहकर अपना विद्रोह प्रकट करती हैI
गदल कहानी में गदल का डोडी के प्रति अदृश्य और काफी कुछ मूक लगाव है I गदल और गुन्ना के सगाई के समय से ही गदल डोडी की ओर आकर्षित हुयी थी I गूजर समुदाय की यह गदल अपने पति की मृत्यु होने पर अपना भरा पूरा परिवार छोड़कर दूसरे परिवार में शादी का निर्णय लेती है क्यूंकि पति की अनुपस्थिति में वह बहुओं के सामने अपना कद छोटा होते नहीं देखना चाहती I पर अपने आत्मसम्मान की रक्षा के साथ अपने देवर से ब्याह न करने पर उससे बदला लेना चाहती है। इसलिए मौनी से शादी कर लेती है। देवर पर गदल की मनोवैज्ञानिक चोट उसके लिए प्राणघातक सिद्ध होती है। इसके बाद गदल का उठाया गया कदम कहानी और गदल के चरित्र को एक दूसरे ही स्तर तक उठा ले जाता है।
गदल की चारित्रिक संरचना बेहद पारदर्शी है। जो भीतर है वही एक ईमानदार अभिव्यक्ति के साथ बाहर भी है। दुराव-छिपाव और छल से गदल कोसों दूर है। गदल में डोडी के प्रति विशेष प्रेमभाव है। डोडी भी गदल से प्रेम करता है। 30 वर्षों तक एक ही घर में वे रहते हैं। फिर भी वह दोनों अपने दायित्व और नैतिक मर्यादाओं से बंधे हुए रहते हैं। परंतु गुन्ना की मृत्यु के बाद गदल के मन का सुप्त प्रेमभाव उभरकर आ जाता है। उम्र, मर्यादा और दायित्व व समग्र परिस्थितियां उसकी इच्छा को दबा नहीं पाते।
एक ही स्थिति को लेकर दोनों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग हैं। डोडी सज्जन और कमजोर है, लोग क्या कहेंगे उसे इस बात की चिंता है। परंतु गदल डोडी के इन विचारों प्रति विद्रोह कर लुहारे मौनी के घर पर जाकर बैठती है। परिणामस्वरुप डोडी की मृत्यु होती है। गदल निडर औरत है। वह वही करती है जो उसे ठीक लगता है इसलिए वो अपने नये पति को छोड़ कर अपने घर चली आती है औरत होते हुए भी अपने बल पर देवर का कार्य सम्पन्न करवाती है इसी कोशिश में सशस्त्र पुलिस बल से मोर्चा लेते हुए मर जाती है, किंतु मरते समय भी उसे इस बात का आत्मसंतोष रहता है कि उसने परंपरानुसार अपने देवर का मरणोपरांत कार्य सम्पन्न किया। कहानी के प्रारंभ में वह जितनी मुखर, ढीठ और निडर है कहानी के अंतिम में उसका बलिदान पाठकों के मन पर यमिट छाप छोड़ जाता है।

सन्दर्भ सहित व्याख्या : -

“देवर तो मेरा अगले जन्म में भी रहेगा। उसी ने मुझसे रुखाई दिखायी नहीं तो क्या ये पाँव कटे बिना उस देहली से बाहर निकल सकते थे? उसने मुझसे मन फेरा, मैंने उससे. ऐसा बदला लिया उससे।“

संदर्भ :- प्रस्तुत अवतरण प्रथम वर्ष हिंदी कला के पाठ्यपुस्तक ‘श्रेष्ठ हिंदी कहानियां’ में निर्धारित कहानी ‘गदल’ से लिया गया है। इसके लेखक ‘रांगेय राघव’ जी हैं। इस कहानी में उन्होंने एक महत्वाकांक्षी और निडर महिला का वर्णन किया है, जो अपने बल पर अपना लक्ष्य सिद्ध करती है।

प्रसंग :- प्रस्तुत कहानी में लेखक यह बताना चाहते हैं कि एक कठोर हृदय वाली महिला अपने चरित्र पर कोई भी दाग नहीं लगने देती। उसे किसी का भय नहीं होता, न समाज का और ना ही घर के किसी भी रिश्तेदारों का। महिला के पति न होने पर उसे अपने घर में अपने देवर से बहुत सारी उम्मीदें रहती है, परंतु वह सब उसे नहीं मिल पाता। लेखक ने इस कहानी में एक स्त्री के मन की व्यथा को दर्शाया है।

व्याख्या :- लेखक के कहानी के माध्यम से गदल और डोडी के व्यक्तिगत जीवन पर प्रकाश डाला है। लेखक बताते हैं कि, घर में गदल के पति के गुजर जाने पर गदल पर सारे गृहस्थी का भार आ जाता है। उसका देवर डोडी जो कि उसके पति का सगा भाई था, वो घर को संभालने की जिम्मा उठाता है। गदल उससे शादी के प्रस्ताव की बात करती है, तो डोडी उसे अस्वीकार करता है। गदल उससे बदला लेने के लिए अपने ही गांव के विधुर युवक मौनी से शादी कर लेती है। डोडी उसका दूर जाना सह नहीं पाता और उसकी मृत्यु हो जाती है। यह खबर गदल को पता चलती है, तो वह उसे देखने के लिए जाना चाहती है, परंतु उसका पति मौनी उसे मना कर देता है। तब गदल झनझनाती हुई कहती है, कि देवर तो मेरा वो अगले जन्म में भी रहेगा। उसी ने गदल से रुखाई दिखाई, तभी वह डोडी से बदला लेने के लिए उसने मौनी से शादी की।

डोडी के शादी न करने का फैसला सुनकर गदल उससे मुंह फेर लेती है। गदल उससे मन फेरने का बदला लेना चाहती है। बदले की भावना को लेकर ही वह उसकी देहलीज से बाहर आने का फैसला करती है। उसे समाज की बातें और घरवालों के सोचने का कोई प्रभाव ना पड़ता।

विशेष :- गदल कहानी के माध्यम से ग्रामीण महिला के रूप में एक निडर, साहसी व महत्वाकांक्षी महिला के चरित्र को उभारने का प्रयास किया गया है, उसके सच्चे प्यार व बलिदान का भी वर्णन किया है।

बोधप्रश्न :-

१) कहानी के माध्यम से गदल का चरित्र – चित्रण कीजिये।

२) गदल ने डोडी से किस बात का बदला लिया – विस्तार से लिखिए।

एक वाक्य में उत्तर लिखिए :-

१) ‘गदल’ कहानी में गदल किसका नाम है?

उत्तर :- कहानी में गदल मुख्य स्त्री पात्र का नाम है।

२) डोडी कौन था?

उत्तर :- डोडी गदल का देवर था।

३) डोडी किसका जाना सह न सका?

उत्तर :- डोडी गदल का जाना न सह सका।

४) गदल के नये पति का नाम लिखिए।

उत्तर :- गदल का नया पति मौनी है।

५) गदल किससे शादी करना चाहती थी?

उत्तर :- गदल डोडी से शादी करना चाहती थी।

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