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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 106 // पंचांग // चेतना भाटी

प्रविष्टि क्रमांक - 106

चेतना भाटी

पंचांग

सैर के लिए पार्क में जाते अपने मित्र से बनवारी  ने  पूछा  --- " और सुनाओ मित्र बसेसर , क्या हाल-चाल है ? "

" अब क्या सुनाएं मित्र , बस जीवन का दिसंबर चल रहा है । " ---   सूट - बूट में कीमती छड़ी के सहारे  चलते थके -  निराश से स्वर में बसेसर बोले गहरी उसाँस भरते  --- " पता नहीं कब जम जाएं इस शीत में । तुम  सुनाओ अपनी । "

    " भई हम तो भारतीय पंचांग है । बसंत से ही शुरु होते हैं और बसंत पर ही समाप्त । " --- पार्क के  गेट पर धोती  - कुर्ता में उकड़ूँ  बैठे अलाव तापते उत्साह - उमंग से लबरेज बनवारी ने जवाब दिया ।

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चेतना भाटी

इन्दौर - 452009

संक्षिप्त परिचय - दो दशकों से अधिक समय से सतत साहित्य साधनारत चेतना भाटी की साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे - व्यंग , लघुकथा , कहानी , उपन्यास , में अब तक आठ कृतियाँ प्रकाशित । तीन प्रकाशकाधीन । बी . एस - सी . एम . ए. एल - एल . बी . तक शिक्षित , म . प्र . लेखक संघ भोपाल द्वारा काशी बाई मेहता सम्मान प्राप्त ।

लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2458284883129628303

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  1. आदरणीय महोदय, आपकी रचना सराहनीय है विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

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