370010869858007
Loading...

हास्य कविता // कुत्ता // विजय नगरकर

image

कुत्ता


पति एक कुत्ता होता है

जो सुबह रात

पत्नी के खूंटे पर

बंधा रहता है चुपचाप,

पत्नी कहे तो

किसी पर भौंकता है

पत्नी कहे तो

चुप रहता है,


पत्नी के मायके वाले

घर आये तो

वह सिखाती है

किसे किस जगह चाटना है

ससुराल के लोग आए तो

पत्नी  चुपके से संकेत करती है

किस पर कब भौंकना है

और उसे कब भगाना है,


बंधे हुए कुत्ते को

कभी कभार

पत्नी बेल्ट लगाकर

रस्सी के साथ घुमाने ले जाती है

ज्यादा देर कही

कुत्ता सूंघने लगे तो

वह बुरी तरह डांटती है


रात भर घर की चौकीदारी करने पर

वह खुश होकर

उसे कभी कभी

मन पसंद खाना खिलाती है,

ज्यादा प्यार आने पर

उसे वह राजा सोना पुकारती है

चूमकर गले लगाती है

नाराज हो जाये तो

पति की जाति का खानदान का

उच्च स्वर में उद्धार करके

कुत्ता कहकर घर के आंगन में

हकाल देती है,


शादी होने पर

कुत्ता न घर का रहता है

न बाहर का रहता है।


--

विजय नगरकर

प्रभात कॉलोनी, कलानगर,

गुलमोहर रोड

अहमदनगर -414003 ,महाराष्ट्र


vpnagarkar@gmail.com

कविता 932267832886985697

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

emo-but-icon

मुख्यपृष्ठ item

कुछ और दिलचस्प रचनाएँ

फ़ेसबुक में पसंद करें

---प्रायोजक---

---***---

ब्लॉग आर्काइव