---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

सर्दियों में गर्मियों की सज़ा - राजकुमार कुम्भज

साझा करें:

इस बरस सर्दियों में गर्मियों जैसी तपिश की सजा़ मिल सकती है। बारिश के मौसम में मॉनसून की मनमानी से परेशान किसानों और आम लोगों को इस बरस की सर...

इस बरस सर्दियों में गर्मियों जैसी तपिश की सजा़ मिल सकती है। बारिश के मौसम में मॉनसून की मनमानी से परेशान किसानों और आम लोगों को इस बरस की सर्दियों के दौरान भी राहत की उम्मीद नहीं है। पिछले कुछ वर्षों की तुलना करते हुए इस बरस सर्दी का असर थोड़ा कम दिखाई देने की आशंका है। आशंका यह भी है कि इस बरस रबी की फ़सल के लिये हालात शुष्क रहेंगे और सर्दियों के दौरान तापमान सामान्य से अधिक बना रहेगा। सामान्यतः सर्दियों के आगमन का संकेत अक्टूबर से मिलने लगता है, लेकिन इधर नवम्बर बीत गया है और दिसम्बर चल रहा है, किंतु सर्दियों का सांकेतिक पता भी नहीं मिल रहा है। घरों-दफ़्तरों मे पंखे चल रहे हैं और कहीं-कहीं तो कूलर तथा एयर कंडीशनर भी सेवाएँ दे रहे है। ज़ाहिर है कि ये सब जलवायु-परिवर्तन की वज़ह से ही देखने को मिल रहा है। इस सबका एक सीधा-सा आशय यही है कि हमें सर्दियों में गर्मियों की सजा़ मिल रही है।

पुणे स्थित भारतीय मौसम विभाग में कार्यरत् जलवायु निग़रानी और विश्लेषण-समूह का कहना है कि प्रशांत महासागर में अलनीनो की मौजूदगी के मद्देनज़र ही यह सब हो रहा है। अगले कुछ महीनों तक अलनीनो की उपस्थ्ति से प्रशांत महासागर के तापमान में वृद्धि हुई है और वह धीरे-धीरे अरब सागर की तरफ़ बढ़ रहा है। जिसका असर भारतीय उपमहाद्वीप पर पड़ना तय है। अलनीनो का प्रभाव दक्षिण में भूमध्यतटीय क्षेत्रों की ओर बढ़ने की आशंका बनी हुई है। इसका असर जनवरी तक बना रह सकता है। इस वज़ह से हमें सर्दियों में भी गर्मियों जैसी तपिश की सज़ा मिल सकती है। हालांकि अभी यह कह पाना तो ज़रा कठिन ही है कि इस बरस की सर्दियों में औसत तापमान वृद्धि कितनी रहेगी। फिर भी सामान्य सर्दियों के उलट बहुत कुछ हो सकता है और गर्मियाँ अपना असर दिखा सकती हैं।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अलनीनो के प्रभाव से समुद्री सतह का तापमान बढ़ने लगता है। जिसकी वज़ह से तटीय इलाक़ों में तापमान बढ़ जाता है। अरब सागर और प्रशांत महासागर में अलनीनो मौजूद है। अलनीनो की यह मौजूदगी, भारत में, सर्दियों के दौरान तापमान, औसत से अधिक रखेगी। तापमान में औसत गिरावट न आने से रबी की फ़सल के लिए शुष्क हालात रह सकते हैं, जिससे फ़सलें प्रभावित होंगी और हमें सर्दियों के मौसम से वंचित तक होना पड़ सकता है। ईश्वर को कोसना व्यर्थ है; क्योंकि ये सब करा-धरा हमारा ही है।

भारत के उत्तरी राज्यों में सर्दियों के दौरान प्रायः जनवरी माह में पश्चिमी विक्षोभ की वज़ह से बारिश का संक्षिप्त-संस्करण देखने को मिलता है। जिसे स्थानीय भाषा में ’मावठा’ कहा जाता है। जो कि रबी की फ़सल के लिये लाभदायक माना जाता है। बारिश का यह संक्षिप्त-संस्करण तापमान में गिरावट की मूल वज़ह बनता है, लेकिन इस बरस अलनीनो के संभावित प्रभाव के मद्देनज़र पश्चिमी विक्षोभ भी प्रभावित होगा और सर्दियों में गर्मियों की वज़ह बनेगा। कम सर्दियों की वज़ह से सामान्य जन-जीवन प्रभावित हुए बगै़र नहीं रहेगा। साधारण सर्दियों में साधारण तापमान से अधिक तापमान का होना अच्छा संकेत नहीं है। यह तो उल्टे बांस बरेली हुए!

