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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 177 // बाबा // मनीष

प्रविष्टि क्रमांक - 177


मनीष

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बाबा

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रोज़ की तरह बाबा आज भी छ: बजे उठ कर, नहा धो कर, साढ़े छह बजे अपनी सुबह की सैर पर निकल गए । मैं और बाकी लोग तो अब भी सात-साढ़े सात बजे ही उठा करते थे।

बाबा सैर पर निकल गए, लेकिन आज कुछ ज़्यादा उत्साहित थे। आज 2 अक्टूबर , गाँधी जयंती के दिन बाबा बचपन से ही एक त्योहार जैसी खुशी मनाते थे। 

लेकिन बाहर का नज़ारा कुछ खास बदला नज़र नहीं आया। म्यूनिसिपल्टी वाले अभी भी सुबह सुबह झाड़ू लगा रहे थे । पास की झुग्गी बस्ती में पानी के नल के आगे कतार लगी थी और लड़ने-झगड़ने और ठहाकों की मिश्रित आवाज़ें आ रही थी।

अभी कॉलोनी से बाहर निकाल ही रहे थे कि अभी-अभी बुहारे गए कॉमन एरिया पर किसी ने बाल्कनी से चिप्स का पैकेट फेंक दिया।  कॉलोनी के गेट से जैसे ही निकले तो चौकीदार ने मुंह की तंबाखू तुरंत रास्ते पर थूककर, चौकस सिपाही की तरह , सलाम ठोक दिया।

बाहर की सड़क पर एक ग़रीब नज़र आने वाला साइकल-चालक एक मोड़ पर,  जैसे ही एक तेज़ चलती मोटरसाइकल के सामने आया , मोटरसाइकल सवार ब्रेक लगाते ही, ज़ोर से चिल्लाया, "देख के नहीं चल सकते, चमार कहीं के !!"

पंडितजी मंदिर में प्रवेश करने ही वाले थे और उनकी नज़र सड़क किनारे गटर साफ करते कर्मचारी पर पड़ गयी। देखते ही उनका जनेऊ कान के ऊपर चढ़ गया।

बाबा मंदिर से वापसी की राह पकड़ कर जब आ रहे थे तो रास्ते में चौराहे के कोने में ट्रैफ़िक पुलिस के सिपाही और एक स्कूटर सवार के बीच कुछ आदान-प्रदान देखकर उनका मन थोड़ा खिन्न हो गया।

तभी सड़क के बगल में एक मोटरसाइकल सवार को जैसे ही एक ऑटो-रिक्शा वाला 'कट' मारकर निकला तो ऑटो के पीछे लगे चाँद-तारे के स्टिकर को देखकर मोटोरसाइकल सवार गुस्से में बुदबुदाया , "साले, सारे कटुए ऐसे ही गाड़ी चलाते हैं "

कॉलोनी में वापस प्रवेश करते ही किसी घर से एक आदमी और औरत के चिल्लाने की आवाज़ें आई। फिर आई आवाज़ एक थप्पड़ और किसी औरत के रोने की ।

बाबा ने अपना ईयरफ़ोन वापस कान में लगाया और "वैष्णव जन तो तेने  कहिए" सुनते हुए लिफ्ट का बटन दबा दिया।

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  1. आदरणीय महोदय, आपकी रचना सराहनीय है विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

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