370010869858007
नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

****

Loading...

पर्यूषण पर्व विशेष // बड़प्पन की निशानी है क्षमा // डॉ.चन्द्रकुमार जैन

image

क्षमा करने का सीधा मतलब है जो बीत गई वो बात गई। उसे जाने दो। गलतियां हुई हों तो उनका प्रायश्चित कर लो, आने वाले समय में वैसी ही गलतियाँ दोहराने से बचो। दरअसल भूलने का ही दूसरा अर्थ है माफ़ कर देना। लेकिन, ये काम इतना आसान भी नहीं है। बैर की गाँठ अगर एक बार पड़ जाए तो बड़ी मुश्किल से खुलती है, कई बार तो खुलती ही नहीं! तब क्या किया जाये?

विचार किया जाये कि खुद को या दूसरों को माफ़ किये बगैर मन भी तो हल्का नहीं हो सकता। खुद को भीतर से संगठित करने के लिए, अपना संतुलन बनाए रखने के लिए भी क्षमा बहुत ज़रूरी है।

जैन परंपरा में पर्यूषण पर्व की आराधना संयम, तप और त्याग की मिसाल है, जो कहीं और देखने में नहीं आती. लेकिन, उसके बाद मनाये जाने वाले क्षमावाणी दिवस का तो कोई ज़वाब ही नहीं है . फिर भी हमारा मत है कि क्षमा सिर्फ एक दिन की बात नहीं है, न ही एक दिवस विशेष का कोई आयोजन मात्र है. बल्कि,यह पवित्र भाव मनुष्य के मनुष्य होने का पल-पल का प्रमाण होना चाहिए, क्योंकि सामाजिक होने का भी मतलब माफ़ करने वाला होना है. यह एक शक्तिशाली गुण है ,
[post_ads]

कार्य-व्यवसाय में भी इंसान चूक या गलती कर बैठता है .यह स्वाभाविक है, किन्तु कभी-कभी लापरवाही या बेपरवाई के कारण भी बड़ी भूल हो जाती है . लेकिन अपनी भूलों की क्षमा मांगना और दूसरों की भूलों को भुला देना सचमुच वीरों का काम है . ये काम छोटे दिल वाले कतई नहीं कर सकते .

आम तौर पर मदर टेरेसा के कोलकाता स्थित अनाथालय की दीवार पर एक कवितानुमा सुभाषित पढ़कर आप दो पल के लिए ही सही,ठहर जायेंगे और कुछ सोचने-समझने के लिए भी विवश हो जायेंगे. \अंग्रेजी में लिखित केंट केथ की उन पंक्तियों का भावानुवाद यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ. अनुवाद मैंने स्वयं किया है. मुझे इसमें बड़े दिल की बड़े काम की बात नज़र आई .

सिर्फ़ एक विनम्र प्रयास, जरा पढ़िए तो सही -

लोग आपके प्रति

अक्सर अवास्तविक,

अतार्किक और आत्मकेंद्रित हो सकते हैं.

फिर भी आप उन्हें माफ़ कर दें.


हो सकता है आप दयालु हों

लेकिन लोग आपको स्वार्थी

और छुपी हुई मंशा का व्यक्ति मान सकते हैं

फिर भी

आप उनके प्रति दयालु बने रहें.


आप अगर सफल होते हैं तो

आपके हिस्से आयेंगे

कुछ गलत मित्र और कुछ सही दुश्मन !

फिर भी

आप आगे बढ़ते रहें.

[post_ads_2]
अगर आप ईमानदार और दो टूक हैं

लोग आपको धोखा दे सकते हैं

फिर भी

ईमानदारी और बेबाकी मत छोड़ें.


आपने वर्षों मेहनत करके

जो निर्माण किया है

लोग उसे रातों रात नष्ट कर सकते हैं

फिर भी आप सृजन जारी रखें.


अगर आप सुखी और शांत हैं

लोग आपसे ईर्ष्या कर सकते हैं

फिर भी आप खुशमिजाजी बनाए रखें.


आप अगर आज कोई भलाई करते हैं

लोग उसे कल भुला सकते हैं

फिर भी

भलाई की राह न छोड़ें.

अगर आपने दुनिया को

अपना सर्वश्रेष्ठ भी दे दिया हो

और वह भी कम पड़े

फिर भी बेहतर देने का ज़ज्बा न छोड़ें.


आप अंततः देखेंगे कि ज़िन्दगी में

सब कुछ

आपके और ईश्वर के बीच ही घटित होता है

किसी भी तरह से

आपके और लोगों के बीच नहीं !

याद रखें,

हम कोई बड़ा काम भले ही न कर सकते हों 

लेकिन छोटे-छोटे काम

बड़े दिल से जरूर कर सकते हैं !
---------------------------------------------------
राजनांदगांव ( छत्तीसगढ़ )

आलेख 357596455397600796

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

emo-but-icon

मुख्यपृष्ठ item

रचनाकार में छपें. लाखों पाठकों तक पहुँचें, तुरंत!

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं.

   प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 14,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. किसी भी फ़ॉन्ट में रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

rachanakar@gmail.com
कॉपीराइट@लेखकाधीन. सर्वाधिकार सुरक्षित. बिना अनुमति किसी भी सामग्री का अन्यत्र किसी भी रूप में उपयोग व पुनर्प्रकाशन वर्जित है.
उद्धरण स्वरूप संक्षेप या शुरूआती पैरा देकर मूल रचनाकार में प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जा सकता है.

इस साइट का उपयोग कर आप इस साइट की गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं.

नाका में प्रकाशनार्थ रचनाएँ भेजने संबंधी अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

आवश्यक सूचना : कृपया ध्यान दें -

कविता / ग़ज़ल स्तम्भ के लिए, कृपया न्यूनतम 10 रचनाएँ एक साथ भेजें, छिट-पुट एकल कविताएँ कृपया न भेजें, बल्कि उन्हें एकत्र कर व संकलित कर भेजें. एकल व छिट-पुट कविताओं को अलग से प्रकाशित किया जाना संभव नहीं हो पाता है. अतः उन्हें समय समय पर संकलित कर प्रकाशित किया जाएगा. आपके सहयोग के लिए धन्यवाद.

*******


कुछ और दिलचस्प रचनाएँ

फ़ेसबुक में पसंद करें

---प्रायोजक---

---***---

ब्लॉग आर्काइव