जलवायु परिवर्तन ने दुनिया का औसत तापमान औद्योगिक युग के प्रारंभ की तुलना में एक डिग्री सेल्सियस बढ़ा दिया है। अगर तापमान वृद्धि की गति यही बनी रही, तो वर्ष 2040 तक 1.5, वर्ष 2065 तक 2 डिग्री तथा वर्ष 2100 तक 4 डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ जाएगा। केरल की बाढ़ से लेकर कैलिफोर्निया की आग तथा सूखे, तूफ़ान और ग्लेशियरों के पिघलने तक से हुई तापमान की एक डिग्री वृद्धि ने ही दुनियाभर में तबाही मचा दी है। तापमान वृद्धि अगर डेढ़ डिग्री पर रोकी नहीं गई, तो निर्धन वर्ग की रक्षा करना मुश्किल हो जाएगा, जबकि दुनिया साढे़ तीन डिग्री सेल्सियस तापमान की ओर दौड़ रही है। वायु-प्रदूषण से भारतीय लोगों का जीवन, चार बरस घट रहा है और दुनिया में प्रतिवर्ष तीस लाख लोग मर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के विश्व मौसम संगठन का अनुमान है कि इस बरस सर्दियों में अलनीनो आ सकता है। जिससे सर्दियों में गर्मियाँ बढे़ंगी।

प्रशांत महासागर में गर्मधारा अलनीनो का बनना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। अलनीनो के बनने से समूची दुनिया का मौसम प्रभावित होता है। अलनीनो की धारा ताक़तवर होने से अक़सर कई स्थानों पर औसत तापमान में वृद्धि हो जाती है और कई इलाक़ों में सूखे जैसे हालात पैदा हो जाते हैं। अलनीनो की गर्मधारा अभी स्थिर नहीं हुई है। भारत में अलनीनो का असर सर्दियों के दौरान देखने को मिलेगा। अलनीनो की प्रक्रिया प्रशांत महासागर में गत कई महीनों से चल रही है। इसी कारण जून से सितम्बर के महीनों में देश के कई इलाक़ों में सामान्य से कम बारिश हुई है। इसीलिए हम कह सकते है कि इसका असर सर्दियों के मौसम में दिखाई देगा और बेहतरीन सर्दियों का बेहतरीन मज़ा जाता रहेगा।

हालांकि भारतीय मौसम विभाग ने इस बरस सामान्य से 97 फ़ीसदी बारिश होने का अनुमान लगाया था, जबकि 9.4 फ़ीसदी बारिश कम हुई और देश के कई क्षेत्रों में तो तीस फ़ीसदी से भी कम बारिश हुई। मौसम की चाल ने भारतीय नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है; क्योंकि मॉनसून प्रभावित 60 फ़ीसदी इलाक़ों में सिंचाई की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। गर्मियों के मौसम में बोई जाने वाली खरीफ़ की फ़सल से देश की पचास फ़ीसदी खाद्यान्न-ज़रूरतें पूरी होती हैं, जिसकी निर्भरता पूर्णतः मॉनसून पर ही रहती है। मौसम के बदलते-बिगड़ते स्वभाव से सामान्य जन-जीवन, सामान्य काम-काज और सामान्य कृषि-व्यवस्था का प्रभावित होना एक गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है। सरकार ने इसके समाधान के लिए कुछ नीतियाँ ज़रूर बनाई हैं, लेकिन ज़रूरी तंत्र का अभाव पूर्ववत् ही बना हुआ है। सरकारी जुमलेबाज़ी और क्रियान्वन के बीच की सच्चाई बहुत कुछ बयान कर देती है। कथनी-करनी के बीच की दूरी, कभी-कभी जीवन-मरण का प्रश्न भी बन जाती है।

