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लघु व्यंग्य - मारिशस रिटर्न हिंदी - अर्विना

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वाह! हिंदी दी जब से मारिशस से लोटी आपका चेहरा तो बहुत ग्लो कर रहा है आखिर माजरा क्या है ?

हिंदी सोफे लग भग धसते हुए  बोली आओ मालवी मेरे पास बैठो न बहुत कुछ है सुनाने को इस बार बहुत ही अच्छा अनुभव रहा मारिशस के लोग हमें बहुत प्यार करते हैं।

वाह !!हिंदी दी क्या बात है ? आज कल बहुत छाए हुए हो फेसबुक पर ढेरों लोग लिख रहे हैं आपके बारे में बहुत ही कमाल का ।

मालवी !  सही कह रही  हो । हिंदी ने मुस्कुराते हुए अपनी सुनहरी जुल्फों को आहिस्ता से चेहरे से हटा  पीछे की ओर संवारा ।

मालवी मेरी एक प्रशंसक ने जो मारिशस भी आई थी कल ही की बात है मारिशस की फोटो क्या  अपलोड कर दी कुछ लोग जल भुन ही गए ?

एक दूसरे पर तोहमतें लगाने से बाज नहीं आए । लेकिन मेरा मन लोक गीतों की धुनों में तुम सभी को पा कर प्रसन्नता से भर जाता है ।

तुम सब सखियों के बिना मेरा अस्तित्व अधूरा है।

बाकी सब कब तक आयेगी बस हिंदी दी किसी भी समय आती होंगी।

एक बात  कहनी थी हिंदी दी?

हिंदी दी आज-कल आप लघुकथा में छाई हुई है । सभी ऐज ग्रुप के लोग पढ़ना पसंद करते हैं । एक बड़ा वर्ग आपको को इस विधा के माध्यम से जन जन तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।

एक दिन ये विधा कामयाबी के शिखर पर होगी ।

मालवी !  समर्पित लोग हमेशा कामयाबी हासिल करते हैं।

मालवी ये क्या अकेले अकेले .... मगही ने अंदर घुसते ही तीर छोड़ा मालवी हमें छोड़ कर तुम भी ना कसम से बड़ी शरारती हो । बघेली अवधी बुंदेली ने खिल खिला कर हंसते हुए कहा इस अवसर पर हिंदी दी पार्टी तो बनती है । इस बार हिंदी दिवस पर हमारी मारिशस रिटर्न हिंदी दी छा जायेगी ।

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अर्विना

शिक्षा एम एस सी वनस्पति विज्ञान

पता D9 सृजन विहार एन टी पी सी मेजा

जिला इलाहाबाद यू पी

व्यंग्य 9179765642374039310

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