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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 58 // अभिजात्य // सीताराम गुप्ता

प्रविष्टि क्रमांक - 58

सीताराम गुप्ता


लघुकथाः

आभिजात्य

विद्यारत्न अग्रवाल जी जो प्रायः बीमार नहीं पड़ते इस बार सरदी के आगमन के साथ ही सरदी, ज़ुकाम व ज्वर ने उन्हें भी अपनी गिरफ़्त में ले लिया। बीमारी के बावजूद विद्यारत्न अग्रवाल जी प्रसन्न ही नज़र आ रहे थे कारण घर का प्रत्येक सदस्य अपने-अपने तरीक़े से उनकी दवा-दारू व सेवा-शुश्रूषा में जुटा था। उनकी पुत्रवधू पल्लवी की तो पूछो मत। एक बड़े प्रशासनिक पद पर कार्यरत है लेकिन विद्यारत्न अग्रवाल जी का सबसे ज़्यादा ध्यान वही रखती है। विद्यारत्न अग्रवाल जी भी जितना मान व स्नेह पल्लवी को देते हैं किसी और को देने का प्रश्न ही नहीं उठता। पल्लवी ने विद्यारत्न अग्रवाल जी से कहा, ‘‘पापाजी आप कल तक बिलकुल ठीक हो जाओगे लेकिन आज दवा लेने से पहले थोड़ा भोजन ज़रूर कर लीजिएगा।’’ पल्लवी कहे और विद्यारत्न अग्रवाल जी उसका कहना न मानें ये हो ही नहीं सकता। अभिजात्य परिवेश में पली-बढ़ी अत्यंत सुसंस्कृत और सेवाभाव वाली बच्ची है पल्लवी।

जैसे ही विद्यारत्न अग्रवाल जी ने भोजन समाप्त किया पल्लवी बच्चे की तरह दौड़कर एक ट्रे में रखकर दो गिलास पानी ले आई। एक गिलास में गरम पानी था व दूसरे में सामान्य। पल्लवी ने विद्यारत्न अग्रवाल जी की आवश्यकता व इच्छानुसार पानी मिलाकर दे दिया। विद्यारत्न अग्रवाल जी पानी पीने लगे तो पल्लवी एक और गिलास में गरम पानी ले आई और कहा, ‘‘पापाजी गरम पानी से हाथ धो लीजिए।’’ ‘‘मैं वॉशबेसिन पर हाथ धोकर कुल्ला कर लेता हूँ,’’ विद्यारत्न अग्रवाल जी के ये कहने पर पल्लवी ने एक बड़ा सा साफ कटोरा उनके सामने लाकर रख दिया और कहा, ‘‘आप हाथ भी यहीं धो लीजिए आराम से।’’ पल्लवी की इस बात को भी एक आज्ञाकारी बच्चे की तरह मानते हुए विद्यारत्न अग्रवाल जी हाथ धोने लगे। इसके उपरांत पल्लवी खाने के सारे बरतन उठाकर ले गई सिवाय उस कटोरे के जिसमें विद्यारत्न अग्रवाल जी ने हाथ धोए थे। इस पर विद्यारत्न अग्रवाल जी ने मन ही मन कहा, ‘‘निस्संदेह बच्ची बहुत अच्छी है लाखों में एक है लेकिन आभिजात्य का प्रभाव तो बना ही रहता है। जिस कटोरे में मेरे हाथ धुलवाए हैं उसे उठाने के लिए मेड अथवा किसी अन्य को भेजेगी।’’ हाथ धोकर कई बार कटोरे में झाड़ने के बाद जैसे ही विद्यारत्न अग्रवाल जी ने अपना सिर उठाया देखा पल्लवी एक साफ़-सुथरा धुला हुआ नैपकिन हाथ में लिए खड़ी है।

पल्लवी ने नैपकिन विद्यारत्न अग्रवाल जी की ओर बढ़ा दिया व जिस कटोरे में विद्यारत्न अग्रवाल जी ने हाथ धोए थे उसे उठाकर वापस चली गई।


सीताराम गुप्ता,

ए डी 106 सी, पीतम पुरा,

दिल्ली - 110034


Email : srgupta54@yahoo.co.in

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