पिछले दिनों मुंबई का तापमान 38 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुँच गया था, जो कि सामान्य से तक़रीबन 4 डिग्री सेल्सियस अधिक था। लोगों को धूप और गर्मी की तपिश से बचाव के लिए छाते और चश्मे निकालने पडे़। तापमान वृद्धि की वज़ह से मुंबईकरों को भारी मुसीबत उठानी पडी। यहाँ तक कि दोपहर के वक़्त में बाहर निकलने वाले लोगों को पसीने से तरबतर, छाँव की तलाश में भटकते देखा गया। सर्दियों के दिनों में गर्मियों की सज़ा ने पिछले दस बरस का रिकॉर्ड सिर्फ़ दूसरी बार में ध्वस्त किया है। चिकित्सकों के द्वारा भी लोगों को संभलकर बाहर निकलने की हिदायत दी गई । यह सब ग्लोबल वार्मिंग और मनुष्यों की मूर्खतापूर्ण लिप्सा का नतीज़ा है।

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक़ मुंबई को फ़िलहाल गर्मी से राहत मिलना संभव नहीं लग रहा है। पुणे सहित इन्दौर का भी यही हाल है। दरअसल मॉनसून के आखिरी दिनों में इन इलाक़ों में बारिश कम हुई है, जिसकी वज़ह से सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। मॉनसून की अकस्मात हुई विदाई ने भी इधर चौंकाया है। निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्कॉईमेट का कहना है कि पिछले कई दिनों से मौसम की बेरूखी रहने से बेहद सूखा बना हुआ है। आसमान साफ़ है और तापमान में वृद्धि हो रही है। यह वृद्धि कब तक बनी रह सकती है, कहना कठिन है। स्काईमेट के अध्यक्ष महेश पलावत कहते हैं कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून को लेकर स्कॉईमेट का पूर्वानुमान बिल्कुल सटीक रहा है। स्कॉईमेट ने सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान लगाया था, जबकि पुणे स्थित भारतीय मौसम विभाग के पूर्वानुमान ग़लत साबित हुए हैं। भारतीय मौसम विभाग द्वारा जारी की गई मौसम भविष्यवाणी में 97 फ़ीसदी बारिश होने का अनुमान लगाया गया था, जोकि ग़लत साबित हुआ और बारिश, घोषित किए गये 97 फ़ीसदी से 9.4 फ़ीसदी कम हुई, जबकि देश के अन्य कई इलाक़ों में तो 30 फ़ीसदी से भी कम बारिश हुई।

दक्षिण एशिया के नेपाल क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि जलवायु परिवर्तन के लिए सतर्क रहने और इसके लिए काम करने की तमाम योजनाएँ अपनाने का दावा करने के बावजूद, हम उल्टी दिशा में ही जा रहे हैं। हमारे पास इसके ख़तरों से निपटने के लिए अब बहुत लंबा वक़्त नहीं है। यदि हम अपनी विकास योजनाओं और अर्थव्यवस्थाओं में आमूलचूल परविर्तन नहीं ला सके, तो इसकी भयावहता हमारा सर्वनाश कर सकती है। चारों तरफ़ लंबे समय से सूखा चल रहा है। तापमान में निरंतर वृद्धि हो रही है। पृथ्वी पहले से कहीं ज़्यादा तप रही है। ग्लेशियर पिघल रहे हैं। कार्बन-उत्सर्जन लक्ष्य प्राप्ति से भटक रहा है। एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करते हुए लगभग सभी देश बहानेबाज़ी कर रहे हैं। मौसम के बदलते मिजाज़ से कभी-कभी भारी बारिश भी हो जाती है, जिसकी वज़ह से कृषि बर्बाद हो रही है, जबकि दुनियाभर के कई-कई देशों के जंगल जल रहे हैं।

