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सोना मौर्या की प्रेम कविताएँ

 

1....

प्रेम और वासना में जरा सा फर्क...

वासना तनाव लाती है,  प्रेम विश्राम लाता है...
वासना अंग पर केंद्रित होती है,  प्रेम पूरे पर....!!

वासना हिंसा लाती है, प्रेम बलिदान लाता है...
वासना में तुम झपटना चाहते हो, "कब्जा करना", ..!!

प्रेम देना चाहता है समर्पण करना..!!
वासना कहती है जो मैं चाहूं वही तुम्हें मिले,
प्रेम कहता है जो तुम चाहो वही तुम्हें मिले...

वासना ज्वर और कुंठा लाती है....
प्रेम उत्कंठा और मीठा दर्द पैदा करती है....!!
वासना जकड़ती है, विनाश करती है.....
प्रेम मुक्त करता है, स्वतंत्र करता है....!!
वासना में प्रयत्न है, प्रेम प्रयत्नशील है...
वासना में मांग है, प्रेम में अधिकार है...

वासना दुविधा देती है, उलझाती है
प्रेम केंद्रित और विस्तृत होता है...!!
वासना केवल नीरस और अंधकारमय है, ,
प्रेम के अनेक रंग बिरंगे रूप हैं
प्रेम इंद्रधनुष के रंगों से रँगी तितली है...!!

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              2.....

जिंदगी कह रही है कुछ, , ,
    पर क्या..कोई समझा दे जरा..!

मैं उलझ रही हूं खुद से खुद में, ,
मुझे कोई सुलझा दे जरा..!!
कभी लबों पर झूठी हँसी, , और
मेरी आँखों में नमी, ,

हां"कुछ तो कह रही है जिंदगी...
कभी प्रेम में पड़ मजबूत, ,
तो कभी कमजोर हो जाती हूं..
उलझन मेरी बढ़ा रही है जिंदगी...
कोई थाम ले जरा..!

कई ख्वाब है मेरी आँखों में, ,
सपनों से उलझती, ख्वाब सजाती, ,
कभी टूटती,  बिखरती, रोती तो कभी हँसती, ,
कई सवाल कर रही है जिंदगी, ,
कोई जवाब दे जरा...!!
   
                 3....
       
.अलविदा दे रही हूं तुझको पिया.
तू रहे अब अपनी दुनिया में खुश..

बहुत सोचा बहुत समझा तब जाकर किया ये फैसला...

नहीं जी सकूंगी मैं तेरे बिना....
बहुत कोशिश की मैं अपना प्यार जताने की...

कोशिश की मैंने आपके लायक बन जाने की..
हुआ सब बेकार..गयी हूं अब मैं हार..

नहीं प्यारी तुझे मेरी जिंदगी या मैं...
नहीं रहेगी ये जिंदगी और न ही मैं...

तू रहे खुश ये सदा दुआ करुँगी...
तुझे आखिरी बार पिया..अब मैं अलविदा कहूंगी.
 
              4......

वो लम्हे याद आते हैं...
वो पल याद आते हैं....

गुजरा था जो कभी साथ हमारे...
वो बिता हुआ कल याद आता है....

थामा करता था जो कभी
वो तेरा हाथ याद आता है...

ना भूल पाऊँगी मैं कभी....
वो तेरा साथ याद आता है....

सोचूं मैं जब भी हर पल....
वो तेरी यादें याद आती है.....

क्यों छूट गये वो सारे रिश्ते....
क्यों मिटने लगे वो सारे किस्से....

हुआ क्यों न जाने ये सब....
अब तो बस वो रिश्ता याद आता है.....

वो दिन याद आता है...
वो पल याद आता है....

           5.....

कितना अच्छा सपना था...
देखा था, सोचा था, अपना था....!!

तेरे नैन मिले मेरे नयनों से...
तेरे नैनों की कशिश मोती सा था....!!

तेरे लब मेरे लब छूने को थे...
तेरी सांसों की गरमाहट जलती आग सा था...!!!

तू सिमट गया मैं बिखर गई...
दिल भी टूटा तार - तार सा था...!!

तू चला गया मैं ठहर गयी....
मेरा रास्ता ही गुमराह था...!!

तू साथ था मेरे, मैं साथ थी तेरे...
बड़ा प्यारा सा वो ख्वाब था, जो भी था अपना था....

कितना अच्छा सपना था...
देखा था, सोचा था, अपना था...

बड़ा ही प्यारा सपना था...
सपना ही मेरा अपना था.....!!

