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संस्मरण // नाइट क्लब // राजेश माहेश्वरी

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नाइट क्लब

धन और समय की प्रचुरता व्यक्ति के मन को कभी कभी दिग्भ्रमित कर देती है। एक गरीब व्यक्ति अभावों में जीकर भी अपनी सभ्यता, संस्कृति और संस्कारों के प्रति यथासंभव समर्पित रहता है। इस बात का अनुभव मुझे श्रीलंका के कोलंबो शहर में हुआ। मैं अपनी पत्नी के साथ भ्रमण हेतु विगत माह कोलंबो गया था। वहाँ पर दिनभर वह बाजार में खरीददारी करने में व्यस्त रही और मैं चुपचाप उसके साथ घूमकर सामान ढोता फिर रहा था। शाम होने तक हम लोग थक कर वापिस अपने होटल ताज आ गये और वहाँ पर भोजन करके विश्राम हेतु अपने कमरे में चले गये।

मेरी पत्नी तो दस मिनिट में ही थकान के कारण सो गयी परंतु मुझे नींद नहीं आ रही थी और मैं समय बिताने के लिये वहाँ के समाचार पत्र को उलट पलट रहा था कि तभी मेरी नजर वहाँ के नाइट क्लबों के विज्ञापन पर गयी। मैंने सोचा कि क्यों ना कुछ समय नाइट क्लबों में बिताया जाए और यहाँ का माहौल देखा जाए। मैंने तुरंत अपनी टैक्सी ड्राइवर नंदना को बुलवाया और उससे किसी अच्छे नाइट क्लब में ले जाने के लिये कहा। यह सुनकर वह थोडा आश्चर्यचकित हो गया और बोला कि उसे इसकी कोई जानकारी नहीं है। मैं गाडी से उतरकर होटल के रिसेप्शन में पता करने के लिये गया, मैं जब जानकारी लेकर वापिस गाडी पहुँचा ही था कि मेरी पत्नी का फोन आया कि तुम अभी ऊपर आओ और नाइट क्लब में जाने का विचार छोडो। उसकी बात सुनकर मैं हतप्रभ रह गया कि इसे कैसे पता हुआ कि मैं कहाँ जा रहा हूँ ?

यह सुनकर मैंने जाना रदद कर दिया और टैक्सी को वापिस भिजवा दिया। मैंने वापिस अपने कमरे में पहुँचकर पत्नी से पूछा कि तुम्हें कैसे पता हुआ कि मैं कहाँ जा रहा था तो उसने बताया कि नंदना ने मुझे मोबाइल पर फोन करके बताया और कहा कि ऐसी जगह ठीक नहीं होती और वहाँ पर कोई भी घटना घटित हो सकती है। आप लोग संभ्रांत व्यक्ति हैं और ऐसी जगह पर इतनी रात में जाना साहब के लिये उचित नहीं है। आप कृपया उन को समझाइये। यह सुनकर मेरे मन में बहुत रोष हुआ कि इस कम्बख्त ड्राइवर को मेरी पत्नी को यह सब बताने की क्या जरूरत थी। इस प्रकार सोचते सोचते मैं सो गया।

सुबह जब मैं सोकर उठा और समाचार पत्र देखा तो पता हुआ कि जिस नाइट क्लब में जाने के लिये मैं सोच रहा था कल रात उसी नाइट क्लब में झगडा होने चाकूबाजी की घटना घटित हुयी और पुलिस ने कुछ विदेशी सैलानियों को पूछताछ के लिये रोका है। यह पढकर मैं मन ही मन टैक्सी ड्राइवर की सूझबूझ एवं उसके मनोभावों के प्रति कृतज्ञ हो गया। मेरा उसके प्रति सारा गुस्सा समाप्त होकर यह विचार आने लगा कि वह तो मजबूरी में अपने परिवार के भरण पोषण के लिय टैक्सी चला रहा है यदि वह मुझे वहाँ ले जाता तो उसे मुझसे एवं नाइट क्लब से भी टिप के रूप में आर्थिक लाभ होता परंतु उसने इसकी परवाह ना करते हुए मेरी सुरक्षा का सर्वोपरि ध्यान रखा और मेरी पत्नी को आगाह करके अंततः मुझे जाने से रोक दिया।

कोलंबो से चेन्नई वापिस आते समय एयरपोर्ट पर मैंने खुश होकर उसे एक अच्छी रकम टिप के रूप में दी। इतने पैसे देखकर उसने कहा कि साहब यह तो बहुत रकम है शायद आप गिनना भूल गये हैं। हम लोगों ने मुस्कुराते हुए कहा कि हमें मालूम है यह कितनी रकम है। कल रात तुमने जो समझदारी करके मुझे नाइट क्लब जाने से रोक दिया उसका इनाम भी इसमें शामिल है। वह कृतज्ञ भाव से धन्यवाद देकर हमें विदा होने तक देखता रहा।

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