उधर पौलेंड के कोरेनिक्स शहर में इसी माह अर्थात् 3 दिसम्बर से 14 दिसम्बर तक जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन का सीओपी अर्थात् ’कांफ्रेंस ऑफ पॉर्टीज’ -24’ हो रहा है। जिसमें इस बार दुनियाभर के देशों पर ग्रीन हाउस उत्सर्जन कटौती के नए लक्ष्य घोषित करने का दबाव होगा। सीओपी-24 में भले ही इसके लिए तैयारी भी की जा रही हो, लेकिन उसके पास अपने प्रयासों के नाम पर दिखाने लायक़ कुछ ख़ास नहीं है। कुछ ख़ास करने की ज़िद से ही ये दुनिया बचेगी।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बिल्कुल सही कहा है कि जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते से बढ़कर दूसरा कोई विकल्प नहीं है। अब से तीन बरस पहले फ्रांस की राजधानी पेरिस में दुनियाभर के 197 देशों में से 184 देशों ने जलवायु समझौते के तहत अपने-अपने देशों सहित, सामूहिक दायित्व भी तय किए थे, जो कि लंबे विचार-विमर्श के बाद ही संभव हो सके थे और कि जिसमें भारत सहित बराक ओबामा की भूमिका भी ख़ासतौर से महत्वपूर्ण रही थी। भारत की ओर से अपने तय लक्ष्य पूर्ति के लिए बहुत कुछ सकारात्मक काम किए गए हैं, किंतु अमेरिका साझेदार होते हुए भी पीछे हट गया। डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को पेरिस समझौते से बाहर कर लेने के बाद पुनर्विचार की बात कहीं है। देर आयेद, दुरूस्त आयेद।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि पेरिस समझौते में रूस और चीन को छूट मिली हुई है। भारत को विकासशील देश होने के निमित्त क्षतिपूर्ति मिलेगी, जबकि सिर्फ़ अमेरिका के हाथ-पाँव बांध दिए गए हैं, लेकिन ट्रंप यह क्यों भूल जाते हैं कि भारत, रूस और चीन से कहीं ज़्यादा कार्बन-उत्सर्जन एक अकेला अमेरिका करता है? पृथ्वी, वायुमंडल और जलवायु परिवर्तन के संबंध में, संकल्प और साहस सहित सामूहिकता की ज़रूरत हैं, तभी संसार सभी के लिए सुरक्षित हो सकता है, वर्ना सर्दियों में गर्मियों की सज़ा का विस्तार होता रहेगा। प्रकृति-प्रकोप से बचना मुश्किल है।

सम्पर्क-331, जवाहरमार्ग, इंदौर-452002

ईमेलः rajkumarkumbhaj47@gmail.com

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर: 1
रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1

---प्रायोजक---

---***---

|कथा-कहानी_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random

|हास्य-व्यंग्य_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random

---प्रायोजक---

---***---

|काव्य-जगत_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random

|संस्मरण_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random

---प्रायोजक---

---***---

|लघुकथा_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random

|उपन्यास_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random

|लोककथा_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * |

| * उपन्यास *|

| * हास्य-व्यंग्य * |

| * कविता  *|

| * आलेख * |

| * लोककथा * |

| * लघुकथा * |

| * ग़ज़ल  *|

| * संस्मरण * |

| * साहित्य समाचार * |

| * कला जगत  *|

| * पाक कला * |

| * हास-परिहास * |

| * नाटक * |

| * बाल कथा * |

| * विज्ञान कथा * |

* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=complex$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3965,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,338,ईबुक,193,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,110,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2925,कहानी,2207,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,515,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,93,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,338,बाल कलम,25,बाल दिवस,3,बालकथा,61,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,9,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,25,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,240,लघुकथा,1185,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1986,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,694,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,759,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,15,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,75,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,196,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,75,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: सर्दियों में गर्मियों की सज़ा - राजकुमार कुम्भज
सर्दियों में गर्मियों की सज़ा - राजकुमार कुम्भज
https://lh3.googleusercontent.com/-pGh73LcmGGA/WJ2VbGNosBI/AAAAAAAA2fc/HKX9idtNyZY/image_thumb.png?imgmax=200
https://lh3.googleusercontent.com/-pGh73LcmGGA/WJ2VbGNosBI/AAAAAAAA2fc/HKX9idtNyZY/s72-c/image_thumb.png?imgmax=200
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2018/12/blog-post_20.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2018/12/blog-post_20.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