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           6......

वो जब हद से गुजर जाते हैं..
नजरों से उतर कर दिल में बस जाते हैं..
जब भी मुस्कुराऊँ मैं,  होठों पर वो मेरी नजर आते है...
न जाने मैं किस राह पर जाती हूं...
हर लम्हा उन्हें अपने पास ही पाती हूँ..
वो हर पल मेरे आस पास नजर आते हैं..
फिर कैसे कह दूं कि वो मेरा दिल दुखाते हैं..?
अब तो हर पल मुझे बस उन्हीं की याद आती है..
अब इससे ज्यादा क्या कहूँ कि वही मेरे सच्चे साथी है...
मैं नादान थी, उनकी बेरुखी से तंग होकर..
दूर हो जाने की कसम खा ली..
उनकी यादों से दूर होकर कुछ पल रो तो कुछ पल मुस्कुरा लिया...
ऐसा लगा जैसे उनसे दामन छुड़ा लिया...
पर उनसे जुदाई मुझे रास न आई..
हर रोज हर दिल मैंने दर्द ही सही...
वो जो बातों से मेरे दिल में आये..
और फिर मेरी होंठों पर नजर आये..
और कोई नहीं वो है मेरे..( प्रियतम)..
अब इससे ज्यादा कुछ कहना नहीं चाहती हूं..
बस अपने सच्चे हमसफ़र के साथ रहना चाहती हूं..
इसी के साथ अपनी कलम को विराम देती हूं..
उन्हीं को अपने दिल में विश्राम देती हूं...!!!

              7.....

उठा है धुंआ मोहब्बत का..
जैसे इश्क हुआ हो...!!

मदहोश है आँखें...
जैसे इश्क में भीगा हो...!!

मेरे लबों पे तेरी लबों की छुवन..
जैसे सुरमई शाम हुआ हो...!!

भीगा है बदन...
जैसे बारिसों ने छुआ हो...!!

उठा है धुंआ मोहब्बत का...
जैसे फिर इश्क हुआ हो...!!!

             8......
 
आदत बन गया है तू...
आदत बदलती नहीं...!!
मैं सोचूं तेरे बिन जीना...
ये तो अब मुमकिन नहीं...!!
तेरा प्यार है जब तक..
तब तक ये जिंदगी सही...!!
आदत बन गया है तू...
आदत बदलती नहीं...!!
तू मिला है जब से मुझे..
बजे है जिंदगी में साज कही..!!
दो अलग राह के जाने वाले..
एक राह हुए बने हमराही..!!
आदत बन गया है तू..
आदत बदलती नहीं...!!

          9......

अजीब तमाशा है मेरी जिंदगी...
किसी के लिये टूटी भी....
किसी की बाहों में सिमटी भी....
किसी ने खून के आंसू रुलाया...
किसी को मैंने रुलाया...
अजीब तमाशा है मेरी जिंदगी....
भूल रही थी मैं अतीत सारा...
फिर किसी ने झकझोर दिया...
क्या खूब तमाशा है मेरी जिंदगी...
रिश्ते बचाते बचाते मैंने हद पार की..
नहीं पता था जिंदगी का सबसे बड़ा गुनाह कर दी...
अजीब तमाशा है मेरी जिंदगी..
किसी के प्यार में किसी को मैंने ठुकरा दिया...
हमारे प्यार में किसी ने हमें ही ठुकरा दिया...!
क्या खूब तमाशा है मेरी जिंदगी...!!
किसी ने पाकर मुझे खो दिया..
किसी को पाकर मैंने भी उसे खो दिया...!!
क्या अजीब है मेरी जिंदगी...
अजीब तमाशा है मेरी जिंदगी...!!
 
            10......

नहीं कट रही है ये रात...
बेचैन कर रही है तेरी याद...
फिर वही पुरानी जगह...
उदास बैठी कर रही मैं तुझे याद...
नम आँखें लिए जगी हूं सारी रात..
सनम"तू जल्दी आ मैं कर रही हूँ फरियाद...
नहीं कट रही है ये रात...
बेचैन कर रही है तेरी याद...
थम रही है सांसें आँखों से बरस रही बरसात...
दिल रो रहा है आ रही है तेरी याद...
फैलाई जो मैंने हथेली अपनी, ना मिला तेरी हथेली का साथ...
धड़कन अब रुक रही पिया, सांसें कर रही तुझे याद..
नहीं कट रही है ये रात..
बेचैन कर रही है तेरी याद...!!!

कविता 1118427479307039586

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